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अब रामोत्सव में दिखेगी ट्रस्ट व विहिप की जुगलबंदी .
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अयोध्या-राम मंदिर का प्रस्तावित मॉडल।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। विराजमान रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के लिए अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विहिप की जुगलबंदी साथ दिखेगी। पूरे देश में पौने तीन लाख गांवों में वर्ष प्रतिपदा से हनुमान जयंती 8 अप्रैल तक रामोत्सव के जरिए मंदिर निर्माण की अलख जगाई जाएगी। इस दौरान प्रस्तावित राममंदिर मॉडल के साथ रथयात्रा व शोभायात्राएं निकाल कर शिलापूजन कार्यक्रम होगा। इसके जरिए साढ़े तीन दशक पुराना माहौल बनाने के साथ चंदा जुटाने की कवायद भी होगी।
विहिप ने रामलला के पक्ष में सुप्रीमकोर्ट से आए फैसले के बाद ताकत दिखाने के उद्देश्य से रामोत्सव का एलान किया था। तब सरकार की ओर से राममंदिर निर्माण के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट का स्वरूप तय नहीं था।
विहिप अपने राममंदिर मॉडल को हर हाल में अपनाने की जिद पूरी करना चाहती थी। अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश, श्रीरामजन्भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास समेत उपाध्यक्ष चंपत राय जैसे दिग्गज मॉडल से कोई समझौता न करने की बात कहते थे।
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अब बदले परिदृश्य में जब सरकार की ओर से गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में विहिप का दबदबा हो गया है। सारा निर्णय विहिप के पाले में आ गया है। ऐसे में रामोत्सव के आयोजन में ट्रस्ट की जुगलबंदी साफ दिखेगी। वर्ष प्रतिपदा यानि नवरात्र के पहले दिन 25 मार्च से हनुमान जयंती 8 अप्रैल तक 15 दिन पूरे देश के 2 लाख 75 हजार गांवों में रामोत्सव के जरिए राममंदिर निर्माण की अलख जगाई जाएगी।
प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी युवा विंग बजरंग दल व दुर्गा वाहिनी का इसमे खास भूमिका दिखेगी। साथ देशभर के साधु-संत राममंदिर को लेकर विहिप के प्रस्तावित मॉडल के साथ रथयात्रा व शोभायात्रा की अगुवाई करते दिखेंगे। जगह-जगह भगवान राम की पूजा-अर्चना के सामूहिक आयोजनों के साथ संगोष्ठियां होंगी। राममंदिर के लिए शिलापूजन व दान भी लिए जाएंगे। दान की रसीदें ट्रस्ट की ओर से दी जाएंगी।
1985 जैसा माहौल बनाने की कोशिश
1984 की प्रथम धर्म संसद (नई दिल्ली) में अयोध्या, मथुरा, काशी के धर्म स्थानों की मुक्ति का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होने के बाद दिगंबर अखाड़ा, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ की अध्यक्षता में गठन हुआ था। फिर जन्मभूमि को मुक्त कराने हेतु जन-जागरण के लिए सीतामढ़ी से अयोध्या तक राम-जानकी रथ यात्रा का कार्यक्रम तय हुआ था। 1985 में उत्तर प्रदेश में भ्रमण के लिए अयोध्या से भेजे गए 6 राम-जानकी रथों से ऐसा माहौल देशभर में बनाया कि 1 फरवरी 1986 को ताला खुल गया। जनवरी, 1989 में प्रयाग महाकुंभ के अवसर पर आयोजित धर्मसंसद में शिला पूजन एवं शिलान्यास का निर्णय लेकर इस अभिनव कार्यक्रम ने संपूर्ण विश्व के रामभक्तों को जन्मभूमि के साथ प्रत्यक्ष जोड़ दिया था। राममंदिर निर्माण के लिए अब ऐसा ही माहौल फिर देशभर में बनाने की तैयारी है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि राममंदिर भव्य बनाने के लिए ट्रस्ट तैयार है। विहिप हर वर्ष रामोत्सव का आयोजन 50 हजार गांवों में करती थी। लेकिन अब व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी है। 2.75 लाख गांवों में रामोत्सव का भव्य आयोजन होगा। 25 मार्च से महोत्सव का शुभारंभ होगा जो कि 8 अप्रैल हनुमान जयंती तक मनाया जाएगा। इस दौरान गांव-गांव भगवान राम की पूजा-अर्चना के सामूहिक आयोजनों के साथ संगोष्ठियां होंगी। लोगों को राममंदिर आंदोलन की जानकारी भी दी जाएगी। इसलिए स्वाभाविक है कि राम महोत्सव में हिंदुत्व की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के मुद्दे पर सहयोग का आह्वाहन किया जाएगा व इसकी जरूरत भी बताई जाएगी। अयोध्या के घर-घर में भगवान राम का पूजन-अर्चन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाएगा।
