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राम विवाहोत्सव के रंग में रंगने लगी अयोध्या
फैजाबाद
Updated Fri, 02 Dec 2016 11:09 PM IST
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श्रीराम विवाहोत्सव के तहत जानकी महल में फुलवारी लीला के मंचन करते भगवान श्रीराम व लक्ष्मण के स्वरूप।
- फोटो : अमर उजाला
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रामनगरी में अगहन शुक्ल पंचमी तिथि चार दिसंबर को आराध्य श्रीराम-सीता के विवाहोत्सव को लेकर कार्यक्रम आरंभ होने लगे हैं। शुक्रवार को भगवान श्रीराम समेत चारों भाइयों के हल्दी (मटकोर) की रस्म हुई। विवाह परंपरा से जुड़े विभिन्न पूजन व अनुष्ठान आयोजित किए गए। पर्व के करीब आने के साथ ही अयोध्या राम विवाह के रंग में रंगने लगी है।
अयोध्या में सीताराम विवाह की जीवंतता विअहुति भवन में दिखती है। युगल उपासना से जुड़ी तुलसीनगर स्थित इस पीठ में सीताराम विवाहोत्सव को ही ध्यान में रखकर दो प्रखंड स्थापित हैं। पहला रास बिहारी कुंज और दूसरा विअहुति भवन।
मंदिर की व्यवस्था और भावधारा में यह दोनों प्रखंड क्रमश: भगवान राम के पक्ष अयोध्या और सीता के पक्ष जनकपुर के रूप में स्थापित हैं। वर्ष भर विवाहोपासना के लिए प्रसिद्ध विअहुति भवन में राम विवाह पर उत्सव का उल्लास चरम पर होता है।
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मंदिर में श्रीराम विवाहोत्सव को लेकर परंपरानुसार विभिन्न पूजन व अनुष्ठान आयोजित हो रहे हैं। मंदिर के पुजारी विद्याभूषण बताते हैं कि शक्रवार को गर्भगृह की साज-सज्जा के साथ विभिन्न अनुष्ठानों के साथ विवहोत्सव के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं।
मंदिर में भगवान श्रीराम व चारों भाइयों के हल्दी (मटकोर) की रस्म का आयोजन किया गया। शनिवार को माता किशोरी जी के हल्दी मटकोर की रस्म आयोजित की जाएगी। शाम आठ बजे से भगवान श्रीराम समेत चारों भाइयों के तिलकोत्सव की रस्म विवाह परंपरा के अनुसार होगी।
श्रीराम विवाहोत्सव को लेकर दुल्हन की तरह सजे जानकी महल ट्रस्ट में गुरुवार को श्रीरामार्चा पूजन, गणेश पूजन, विवाह गीत, व लीला मंचन के साथ विवाहोत्सव का शुभारंभ हो गया है। शुक्रवार को सुबह दस से एक बजे तक फुलवारी लीला का मंचन किया गया।
भगवान राम व सीता के फुलवारी लीला के मंचन के मनमोहक दृश्य से श्रद्धालु कृतार्थ होते रहे। श्रद्धालुओं व संतों से संगीतमय वातावरण में गाए जा रहे विवाह पद कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं। नयन लाभु सब सादर लेही।। जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहां सो थोरी।। गुंजायमान होते रहे।
शाम को छह बजे से नौ बजे तक नृत्य व संगीतमय धनुष यज्ञ व परशुराम संवाद का मंचन किया गया। शनिवार को हल्द हाथ, तिलक एवं मेंहदी, अंताक्षरी प्रतियोगिता व पुरस्कार और पारिवारिक संगीत संध्या के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अधिग्रहीत परिसर से सटे रंगमहल मंदिर भी विवाहोत्सव के रंग में रंग गया है। पूरे मंदिर परिसर को झिलमिल झालरों व रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है।
मंदिर में विवाहोत्सव का शुभारंभ हो गया है। मंदिर के महंत रामशरण दास बताते हैं कि मंदिर में विराजमान विग्रह भगवान का हल्दी पूजन, मंडप पूजन, किशोरी जी का पूजन, षोडशोपचार पूजन, भगवान के स्वरूपों की पूजन-अर्चन किया जाएगा।
