फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   A rare alignment reminiscent of the Dwapara Yuga is forming on Janmashtami

Ayodhya News: जन्माष्टमी पर बन रहा द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग

Sun, 30 Aug 2026 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sun, 30 Aug 2026 11:17 PM IST
विज्ञापन
A rare alignment reminiscent of the Dwapara Yuga is forming on Janmashtami
अयोध्या। देशभर में इस बार चार सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। इस वर्ष जन्माष्टमी पर करीब 15 साल बाद ऐसा विशेष ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह वही संयोग है, जिसे पौराणिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण काल से जोड़ा जाता है।
विज्ञापन

ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्यानंदन वर्धन के अनुसार इस बार अष्टमी और रोहिणी के साथ हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के दौरान हुआ था। उस समय चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित था। इस बार जन्माष्टमी पर भी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है। यही कारण है कि इस वर्ष की जन्माष्टमी को विशेष माना जा रहा है। कौशल्यानंदन बताते हैं कि इस बार इन दोनों प्रमुख योगों के साथ हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। ऐसे शुभ योगों में पूजा-अर्चना, व्रत, धार्मिक अनुष्ठान और संकल्प करना विशेष फलदायी माना जाता है।
विज्ञापन


हर साल नहीं बनता अष्टमी-रोहिणी का संयोग

आचार्य प्रवीण शर्मा के मुताबिक जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि का होना सामान्य है, लेकिन हर वर्ष अष्टमी के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं बनता। इस बार दोनों का एक ही दिन मिलना पर्व के धार्मिक महत्व को बढ़ा रहा है। रामानंदी संप्रदाय में भगवान के जन्मोत्सव के लिए रोहिणी नक्षत्र को विशेष महत्व दिया जाता है। इस बार वैष्णव, रामानंदी समेत प्रमुख संप्रदायों में चार सितंबर को ही जन्माष्टमी मनाई जाएगी।आचार्य प्रवीण के अनुसार जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मध्यरात्रि में मनाने की परंपरा है। इस बार अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग होने के कारण मध्यरात्रि की पूजा को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed