{"_id":"579e3c774f1c1b2c7d2b8c70","slug":"premises-acquired-through-staking-a-safety-risk","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधिग्रहीत परिसर के रास्ते पर जताया सुरक्षा का खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधिग्रहीत परिसर के रास्ते पर जताया सुरक्षा का खतरा
फैजाबाद
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:29 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया व पक्षकारों की टीम ने रविवार को विवादित परिसर स्थित खोदाई स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान दुराही कुआं के पास लाला टेलर के सामने खुलने वाले अधिग्रहीत परिसर के रास्ते से सुरक्षा का खतरा बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई।
टीम ने 1992 में विवादित ढांचे से निकले सामान के कमरे में ताले की फटी सील को बंद कराया। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के ए.ए. हाशमी, एनके सिंह, पर्यवेक्षक जज टीएम खान, एसके सिंह, विवादित परिसर के रिसीवर व कमिश्नर एसपी मिश्र, पक्षकारों में निर्मोही अखाड़े के वकील रणजीत लाल वर्मा, पुजारी रामदास, बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब, खालिक अहमद, बादशाह खान सुबह लगभग 11 बजे खोदाई स्थल पर पहुंचे।
अधिवक्ता रणजीत लाल वर्मा ने बताया कि वर्ष 1992 में ढांचा गिरने के दौरान निकले सामान को परिसर स्थित सीता कूप के पास एक कमरे में सुरक्षित रखा गया था। कमरे के ताले के ऊपर लगी सील का कपड़ा बंदरों नेे फाड़ दिया था। टीम ने ताले पर फिर से सील बंद करवाई।
विज्ञापन
निर्मोही अखाड़े के पक्षकार महंत भाष्कर दास के प्रतिनिधि पुजारी रामदास ने बताया कि परिसर के एसपी सुरक्षा से दुराही कुआं के पास लाला टेलर के सामने खुलने वाले रास्ते पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
कहा कि इस रास्ते से बिना जांच के सादे कपड़े में लोगों का आवागमन बना रहता है, जबकि इसी मार्ग से कुछ दूरी पर पांच जुलाई 2005 में अधिग्रहीत परिसर पर फिदायीन हमला किया जा चुका है।
विज्ञापन
टीम ने 1992 में विवादित ढांचे से निकले सामान के कमरे में ताले की फटी सील को बंद कराया। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के ए.ए. हाशमी, एनके सिंह, पर्यवेक्षक जज टीएम खान, एसके सिंह, विवादित परिसर के रिसीवर व कमिश्नर एसपी मिश्र, पक्षकारों में निर्मोही अखाड़े के वकील रणजीत लाल वर्मा, पुजारी रामदास, बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब, खालिक अहमद, बादशाह खान सुबह लगभग 11 बजे खोदाई स्थल पर पहुंचे।
विज्ञापन
अधिवक्ता रणजीत लाल वर्मा ने बताया कि वर्ष 1992 में ढांचा गिरने के दौरान निकले सामान को परिसर स्थित सीता कूप के पास एक कमरे में सुरक्षित रखा गया था। कमरे के ताले के ऊपर लगी सील का कपड़ा बंदरों नेे फाड़ दिया था। टीम ने ताले पर फिर से सील बंद करवाई।
विज्ञापन
निर्मोही अखाड़े के पक्षकार महंत भाष्कर दास के प्रतिनिधि पुजारी रामदास ने बताया कि परिसर के एसपी सुरक्षा से दुराही कुआं के पास लाला टेलर के सामने खुलने वाले रास्ते पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
कहा कि इस रास्ते से बिना जांच के सादे कपड़े में लोगों का आवागमन बना रहता है, जबकि इसी मार्ग से कुछ दूरी पर पांच जुलाई 2005 में अधिग्रहीत परिसर पर फिदायीन हमला किया जा चुका है।