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Ram Mandir: हैदराबाद-राजस्थान में होगी लकड़ियों की नक्काशी, कटाई के बाद सुखाने को नागपुर भेजीं सागौन की लकड़ियां

Thu, 06 Apr 2023 10:40 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 06 Apr 2023 10:40 AM IST
सार

राममंदिर में 42 दरवाजे लगेंगे। इन दरवाजों में सागौन की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाएगा। हैदराबाद और राजस्थान में लकड़ियों की नक्काशी होगी। नक्काशी के बाद तैयार खिड़की-दरवाजे अयोध्या लाए जाएंगे।

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Ram Mandir news Carving of wood will be in Hyderabad and Rajasthan
राम मंदिर निर्माण कार्य जारी - फोटो : ट्विटर

विस्तार

रामजन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन 161 फीट ऊंचे राममंदिर में 42 दरवाजे लगाए जाने हैं। दरवाजे, खिड़की व चौखट के लिए महाराष्ट्र के टीक वुड (सागौन) की लकड़ियां प्रयोग की जाएंगी। महाराष्ट्र में लकड़ियों की कटाई के बाद इन्हें सुखाने के लिए नागपुर भेजा जाएगा। 
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इसके बाद हैदराबाद व राजस्थान में इनकी नक्काशी होगी। नक्काशी के बाद तैयार खिड़की-दरवाजे अयोध्या लाए जाएंगे। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के मुताबिक मंदिर निर्माण की कार्यदायी संस्था लार्सन एंड टुब्रो के अधिकारी समय-समय पर महाराष्ट्र के चंद्रपुर जाकर जरूरत के अनुसार लकड़ियों की कटाई करवाते रहेंगे। उन्हीं की देखरेख में हैदराबाद एवं राजस्थान में लकड़ियों की नक्काशी का भी काम संपन्न होगा।
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विशेषज्ञों के मुताबिक आमतौर पर सागौन की लकड़ियों में 20 से 30 फीसदी तक की नमी होती है। लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के लिए नमी को 10 फीसदी तक लाना जरूरी होता है। जानकारी के अनुसार 1855 क्यूबिक फीट सागौन की लकड़ी की पहली खेप जल्द ही समस्त प्रक्रियाओं के बाद सीधे अयोध्या पहुंचेगी।
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मई में शुरू होगा रामलला के घर की छत ढालने का काम
राममंदिर के भूतल (गर्भगृह) का काम अब अंतिम चरण में पहुंच रहा है। अभी पत्थरों पर मेहराब(आर्च) बनाने का काम चल रहा है। अगले महीने से रामलला के घर की छत ढालने का काम शुरू हो जाएगा। राममंदिर के गर्भगृह का परिक्रमा पथ भी बन चुका है। मेहराब वास्तुकला का एक शानदार काम है जो किसी भी संरचना में लालित्य और सुंदरता जोड़ सकता है। 

मंदिर के प्रवेश द्वार से लेकर कई स्थानों पर मेहराब बनाने का काम चल रहा है। बीम के भी सभी स्तंभ तैयार हैं। इसी माह यह काम पूरा होते ही मई से राममंदिर की छत ढालने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। राममंदिर में दो परिक्रमा पथ बनाए जा रहे हैं जिसमें से गर्भगृह का परिक्रमा पथ बन चुका है। गर्भगृह की परिक्रमा केवल पुजारी ही कर पाएंगे। 

 

मंदिर परिसर के परिक्रमा पथ का काम अंतिम चरण में है। यह परिक्रमा पथ कीर्तन मंडप से शुरू होकर भजन मंडप तक है। मंदिर का सिंहद्वार पहला प्रवेश द्वार होगा। प्रवेश द्वार की 32 सीढ़िया भी लगभग बनकर तैयार हो चुकी हैं। मंदिर का गृह मंडप भी बनकर तैयार है। गृहमंडप का द्वार मकराना के मार्बल से बनाया गया है। ऊपरी दीवारों पर मार्बल लगाने का काम चल रहा है।

 

12 फीट चौड़ा होगा गर्भगृह का कपाट
राममंदिर के गर्भगृह का कपाट (दरवाजा) महाराष्ट्र की सागौन की लकड़ियों से बनेगा। महाराष्ट्र में सागौन की लकड़ियों की कटाई का काम चल रहा है। जल्द ही पहली खेप अयोध्या पहुंच जाएगी। गर्भगृह का कपाट 9 फीट ऊंचा और 12 फीट चौड़ा होगा। दरवाजे सोने से मंडित होंगे। मूल गर्भगृह में श्रद्धालु नहीं जा पाएंगे, सिर्फ पुजारी, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को ही जाने की अनुमति होगी।


 

राममंदिर के भूतल का 70 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। अगले माह से मंदिर की छत ढालने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। मई व जून में छत ढालने का काम तेजी से चलेगा। काम की गति बढ़ाने के लिए मजदूरों की संख्या भी बढ़ा दी गई है। दिसंबर 2023 तक भूतल बनकर तैयार हो जाएगा।- डॉ.अनिल मिश्र, सदस्य श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
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