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56 भोग से हुआ प्रभु श्रीराम का अभिनंदन

Sun, 07 Nov 2021 12:21 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Nov 2021 12:21 AM IST
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Prabhu Shri Ram was greeted with 56 bhog
अयोध्या। लंका विजय कर लौटे भगवान श्रीराम की याद में शुक्रवार को अन्नकूट महोत्सव मनाया गया। भगवान को सभी मठ-मंदिरों में 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इस दौरान भक्तों की भीड़ और जय-जयकार से रामनगरी का उत्साह चरम पर रहा। श्रीराम जन्मभूमि में विराजमान रामलला को छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
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मान्यता है कि 14 साल वनवास और लंका विजय के दौरान भगवान राजकीय सुख-सुविधा से सर्वथा दूर रहे, इसलिए अयोध्या आने पर उन्हें वैभव प्रदान करने में कोई कसर न छोड़ी जाय। इसी भाव के अनुरूप रामनगरी के हजारों मठ-मंदिरों में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया।
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उत्तरतोताद्रिमठ में अन्नकूट के अवसर पर ज.गु. स्वामी अनंताचार्य के संयोजन में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में ज.गु. वासुदेवाचार्य ने अन्नकूट की महिमा बयां की। यहां पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती, ज.गु. स्वामी सूर्यनारायणाचार्य, डॉ. सुनीता शास्त्री, महंत रामकुमार दास, राममंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, भाजपा महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र, केशव प्रपन्नाचार्य सहित अन्य मौजूद रहे।
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हरिधामगोपाल पीठ में ज.गु. रामदिनेशाचार्य ने आरती-पूजन किया। इस अवसर पर बीएसए संतोष देव पांडेय, पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। नूतन बरई मंदिर में महंत रामपत दास के संयोजन में विविध अनुष्ठानों के बीच भगवान को छप्पन भोग लगा तो भक्तों ने सांस्कृतिक आयोजन भी किया। यहां डीएम के स्टेनो राजेश चौरसिया, रघुनंदन चौरसिया, अनिल चौरसिया सहित आसपास के जिलों के हजारों लोग मौजूद रहे।
सरयू तट स्थित करतलिया बाबा आश्रम में विविध अनुष्ठान हुए। महंत रामदास ने अन्नकूट का भोग लगाकर पूजन-अर्चन किया। बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। बिड़ला धर्मशाला के प्रबंधक पवन सिंह के अनुसार यह परिदृश्य स्वाभाविक है, निश्चित रूप से भगवान के वनगमन के दौरान अयोध्या पूरे समय व्यथित रही होगी और भगवान जब पूरी कामयाबी से लौटे तो उनके स्वागत-सत्कार के बाद चैन की वंशी बजनी ही थी।

इसके अलावा कनक भवन, हनुमानगढ़ी, दशरथ महल, मणिरामदास जी की छावनी, लक्ष्मण किला, रामबल्लभाकुंज, बिड़ला धर्मशाला आदि स्थानों पर भगवान को इस परंपरा के अनुरूप भोग अर्पित करने के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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