रामलीला भी आयोजित की जाएगी। चार दिसंबर को गाजे-बाजे के साथ श्रीराम बारात निकाली जाएगी। पांच दिसंबर के कलेवा रस्म का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह लक्ष्मण किला, सद्गुरु सदन, श्रीराम बल्लभाकुंज, रामहर्षण कुंज बड़ा स्थान दशरथ महल, कनक भवन, दिव्यकला कुंज समेत अन्य मठ-मंदिरों में विवाहोत्सव को लेकर आयोजनों की धूम है।
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अयोध्या में सीताराम विवाह की जीवंतता विअहुति भवन में दिखती है। युगल उपासना से जुड़ी तुलसीनगर स्थित इस पीठ में सीताराम विवाहोत्सव को ही ध्यान में रखकर दो प्रखंड स्थापित हैं। पहला रास बिहारी कुंज और दूसरा विअहुति भवन।
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मंदिर की व्यवस्था और भावधारा में यह दोनों प्रखंड क्रमश: भगवान राम के पक्ष अयोध्या और सीता के पक्ष जनकपुर के रूप में स्थापित हैं। वर्ष भर विवाहोपासना के लिए प्रसिद्ध विअहुति भवन में राम विवाह पर उत्सव का उल्लास चरम पर होता है।
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मंदिर में श्रीराम विवाहोत्सव को लेकर परंपरानुसार विभिन्न पूजन व अनुष्ठान आयोजित हो रहे हैं। मंदिर के पुजारी विद्याभूषण बताते हैं कि शक्रवार को गर्भगृह की साज-सज्जा के साथ विभिन्न अनुष्ठानों के साथ विवहोत्सव के कार्यक्रम शुरू हो गए हैं।
मंदिर में भगवान श्रीराम व चारों भाइयों के हल्दी (मटकोर) की रस्म का आयोजन किया गया। शनिवार को माता किशोरी जी के हल्दी मटकोर की रस्म आयोजित की जाएगी। शाम आठ बजे से भगवान श्रीराम समेत चारों भाइयों के तिलकोत्सव की रस्म विवाह परंपरा के अनुसार होगी।
श्रीराम विवाहोत्सव को लेकर दुल्हन की तरह सजे जानकी महल ट्रस्ट में गुरुवार को श्रीरामार्चा पूजन, गणेश पूजन, विवाह गीत, व लीला मंचन के साथ विवाहोत्सव का शुभारंभ हो गया है। शुक्रवार को सुबह दस से एक बजे तक फुलवारी लीला का मंचन किया गया।
भगवान राम व सीता के फुलवारी लीला के मंचन के मनमोहक दृश्य से श्रद्धालु कृतार्थ होते रहे। श्रद्धालुओं व संतों से संगीतमय वातावरण में गाए जा रहे विवाह पद कुअँरु कुअँरि कल भावँरि देहीं। नयन लाभु सब सादर लेही।। जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कछु कहां सो थोरी।। गुंजायमान होते रहे।
शाम को छह बजे से नौ बजे तक नृत्य व संगीतमय धनुष यज्ञ व परशुराम संवाद का मंचन किया गया। शनिवार को हल्द हाथ, तिलक एवं मेंहदी, अंताक्षरी प्रतियोगिता व पुरस्कार और पारिवारिक संगीत संध्या के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अधिग्रहीत परिसर से सटे रंगमहल मंदिर भी विवाहोत्सव के रंग में रंग गया है। पूरे मंदिर परिसर को झिलमिल झालरों व रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है।
मंदिर में विवाहोत्सव का शुभारंभ हो गया है। मंदिर के महंत रामशरण दास बताते हैं कि मंदिर में विराजमान विग्रह भगवान का हल्दी पूजन, मंडप पूजन, किशोरी जी का पूजन, षोडशोपचार पूजन, भगवान के स्वरूपों की पूजन-अर्चन किया जाएगा।
रामलीला भी आयोजित की जाएगी। चार दिसंबर को गाजे-बाजे के साथ श्रीराम बारात निकाली जाएगी। पांच दिसंबर के कलेवा रस्म का आयोजन किया जाएगा। इसी तरह लक्ष्मण किला, सद्गुरु सदन, श्रीराम बल्लभाकुंज, रामहर्षण कुंज बड़ा स्थान दशरथ महल, कनक भवन, दिव्यकला कुंज समेत अन्य मठ-मंदिरों में विवाहोत्सव को लेकर आयोजनों की धूम है।