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विहिप ने रामलला के पक्ष में सुप्रीमकोर्ट से आए फैसले के बाद ताकत दिखाने के उद्देश्य से रामोत्सव का एलान किया था। तब सरकार की ओर से राममंदिर निर्माण के लिए गठित होने वाले ट्रस्ट का स्वरूप तय नहीं था।
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विहिप अपने राममंदिर मॉडल को हर हाल में अपनाने की जिद पूरी करना चाहती थी। अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश, श्रीरामजन्भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास समेत उपाध्यक्ष चंपत राय जैसे दिग्गज मॉडल से कोई समझौता न करने की बात कहते थे।
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अब बदले परिदृश्य में जब सरकार की ओर से गठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में विहिप का दबदबा हो गया है। सारा निर्णय विहिप के पाले में आ गया है। ऐसे में रामोत्सव के आयोजन में ट्रस्ट की जुगलबंदी साफ दिखेगी। वर्ष प्रतिपदा यानि नवरात्र के पहले दिन 25 मार्च से हनुमान जयंती 8 अप्रैल तक 15 दिन पूरे देश के 2 लाख 75 हजार गांवों में रामोत्सव के जरिए राममंदिर निर्माण की अलख जगाई जाएगी।
प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी युवा विंग बजरंग दल व दुर्गा वाहिनी का इसमे खास भूमिका दिखेगी। साथ देशभर के साधु-संत राममंदिर को लेकर विहिप के प्रस्तावित मॉडल के साथ रथयात्रा व शोभायात्रा की अगुवाई करते दिखेंगे। जगह-जगह भगवान राम की पूजा-अर्चना के सामूहिक आयोजनों के साथ संगोष्ठियां होंगी। राममंदिर के लिए शिलापूजन व दान भी लिए जाएंगे। दान की रसीदें ट्रस्ट की ओर से दी जाएंगी।
1985 जैसा माहौल बनाने की कोशिश
1984 की प्रथम धर्म संसद (नई दिल्ली) में अयोध्या, मथुरा, काशी के धर्म स्थानों की मुक्ति का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होने के बाद दिगंबर अखाड़ा, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ की अध्यक्षता में गठन हुआ था। फिर जन्मभूमि को मुक्त कराने हेतु जन-जागरण के लिए सीतामढ़ी से अयोध्या तक राम-जानकी रथ यात्रा का कार्यक्रम तय हुआ था। 1985 में उत्तर प्रदेश में भ्रमण के लिए अयोध्या से भेजे गए 6 राम-जानकी रथों से ऐसा माहौल देशभर में बनाया कि 1 फरवरी 1986 को ताला खुल गया। जनवरी, 1989 में प्रयाग महाकुंभ के अवसर पर आयोजित धर्मसंसद में शिला पूजन एवं शिलान्यास का निर्णय लेकर इस अभिनव कार्यक्रम ने संपूर्ण विश्व के रामभक्तों को जन्मभूमि के साथ प्रत्यक्ष जोड़ दिया था। राममंदिर निर्माण के लिए अब ऐसा ही माहौल फिर देशभर में बनाने की तैयारी है।
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने बताया कि राममंदिर भव्य बनाने के लिए ट्रस्ट तैयार है। विहिप हर वर्ष रामोत्सव का आयोजन 50 हजार गांवों में करती थी। लेकिन अब व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी है। 2.75 लाख गांवों में रामोत्सव का भव्य आयोजन होगा। 25 मार्च से महोत्सव का शुभारंभ होगा जो कि 8 अप्रैल हनुमान जयंती तक मनाया जाएगा। इस दौरान गांव-गांव भगवान राम की पूजा-अर्चना के सामूहिक आयोजनों के साथ संगोष्ठियां होंगी। लोगों को राममंदिर आंदोलन की जानकारी भी दी जाएगी। इसलिए स्वाभाविक है कि राम महोत्सव में हिंदुत्व की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के मुद्दे पर सहयोग का आह्वाहन किया जाएगा व इसकी जरूरत भी बताई जाएगी। अयोध्या के घर-घर में भगवान राम का पूजन-अर्चन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जाएगा।