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संतों के निशाने पर रहे पीएम मोदी
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Dec 2015 10:24 PM IST
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कारसेवकपुरम में आयोजित शौर्य दिवस में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संतों के निशाने पर रहे। सबकी एक राय थी कि भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार राम मंदिर के वायदे से भटक रही है। राममंदिर के लिए संसद में कानून बनाए। संतों की यह भी मांग थी कि हाइकोर्ट के फैसले में साबित हो चुका है कि राममंदिर वहीं था जिले तोड़कर मस्जिद तामीर की गई, ऐसे में सरकार सुप्रीम कोर्ट में डे-टू-डे सुनवाई कराए ताकि जल्द निर्णय आए।
रामजन्मभूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास ने कहा कि भगवान की कृपा से ऐसा वातावरण बन गया है कि लगता है कि लक्ष्य की पूर्ति का समय निकट आ गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुख्य मुद्दे की ओर ध्यान देने का आग्रह किया। कहा कि एक बार फिर हम लोग साथ हो जाए तो दिव्य मंदिर का निर्माण हो जाएगा।
एक बार और अनुष्ठान हो जाना चाहिए। जिस प्रकार से 1992 जुलाई में ढांचा ढहाए जाने के लिए सर्वदेव अनुष्ठान किया गया था और सफलता मिली थी। वैसे तो सभी शुभ लक्षण आ रहे हैं। आज भी हम न्यायालय का सम्मान करते है। लोगों की भावना प्रबल होंगी तो न्यायालय भी हमारी आवाज सुनेगा।
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने कहा कि मंदिर निर्माण नहीं, भारतीय संस्कृति-स्वाधीनता का भी आंदोलन है। स्वाधीनता का नारा जयश्रीराम होगा। अशोक जी आज नहीं है, उन्होंने वेदों की प्रतिष्ठा और रामजन्मभूमि के निर्माण की बात कहीं। पूर्व सांसद रामविलास दास वेदांती ने कहा कि शौर्य दिवस मनाने वाले लोग एक-एक करके जा रहे हैं। अयोध्या में अशोक जी का अंत्येष्ठि संस्कार होना चाहिए था लेकिन ऊपर से फोन आया।
कहा गया कि वहां पर यदि अंतिम संस्कार हुआ तो बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। भारत के प्रधानमंत्री सब जगह दर्शन करने जा सकते है तो अयोध्या क्यो नहीं आ सकते है। दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास ने कहा कि भगवान ने अनुकूल समय दिया है तो सोमनाथ की तरह राममंदिर पर भी कानून बनाया जाना चाहिए। अब एक और बड़े आंदोलन की जरूरत है।
शौर्य दिवस में भाजपा सांसद लल्लू सिंह, आरएसएस के प्रांत कार्यवाह डा. अनिल मिश्र, महंत कन्हैयादास महंत भगवानदास, महंत राममंगलदास, महंत प्रेमशंकरदास, महंत विशंभरदास, महंत बृजमोहनदास, महंत अवधविहारीदास, पवन शास्त्री, महंत राम मनोहरदास, महंत रामकृष्णदास, महंत श्यामसुंदरदास, पुजारी राजूदास और चेयरमैन राधेश्याम गुप्ता सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।
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रामजन्मभूमि न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास ने कहा कि भगवान की कृपा से ऐसा वातावरण बन गया है कि लगता है कि लक्ष्य की पूर्ति का समय निकट आ गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मुख्य मुद्दे की ओर ध्यान देने का आग्रह किया। कहा कि एक बार फिर हम लोग साथ हो जाए तो दिव्य मंदिर का निर्माण हो जाएगा।
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एक बार और अनुष्ठान हो जाना चाहिए। जिस प्रकार से 1992 जुलाई में ढांचा ढहाए जाने के लिए सर्वदेव अनुष्ठान किया गया था और सफलता मिली थी। वैसे तो सभी शुभ लक्षण आ रहे हैं। आज भी हम न्यायालय का सम्मान करते है। लोगों की भावना प्रबल होंगी तो न्यायालय भी हमारी आवाज सुनेगा।
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विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने कहा कि मंदिर निर्माण नहीं, भारतीय संस्कृति-स्वाधीनता का भी आंदोलन है। स्वाधीनता का नारा जयश्रीराम होगा। अशोक जी आज नहीं है, उन्होंने वेदों की प्रतिष्ठा और रामजन्मभूमि के निर्माण की बात कहीं। पूर्व सांसद रामविलास दास वेदांती ने कहा कि शौर्य दिवस मनाने वाले लोग एक-एक करके जा रहे हैं। अयोध्या में अशोक जी का अंत्येष्ठि संस्कार होना चाहिए था लेकिन ऊपर से फोन आया।
कहा गया कि वहां पर यदि अंतिम संस्कार हुआ तो बड़ा आंदोलन खड़ा हो जाएगा। भारत के प्रधानमंत्री सब जगह दर्शन करने जा सकते है तो अयोध्या क्यो नहीं आ सकते है। दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास ने कहा कि भगवान ने अनुकूल समय दिया है तो सोमनाथ की तरह राममंदिर पर भी कानून बनाया जाना चाहिए। अब एक और बड़े आंदोलन की जरूरत है।
शौर्य दिवस में भाजपा सांसद लल्लू सिंह, आरएसएस के प्रांत कार्यवाह डा. अनिल मिश्र, महंत कन्हैयादास महंत भगवानदास, महंत राममंगलदास, महंत प्रेमशंकरदास, महंत विशंभरदास, महंत बृजमोहनदास, महंत अवधविहारीदास, पवन शास्त्री, महंत राम मनोहरदास, महंत रामकृष्णदास, महंत श्यामसुंदरदास, पुजारी राजूदास और चेयरमैन राधेश्याम गुप्ता सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।