{"_id":"5ed679b68ebc3e907234bb37","slug":"quarantine-faizabad-news-lko5241730145","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रवासी युवक ने सब्जी के ठेले पर खुद को किया क्वारंटीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रवासी युवक ने सब्जी के ठेले पर खुद को किया क्वारंटीन
विज्ञापन
सब्जी के ठेले पर होम क्वारंटीन हुआ सूरत से आया युवक।
- फोटो : FAIZABAD
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीकापुर। लॉकडाउन के बाद श्रमिक स्पेशल ट्रेन से सूरत से घर आए महावा निवासी एक युवक ने घर के बाहर खेत में ठेले पर ही खुद को क्वारंटीन कर लिया। खेत में छप्पर के अंदर एक सब्जी के ठेले पर उसने अपना आशियाना बनाया है, जिससे खुद के साथ परिवार के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
महावा निवासी अमित कुमार रोजी रोटी के सिलसिले में गुजरात के सूरत में रहता है।
अमित कुमार ने बताया कि लॉकडाउन के कारण जब सूरत में रहने खाने की समस्या हुई तो वह 22 मई को ट्रेन द्वारा अयोध्या पहुंचा। वहां से बस द्वारा देश दीपक महाविद्यालय तेंदुआ माफी बीकापुर आश्रय स्थल लाया गया।
आश्रय स्थल में नाम व पता नोट करने के बाद 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन के लिए बता कर बाद में राशन किट देने का आश्वासन देकर पैदल ही घर भेज दिया गया। गांव आने के बाद वह अपने गांव के बाहर अपने खेत में क्वारंटीन हो गए।
विज्ञापन
बताया कि 10 दिन बीत जाने के बाद वह 1 जून को राशन की किट लेने के लिए आश्रय स्थल देश दीपक महाविद्यालय में गए तो वहां बड़ी मशक्कत के बाद राशन का पैकेट मिला। जिसमें 4 किलो आटा, 5 किलो चावल, 1 किलो चना, 1 किलो अरहर की दाल, अरहर की दाल, 4 किलो आलू मिला। बताया कि 3 किलो आलू सड़ गई थी जिसे फेंकना पड़ा। सिर्फ 1 किलो आलू ही बची रही।
अरहर की दाल में कंकड़ मिला हुआ था। प्रशासनिक व्यवस्था से दुखी होकर पीड़ित द्वारा मंगलवार को जनसुनवाई पोर्टल पर मुख्यमंत्री को ऑनलाइन शिकायत पत्र भेजकर घटिया राशन दिए जाने की शिकायत की गई है। जबकि क्षेत्र के जागरूक लोगों कहना है कि दूसरे प्रांतों से आने वाले प्रवासी कामगारों को आश्रय स्थल पर तत्काल राशन की किट दिए जाने की व्यवस्था किया जाना चाहिए। होम क्वारंटीन होने के दौरान राशन की किट लेने के लिए आश्रय स्थल पर आना नियम विरुद्ध है।
विज्ञापन
महावा निवासी अमित कुमार रोजी रोटी के सिलसिले में गुजरात के सूरत में रहता है।
अमित कुमार ने बताया कि लॉकडाउन के कारण जब सूरत में रहने खाने की समस्या हुई तो वह 22 मई को ट्रेन द्वारा अयोध्या पहुंचा। वहां से बस द्वारा देश दीपक महाविद्यालय तेंदुआ माफी बीकापुर आश्रय स्थल लाया गया।
विज्ञापन
आश्रय स्थल में नाम व पता नोट करने के बाद 21 दिन के लिए होम क्वारंटीन के लिए बता कर बाद में राशन किट देने का आश्वासन देकर पैदल ही घर भेज दिया गया। गांव आने के बाद वह अपने गांव के बाहर अपने खेत में क्वारंटीन हो गए।
विज्ञापन
बताया कि 10 दिन बीत जाने के बाद वह 1 जून को राशन की किट लेने के लिए आश्रय स्थल देश दीपक महाविद्यालय में गए तो वहां बड़ी मशक्कत के बाद राशन का पैकेट मिला। जिसमें 4 किलो आटा, 5 किलो चावल, 1 किलो चना, 1 किलो अरहर की दाल, अरहर की दाल, 4 किलो आलू मिला। बताया कि 3 किलो आलू सड़ गई थी जिसे फेंकना पड़ा। सिर्फ 1 किलो आलू ही बची रही।
अरहर की दाल में कंकड़ मिला हुआ था। प्रशासनिक व्यवस्था से दुखी होकर पीड़ित द्वारा मंगलवार को जनसुनवाई पोर्टल पर मुख्यमंत्री को ऑनलाइन शिकायत पत्र भेजकर घटिया राशन दिए जाने की शिकायत की गई है। जबकि क्षेत्र के जागरूक लोगों कहना है कि दूसरे प्रांतों से आने वाले प्रवासी कामगारों को आश्रय स्थल पर तत्काल राशन की किट दिए जाने की व्यवस्था किया जाना चाहिए। होम क्वारंटीन होने के दौरान राशन की किट लेने के लिए आश्रय स्थल पर आना नियम विरुद्ध है।