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रामायण विद्यापीठ की जमीन से बेदखल होंगे पांच सौ परिवार
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अयोध्या। रामनगरी में प्रभु श्रीराम की विशाल 251 मीटर प्रतिमा लगाने के लिए मांझा बरहटा गयापुर दोआबा में 85.997 हेक्टेयर किसानों की जमीन के अधिग्रहण से पांच सौ परिवारों की घर-गृहस्थी छीनने जा रही है। दस्तावेजों में इन परिवारों के नाम मालिकाना हक में नहीं है।
खतौनी में जमीन महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट की कृषि भूमि दर्ज है। ऐसे में इन परिवारों के सामने न वैधानिक रूप से आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है न भूमि भवन के मुआवजा की गुंजाइश। उधर, ट्रस्ट की ओर से इनके कब्जे को अवैध बताते हुए अधिग्रहण में आपत्ति नहीं करने की बात कही जा रही है।
अलबत्ता इस बात से बेहद खुश हैं कि कुल अधिग्रहण के दायरे में उनकी मिल्कियत का 70 फीसदी हिस्सा वाले 174 प्लाट आ गए हैं, जिससे अरबों की रकम मिलनी तय है। उधर, बेदखल होने के जद में आए परिवारों ने अब अंतिम सांस तक संघर्ष करने का ऐलान किया है। कई राजनीति दल व संगठन भी इनके पक्ष में लामबंद हो रहे हैं।
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अयोध्या में भगवान श्रीराम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की हरी झंडी के बाद 14 जनवरी को जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की ओर से अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
मांझा बरहटा इलाके के 259 किसानों की 85.997 हेक्टेयर जमीन को क्रय किया जाना है। जिसके लिए 15 दिनों के अंदर वहां के किसानों से आपत्तियां मांगी गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत भगवान राम की विशाल प्रतिमा के साथ इस स्थल को टूरिस्ट सेंटर के तौर पर विकसित किया जाना है। जिसमें पार्क, म्यूजियम, लाइब्रेरी, फूड प्लाजा, लैंड स्केपिंग और राम कथा की गैलरी आदि का निर्माण होना है। जिसके लिए प्रदेश सरकार ने 447.46 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। वहीं जमीन खरीदने के लिए सरकार ने करीब सौ करोड़ का बजट जारी भी कर दिया है।
अधिग्रहण के दायरे में सबसे अधिक 70 फीसदी हिस्सा महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट का है। इसके कुल 174 प्लाट नोटिफिकेशन में शामिल हैं। ट्रस्ट के कर्ता-धर्ताओं की नोटिफिकेशन की कार्रवाई से बल्ले-बल्ले हैं।
कारण कि अधिकांश भूमि पर लोगों का दशकों से अवैध कब्जा मुक्त नहीं हो पाया था। ऐसे में बगैर मालिकाना हक के रह रहे मांझा बरहटा के धरमू का पुरवा, मुजैहनिया व न्योरी का पुरवा में रहने वाले 5 सौ परिवारों के करीब ढाई हजार से ज्यादा सदस्यों को अब घर व खेत उजड़ने का भय सता रहा है।
यादव बहुल इस गांव में रहने वाले अधिकांश लोगों की जीविका का साधन खेती व मजदूरी है। ये सभी यहां तीन से चार पीढ़ियों से रह रहे हैं, जो अब सदमे में हैं। उनका कहना है कि भगवान श्रीराम की प्रतिमा जरूर लगे लेकिन किसी खाली स्थान पर, हमें उजाड़ कर नहीं। वामदलों ने इनके पक्ष में सड़क पर उतरने का ऐलान भी कर दिया है। जबकि सपा-बसपा समेत कांग्रेस में भी इनके उजाड़ने की कार्रवाई का विरोध शुरू होने वाला है। भाजपा विरोधी नेताओं का तर्क है कि आखिर पीढ़ियों से बसे लोग कहां जाएंगे।
अधिग्रहण से महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट होगा मालामाल
मांझा-बरहटा क्षेत्र में अधिग्रहीत की जा रही करीब 70 प्रतिशत जमीन महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम है जो 80 के दशक में किसानों से क्रय की गई थी। तब ट्रस्ट इस भूमि पर कब्जा नहीं ले पाया था। जानकार बताते हैं कि जब इन सभी जमीनों को क्रय किया गया था, तब यह बाढ़ ग्रस्त एरिया था, यहां आबादी नहीं थी। समय बीतने के साथ यहां बंधा बनने के बाद आबादी बस गई।
