रामायण देशों का समूह बनाने पर काम कर रहा अयोध्या शोध संस्थान, पांच साल की योजना तैयार
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आज न केवल हिंदुस्तान बल्कि दुनिया के 120 देशों में रामलीलाएं होती हैं। हर किसी का अपना अनोखा तरीका होता है। कहीं भव्यता पहचान है, तो कहीं लोग सादगी के कायल हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया व थाईलैंड में रामलीला से सीता हरण शुरू होकर रावण वध पर खत्म हो जाती है।
इसमें मानव मूल्यों के समावेश के साथ आर्टिस्टिक अप्रोच की झलक मिलती है। वहीं, कैरेबियन देशों में रावण वध को ही महत्व दिया जाता है। इन अलग-अलग स्वरूपों का एक विशाल संग्रह तैयार कर विश्व पटल पर रामायण देशों का एक समूह बनाने की पहल अयोध्या शोध संस्थान ने शुरू की है।
अयोध्या शोध संस्थान रामायण देशों का समूह बनाने पर काम कर रहा है। इसमें विदेश मंत्रालय की भी मदद ली जाएगी। दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व एशिया मिस्र, यूरोप, अमरीका, कैरेबियन अफ्रीकी देश अध्ययन के दायरे में आएंगे।
इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, सूरीनाम, त्रिनिनाद, गुआना, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस, मॉरीशस, केन्या आदि देश ग्रुप ऑफ रामायण नेशन में शामिल होंगे। यह समूह दुनिया का सबसे बड़ा समूह होगा, जिसमें शामिल देश मर्यादा पुरुषोत्तम राम के व्यक्तित्व को जानकर उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतार सकेंगे।
बनाई गई है पांच वर्षों की कार्ययोजना
इन सभी देशों में होने वाली रामलीलाओं पर शोध कर संग्रहित करने के लिए संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार के अयोध्या शोध संस्थान ने चरणबद्ध तरीके से पांच वर्षों की कार्य योजना बनाई है। इसके लिए ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण का प्रकाशन किया जाएगा।
ग्लोबल इंसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण की मूल भाषा अंग्रेजी ही होगी। इसके साथ ही इसका प्रकाशन भारत के अलग-अलग प्रांतों की क्षेत्रीय भाषाओं में भी किया जाएगा। इस विश्वकोश को तैयार करने में देश-विदेश के करीब 50 हजार विद्वान, रामायण मर्मज्ञ, संस्कृति कर्मी और साहित्यकारों का बतौर शोधकर्ता योगदान लिया जाएगा। रामायण पर विश्वकोश का प्रत्येक खंड 1100 पृष्ठों का होगा।
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक वाईपी सिंह का कहना है कि अयोध्या शोध संस्थान रामायण देशों का समूह बनाने पर भी काम कर रहा है। दुनिया के 120 देशों में रामकथा व रामलीलाएं होने के साक्ष्य मिले हैं। संस्थान उन देशों के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व कलाकारों से यह शोध कराएगा।