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स्कूली ड्रेस के लिए चाहिए 8.20 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
Updated Tue, 16 Jun 2015 11:55 PM IST
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सत्र 2015-16 में सत्र परिवर्तन कर दिया गया लेकिन सत्र परिवर्तन के अनुसार जो विभागीय तैयारियां होनी चाहिए थी, वह नदारद थी। जिले के 1539 प्राइमरी व 573 जूनियर हाईस्कूलों के करीब दो लाख विद्यार्थियों को निशुल्क ड्रेस देने के लिए आठ करोड़ 20 लाख रुपये की जरूरत है।
बच्चों को न तो किताब का बंदोबस्त किया गया और न ही निशुल्क स्कूली ड्रेस ही दी गई। इसके कारण डेढ़ लाख से ज्यादा छात्र/छात्राओं को पुराने ड्रेस व पुरानी किताबों में ही काम चलाना पड़ा। एक अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षिक सत्र में 20 मई तक बच्चों को नए सत्र के हिसाब से कुछ भी सुविधा नहीं मिली।
20 मई के बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो गया लेकिन एक जुलाई तक बच्चों को नई किताबें और नए ड्रेस मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे है। हालांकि जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय ने पुस्तकों और ड्रेस से संबंधित डिमांड काफी पहले ही मुख्यालय को भेज दी है।
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परिषदीय स्कूलों में नामांकित छात्र/छात्राओं को निश्शुल्क स्कूली ड्रेस देने के लिए कुल आठ करोड़ 20 लाख रुपये जिले को चाहिए। जिले के 1539 प्राइमरी स्कूलों में एक लाख 60 हजार 628 छात्र/छात्राए नामांकित हैं। जिन पर ड्रेस के मद में छह करोड़ 42 लाख 51 हजार दो सौ रुपये खर्च होंगे।
जिले के 573 जूनियर हाईस्कूलों में 44 हजार 603 बच्चे नामांकित है और इनकों ड्रेस उपलब्ध कराने में एक करोड़ 78 लाख 41 हजार दो सौ रुपये खर्च होंगे। प्रति बच्चों को दो-दो सौ रुपये की कीमत वाली दो ड्रेस दी जाएगी।
बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी का कहना है कि विभागीय स्तर पर यहां से कार्यवाही काफी पहले कर दी गई है। ड्रेस मद में अभी तो धन आवंटन नहीं हुआ है। लेकिन पुस्तकें शीघ्र ही स्कूलों तक पहुंच जाएगी। क्योंकि यहां भेजने की तैयारी राज्य मुख्यालय से हो चुकी है।
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बच्चों को न तो किताब का बंदोबस्त किया गया और न ही निशुल्क स्कूली ड्रेस ही दी गई। इसके कारण डेढ़ लाख से ज्यादा छात्र/छात्राओं को पुराने ड्रेस व पुरानी किताबों में ही काम चलाना पड़ा। एक अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षिक सत्र में 20 मई तक बच्चों को नए सत्र के हिसाब से कुछ भी सुविधा नहीं मिली।
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20 मई के बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू हो गया लेकिन एक जुलाई तक बच्चों को नई किताबें और नए ड्रेस मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे है। हालांकि जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय ने पुस्तकों और ड्रेस से संबंधित डिमांड काफी पहले ही मुख्यालय को भेज दी है।
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परिषदीय स्कूलों में नामांकित छात्र/छात्राओं को निश्शुल्क स्कूली ड्रेस देने के लिए कुल आठ करोड़ 20 लाख रुपये जिले को चाहिए। जिले के 1539 प्राइमरी स्कूलों में एक लाख 60 हजार 628 छात्र/छात्राए नामांकित हैं। जिन पर ड्रेस के मद में छह करोड़ 42 लाख 51 हजार दो सौ रुपये खर्च होंगे।
जिले के 573 जूनियर हाईस्कूलों में 44 हजार 603 बच्चे नामांकित है और इनकों ड्रेस उपलब्ध कराने में एक करोड़ 78 लाख 41 हजार दो सौ रुपये खर्च होंगे। प्रति बच्चों को दो-दो सौ रुपये की कीमत वाली दो ड्रेस दी जाएगी।
बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी का कहना है कि विभागीय स्तर पर यहां से कार्यवाही काफी पहले कर दी गई है। ड्रेस मद में अभी तो धन आवंटन नहीं हुआ है। लेकिन पुस्तकें शीघ्र ही स्कूलों तक पहुंच जाएगी। क्योंकि यहां भेजने की तैयारी राज्य मुख्यालय से हो चुकी है।