{"_id":"5a145bc74f1c1bb6678bd1ad","slug":"ramkrishna-found-the-roots-of-the-ancestors-found-in-the-village","type":"story","status":"publish","title_hn":"सात समंदर पार से आए रामकृष्ण ने गांव में ढूंढीं पुरखों की जड़ें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सात समंदर पार से आए रामकृष्ण ने गांव में ढूंढीं पुरखों की जड़ें
फैजाबाद
Updated Tue, 21 Nov 2017 10:31 PM IST
विज्ञापन
बीकापुर में पूर्वजों के गांव में पहुंचे रामकृष्ण का स्वागत करतीं महिला।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीकापुर तहसील प्रशासन की मदद से कई दिनों से अपने पूर्वजों के पैतृक गांव की खोज में जुटे सात समंदर पास दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर निवासी रामकृष्ण रामनाथ को आखिरकार अपनी पुश्तैनी जड़ें मिल गईं। 28 अप्रैल 1861 को उनके परदादा भिखारू गिरमिटिया मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे, तहसील प्रशासन की जांच में दस्तावेजों से मिलान और बुजुर्गों से जानकारी के बाद मंगलवार को करौदी गांव से भिखारु के जाने की पुष्टि हुई। यहां पहुंचे एनआरआई रामकृष्ण को लोगों ने माला पहना कर स्वागत किया तो गांव की महिलाओं ने आरती उतारी।
रामकृष्ण को पूर्वजों के पैतृक निवास की सोंधी मिट्टी सात समंदर पार से यहां तक खींच लाई। 60 वर्षीय रामकृष्ण वहां एक निजी कंपनी में जुड़े हैं। जब जानकारी हुई कि उनके परदादा भारत के रहने वाले थे तो, उनके मन में जिज्ञासा जागी कि अपने पूर्वजों का पैतृक गांव देखा जाए। इसके लिए छह माह का वीजा लेकर भारत आए। फैजाबाद के एक होटल में ठहरने के बाद जिलाधिकारी से मिले।
जिलाधिकारी के निर्देश पर बीकापुर तहसील प्रशासन द्वारा 2 दिनों से रामकृष्ण के साथ उनके पैतृक गांव की खोज की जा रही थी। मंगलवार सुबह हैदरगंज थाना क्षेत्र के करौंदी गांव पहुंचने पर बुजुर्गों द्वारा रामकृष्ण द्वारा दिए गए प्रमाण पर सहमति जताई गई, फिर उनका बिछड़ा परिवार मिल गया। गांव पहुंचते ही ग्रामवासियों ने फूल माला तो महिलाओं ने थाल में आरती सजा कर उनका स्वागत किया।
विज्ञापन
पैतृक गांव पाकर निहाल हुए एनआरआई रामकृष्ण ने बताया कि लगभग सौ सदस्यों का परिवार हमारा अफ्रीका में है और यहां पुन: आएंगे और परिवार के अन्य सदस्यों को भी यहां लाकर गांव का दर्शन करवाएंगे।
विज्ञापन
रामकृष्ण को पूर्वजों के पैतृक निवास की सोंधी मिट्टी सात समंदर पार से यहां तक खींच लाई। 60 वर्षीय रामकृष्ण वहां एक निजी कंपनी में जुड़े हैं। जब जानकारी हुई कि उनके परदादा भारत के रहने वाले थे तो, उनके मन में जिज्ञासा जागी कि अपने पूर्वजों का पैतृक गांव देखा जाए। इसके लिए छह माह का वीजा लेकर भारत आए। फैजाबाद के एक होटल में ठहरने के बाद जिलाधिकारी से मिले।
विज्ञापन
जिलाधिकारी के निर्देश पर बीकापुर तहसील प्रशासन द्वारा 2 दिनों से रामकृष्ण के साथ उनके पैतृक गांव की खोज की जा रही थी। मंगलवार सुबह हैदरगंज थाना क्षेत्र के करौंदी गांव पहुंचने पर बुजुर्गों द्वारा रामकृष्ण द्वारा दिए गए प्रमाण पर सहमति जताई गई, फिर उनका बिछड़ा परिवार मिल गया। गांव पहुंचते ही ग्रामवासियों ने फूल माला तो महिलाओं ने थाल में आरती सजा कर उनका स्वागत किया।
विज्ञापन
पैतृक गांव पाकर निहाल हुए एनआरआई रामकृष्ण ने बताया कि लगभग सौ सदस्यों का परिवार हमारा अफ्रीका में है और यहां पुन: आएंगे और परिवार के अन्य सदस्यों को भी यहां लाकर गांव का दर्शन करवाएंगे।