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सरयू तट पर प्रवाहित हो रही रामनाम जप की अविरल धारा
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फटिक शिला आश्रम में राम नाम का जाप करते जापक।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। सनातन धर्म की वैदिक राजधानी श्री अवध स्थित फटिक शिला आश्रम पर मोक्षदायिनी, जीवनदायिनी और पुण्यसलिला मां सरयू नदी की पावन गोद में श्री मिथिला धाम के 1500 नाम जापकों द्वारा 54 कीर्तन कुंजों में श्री सीताराम नाम जप महायज्ञ की अविरल धारा अहर्निश प्रवाहित हो रही है, जिसमें गोता लगाकर भक्त श्रद्धालु भावविभोर हो रहे हैं।
गेरूआ परिधानों में सजे नर-नारी प्रभु सीताराम जी के संकीर्तन का मधुर गायन कर रहे हैं जो कि परमानंद और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हारमोनियम, मजीरे और ढोलक की थाप पर सुर, लय, ताल का अद्भुत समन्वय देखा जा रहा है। शाम 4.30 बजे से रात 9 बे तक आध्यात्मिक प्रवचन और संगीतमयी श्रीरामकथा का अतिभव्य आयोजन धर्मानुरागी श्रद्धालुओं को भाव नृत्य करने पर विवश कर रहा है।
तपस्वी नारायण दास उर्फ वगही बाबा की 103वीं जयंती एवं साकेतवासी महंत रामाज्ञा दास की स्मृति व राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के खुशी में संचालित श्रीसीतारामनाम महायज्ञ की धार्मिक आभा चरम पर पहुंच गयी है।
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प्रवचन सत्र में यज्ञ के संयोजक महंत सुकदेव दास ने नाम जप महिमा की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि अपितु अजामिल गण गणिकाउ। भए मुकुत हरिनाम प्रभाउ। उल्टा नाम जपत जग जाना। बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना...।
भगवान के नाम का जाप की मानव जीवन की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि वगही सरकार द्वारा 3 जुलाई 1985 से फटिक शिला आश्रम में प्रारंभ अहर्निश नाम संकीर्तन का यह प्रभाव है कि श्रीरामजन्मभूमि निर्माण की सारी बाधाएं दूर हो गयीं।
लंबे अंतराल बाद वगही बाबा के राममंदिर निर्माण के संकल्प को अब जाकर संबल मिला है। कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली है कि 500 वर्षों के संक्रमणकाल के बाद विराट मंदिर निर्माण के साक्षी बनने जा रहे हैं। प्रवचन सत्र को आचार्य राममनोहर दास, पुजारी रामस्वरूप दास,महामंडलेश्वर स्वामी शिवरामदास, रामसेवक दास रामायणी, मौनी दीनदयाल दास सहित अन्य संतों ने भी संबोधित कर भक्तों को रामकथा की महिमा का रसपान कराया।
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गेरूआ परिधानों में सजे नर-नारी प्रभु सीताराम जी के संकीर्तन का मधुर गायन कर रहे हैं जो कि परमानंद और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हारमोनियम, मजीरे और ढोलक की थाप पर सुर, लय, ताल का अद्भुत समन्वय देखा जा रहा है। शाम 4.30 बजे से रात 9 बे तक आध्यात्मिक प्रवचन और संगीतमयी श्रीरामकथा का अतिभव्य आयोजन धर्मानुरागी श्रद्धालुओं को भाव नृत्य करने पर विवश कर रहा है।
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तपस्वी नारायण दास उर्फ वगही बाबा की 103वीं जयंती एवं साकेतवासी महंत रामाज्ञा दास की स्मृति व राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के खुशी में संचालित श्रीसीतारामनाम महायज्ञ की धार्मिक आभा चरम पर पहुंच गयी है।
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प्रवचन सत्र में यज्ञ के संयोजक महंत सुकदेव दास ने नाम जप महिमा की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि अपितु अजामिल गण गणिकाउ। भए मुकुत हरिनाम प्रभाउ। उल्टा नाम जपत जग जाना। बाल्मीकि भए ब्रह्म समाना...।
भगवान के नाम का जाप की मानव जीवन की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि वगही सरकार द्वारा 3 जुलाई 1985 से फटिक शिला आश्रम में प्रारंभ अहर्निश नाम संकीर्तन का यह प्रभाव है कि श्रीरामजन्मभूमि निर्माण की सारी बाधाएं दूर हो गयीं।
लंबे अंतराल बाद वगही बाबा के राममंदिर निर्माण के संकल्प को अब जाकर संबल मिला है। कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली है कि 500 वर्षों के संक्रमणकाल के बाद विराट मंदिर निर्माण के साक्षी बनने जा रहे हैं। प्रवचन सत्र को आचार्य राममनोहर दास, पुजारी रामस्वरूप दास,महामंडलेश्वर स्वामी शिवरामदास, रामसेवक दास रामायणी, मौनी दीनदयाल दास सहित अन्य संतों ने भी संबोधित कर भक्तों को रामकथा की महिमा का रसपान कराया।