जमीन पर महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट का कब्जा न होने के कारण स्थानीय लोगों के साथ जमीन क्रय करने वाले किसानों के परिवार के साथ कुछ अन्य लोग भी इन जमीनों पर काबिज हो गए। इसके अलावा कुछ अन्य परिवार कई पीढ़ियों से इन जमीनों पर घर व खेती करते चले आ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अधिग्रहीत की जाने वाले 259 किसानों की भूमि में अकेले 174 अलग-अलग नंबरों के प्लाट महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम है। सरकार अब वास्तविक भू-स्वामी को सर्किल रेट से दो गुना मुआवजा देने का ऐलान किया है।
सरकारी गजट के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे भूमि को 1.69 करोड़ प्रति हेक्टेयर, लिंक रोड से सटे भूमि को 1.24 करोड़ प्रति हेक्टेयर, खड़ंजा मार्ग से सटे भूमि को 1.21 करोड़ प्रति हेक्टेयर व कृषि भूमि को 75 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे में तय है कि सरकारी मुआवजे से महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट मालामाल हो जाएगा। महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के सदस्य सालिगराम मिश्र का कहना है सरकार बेशक ट्रस्ट की जमीन लें लेकिन उन्हें सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा मुआवजा मिले।
वास्तविक भू-स्वामी को ही मिलेगा मुआवजा
259 किसानों की 85.997 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पर्यटन विभाग के पक्ष में किया जा रहा है। इन सभी को सर्किल रेट से दोगुना ज्यादा मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजा उन्हें ही मिलेगा जिनके नाम भूमि है। इसका पूरा विवरण नोटिफिकेशन में डीएम की ओर से जारी किया गया है। लोगों से 10 फरवरी तक आपत्ति मांगी गई है, इसके बाद भूमि अधिग्रहण करने की शुरुआत की जाएगी।
आरपी यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, अयोध्या
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खतौनी में जमीन महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट की कृषि भूमि दर्ज है। ऐसे में इन परिवारों के सामने न वैधानिक रूप से आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है न भूमि भवन के मुआवजा की गुंजाइश। उधर, ट्रस्ट की ओर से इनके कब्जे को अवैध बताते हुए अधिग्रहण में आपत्ति नहीं करने की बात कही जा रही है।
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अलबत्ता इस बात से बेहद खुश हैं कि कुल अधिग्रहण के दायरे में उनकी मिल्कियत का 70 फीसदी हिस्सा वाले 174 प्लाट आ गए हैं, जिससे अरबों की रकम मिलनी तय है। उधर, बेदखल होने के जद में आए परिवारों ने अब अंतिम सांस तक संघर्ष करने का ऐलान किया है। कई राजनीति दल व संगठन भी इनके पक्ष में लामबंद हो रहे हैं।
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अयोध्या में भगवान श्रीराम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित करने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ की हरी झंडी के बाद 14 जनवरी को जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की ओर से अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है।
मांझा बरहटा इलाके के 259 किसानों की 85.997 हेक्टेयर जमीन को क्रय किया जाना है। जिसके लिए 15 दिनों के अंदर वहां के किसानों से आपत्तियां मांगी गई है। इस प्रोजेक्ट के तहत भगवान राम की विशाल प्रतिमा के साथ इस स्थल को टूरिस्ट सेंटर के तौर पर विकसित किया जाना है। जिसमें पार्क, म्यूजियम, लाइब्रेरी, फूड प्लाजा, लैंड स्केपिंग और राम कथा की गैलरी आदि का निर्माण होना है। जिसके लिए प्रदेश सरकार ने 447.46 करोड़ का बजट प्रस्तावित किया है। वहीं जमीन खरीदने के लिए सरकार ने करीब सौ करोड़ का बजट जारी भी कर दिया है।
