{"_id":"5855787d4f1c1b676f64d62c","slug":"remember-the-martyrs-through-movie","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंकलाब फिल्म के जरिये शहीदों को किया याद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंकलाब फिल्म के जरिये शहीदों को किया याद
फैजाबाद
Updated Sat, 17 Dec 2016 11:13 PM IST
विज्ञापन
अयोध्या में शनिवार को तुलसी स्मारक भवन सभागार में 10 वें अयोध्या फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन शहीदों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि देते फिल्म पत्रकार व लेखक रवि बुले व अन्य।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पड़ोसी जिले गोंडा से शुरू हुए अयोध्या फिल्म सोसायटी के तत्वाधान में 10वें अयोध्या फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन शनिवार की शुरूआत शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। तुलसी स्मारक भवन में तीन सत्रों में आयोजित यह समारोह शहीदों को समर्पित रहा। फिल्म ‘इंकलाब’ का प्रदर्शन किया गया तो फिल्म फेस्टिवल में न पहुंच सके नामी- गिरामी अभिनेताओं और शख्सियतों के संदेश प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाए गए।
फिल्म फेस्टिवल के आयोजक शाह आलम ने प्रोजेक्टर के माध्यम से पंकज त्रिपाठी (अभिनेता), आदित्य ओम (दक्षिण भारतीय फिल्मों के अभिनेता), रजा मुराद(अभिनेता), अमित भार्गव (सेंसर बोर्ड सदस्य), पीसी आदित्य(दक्षिण भारतीय फिल्मों के निर्देशक), पवन तिवारी(अभिनेता), मनीष श्रीवास्तव(लेखक), सागर सैनी (अभिनेता) व संस्कृति शर्मा (बाल कलाकार) आदि के संदेश दिखाए।
मुंबई से आए फिल्म निर्देशक व लेखक सैय्यद जैगम इमाम ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कला अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। विदेशों में शहीदों को लेकर बहुत बड़ी-बड़ी फिल्में बनाई गई हैं। भारत इस दृष्टि से काफी पीछे है।
विज्ञापन
फिल्म पत्रकार व लेखक मुंबई से आए रवि बुले ने कहा कि आवाम के लिए फिल्में नहीं बन रही हैं। शहीदों के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए कहते हैं कि इतिहास लेखन में कुछ लापरवाही व कुछ गड़बड़ियां भी हैं।
हरियाणा गुड़गांव से आए कवि श्याम स्नेही ने कहा कि बीज का विस्तार देखना हो तो वट वृक्ष देखिए। बूंद का विस्तार देखना हो तो सागर को देखिए। एक से अनेक बीज हो सकते हैं। समारोह का संचालन विवेक मिश्र व सुनील दत्ता ने किया।
समारोह को जंगे आजादी के महानायक गेंदा लाल दीक्षित के पौत्र आगरा के विजयेंद्र कुमार दीक्षित आदि ने भी संबोधित किया। समारोह में समारोह में अर्चना सक्सेना, सुमित सत्यभान आदि थे।
विज्ञापन
फिल्म फेस्टिवल के आयोजक शाह आलम ने प्रोजेक्टर के माध्यम से पंकज त्रिपाठी (अभिनेता), आदित्य ओम (दक्षिण भारतीय फिल्मों के अभिनेता), रजा मुराद(अभिनेता), अमित भार्गव (सेंसर बोर्ड सदस्य), पीसी आदित्य(दक्षिण भारतीय फिल्मों के निर्देशक), पवन तिवारी(अभिनेता), मनीष श्रीवास्तव(लेखक), सागर सैनी (अभिनेता) व संस्कृति शर्मा (बाल कलाकार) आदि के संदेश दिखाए।
विज्ञापन
मुंबई से आए फिल्म निर्देशक व लेखक सैय्यद जैगम इमाम ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कला अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है। विदेशों में शहीदों को लेकर बहुत बड़ी-बड़ी फिल्में बनाई गई हैं। भारत इस दृष्टि से काफी पीछे है।
विज्ञापन
फिल्म पत्रकार व लेखक मुंबई से आए रवि बुले ने कहा कि आवाम के लिए फिल्में नहीं बन रही हैं। शहीदों के प्रति अपने भाव प्रकट करते हुए कहते हैं कि इतिहास लेखन में कुछ लापरवाही व कुछ गड़बड़ियां भी हैं।
हरियाणा गुड़गांव से आए कवि श्याम स्नेही ने कहा कि बीज का विस्तार देखना हो तो वट वृक्ष देखिए। बूंद का विस्तार देखना हो तो सागर को देखिए। एक से अनेक बीज हो सकते हैं। समारोह का संचालन विवेक मिश्र व सुनील दत्ता ने किया।
समारोह को जंगे आजादी के महानायक गेंदा लाल दीक्षित के पौत्र आगरा के विजयेंद्र कुमार दीक्षित आदि ने भी संबोधित किया। समारोह में समारोह में अर्चना सक्सेना, सुमित सत्यभान आदि थे।