अधिग्रहण के दायरे में सबसे अधिक 70 फीसदी हिस्सा महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट का है। इसके कुल 174 प्लाट नोटिफिकेशन में शामिल हैं। ट्रस्ट के कर्ता-धर्ताओं की नोटिफिकेशन की कार्रवाई से बल्ले-बल्ले हैं।
कारण कि अधिकांश भूमि पर लोगों का दशकों से अवैध कब्जा मुक्त नहीं हो पाया था। ऐसे में बगैर मालिकाना हक के रह रहे मांझा बरहटा के धरमू का पुरवा, मुजैहनिया व न्योरी का पुरवा में रहने वाले 5 सौ परिवारों के करीब ढाई हजार से ज्यादा सदस्यों को अब घर व खेत उजड़ने का भय सता रहा है।
यादव बहुल इस गांव में रहने वाले अधिकांश लोगों की जीविका का साधन खेती व मजदूरी है। ये सभी यहां तीन से चार पीढ़ियों से रह रहे हैं, जो अब सदमे में हैं। उनका कहना है कि भगवान श्रीराम की प्रतिमा जरूर लगे लेकिन किसी खाली स्थान पर, हमें उजाड़ कर नहीं। वामदलों ने इनके पक्ष में सड़क पर उतरने का ऐलान भी कर दिया है। जबकि सपा-बसपा समेत कांग्रेस में भी इनके उजाड़ने की कार्रवाई का विरोध शुरू होने वाला है। भाजपा विरोधी नेताओं का तर्क है कि आखिर पीढ़ियों से बसे लोग कहां जाएंगे।
अधिग्रहण से महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट होगा मालामाल
मांझा-बरहटा क्षेत्र में अधिग्रहीत की जा रही करीब 70 प्रतिशत जमीन महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम है जो 80 के दशक में किसानों से क्रय की गई थी। तब ट्रस्ट इस भूमि पर कब्जा नहीं ले पाया था। जानकार बताते हैं कि जब इन सभी जमीनों को क्रय किया गया था, तब यह बाढ़ ग्रस्त एरिया था, यहां आबादी नहीं थी। समय बीतने के साथ यहां बंधा बनने के बाद आबादी बस गई।
जमीन पर महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट का कब्जा न होने के कारण स्थानीय लोगों के साथ जमीन क्रय करने वाले किसानों के परिवार के साथ कुछ अन्य लोग भी इन जमीनों पर काबिज हो गए। इसके अलावा कुछ अन्य परिवार कई पीढ़ियों से इन जमीनों पर घर व खेती करते चले आ रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अधिग्रहीत की जाने वाले 259 किसानों की भूमि में अकेले 174 अलग-अलग नंबरों के प्लाट महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के नाम है। सरकार अब वास्तविक भू-स्वामी को सर्किल रेट से दो गुना मुआवजा देने का ऐलान किया है।
सरकारी गजट के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे भूमि को 1.69 करोड़ प्रति हेक्टेयर, लिंक रोड से सटे भूमि को 1.24 करोड़ प्रति हेक्टेयर, खड़ंजा मार्ग से सटे भूमि को 1.21 करोड़ प्रति हेक्टेयर व कृषि भूमि को 75 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। ऐसे में तय है कि सरकारी मुआवजे से महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट मालामाल हो जाएगा। महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट के सदस्य सालिगराम मिश्र का कहना है सरकार बेशक ट्रस्ट की जमीन लें लेकिन उन्हें सर्किल रेट से चार गुना ज्यादा मुआवजा मिले।
वास्तविक भू-स्वामी को ही मिलेगा मुआवजा
259 किसानों की 85.997 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पर्यटन विभाग के पक्ष में किया जा रहा है। इन सभी को सर्किल रेट से दोगुना ज्यादा मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजा उन्हें ही मिलेगा जिनके नाम भूमि है। इसका पूरा विवरण नोटिफिकेशन में डीएम की ओर से जारी किया गया है। लोगों से 10 फरवरी तक आपत्ति मांगी गई है, इसके बाद भूमि अधिग्रहण करने की शुरुआत की जाएगी।
आरपी यादव, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी, अयोध्या