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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   Possible to protect the religion of the Vedas

वेदों से ही धर्म की रक्षा संभव

Sun, 28 Jun 2015 10:44 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 28 Jun 2015 10:44 PM IST
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धर्म की रक्षा से ही समाज व राष्ट्र की रक्षा की जा सकती है। वेदों ने ही राष्ट्र की रक्षा की है, तभी हम सुरक्षित रह सकते हैं। व्याकरण साहित्य के साथ वेदों को भी महत्व दें, जो कि वेद ही हमारे प्राण हैं।
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वह रविवार को कारसेवकपुरम में महर्षि वशिष्ठ विद्यापीठ समिति के तत्वावधान में आयोजित पंचदश दिवसीय वेदांग प्रशिक्षण अभ्यासवर्ग के समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।
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उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को वेदों को घर-घर में स्थापित करने में अहम योगदान निभाने का आह्वान किया। समारोह के  मुख्य वक्ता के रूप में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंघल ने कहा कि वेदांग से वेद का स्वरूप समझा जा सकता है।
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वेद पूरे ब्रह्मांड का पूरा विज्ञान है। वेद धर्म और शिक्षा का विषय है। वेदों का उपयोग केवल जीविका व कर्मकांड के लिए नहीं होना चाहिए। कहा कि रामराज्य में घर-घर वेद की ध्वनि सुनाई देती थी।

लेकिन आज वेद और वेदांग का लोप हो रहा है। वेद हमारी लौकिक शिक्षा का अंग हो इसलिए इसे गांव-गांव तक पहुंचाने का हमारा लक्ष्य है। आज देश के अंदर विदेशी शिक्षा परोसी जा रही है।

कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने वेद को भगवान का स्वरूप बताया। कहा कि वेद ही इस देश की पहचान है। वेद जीवित है तो भारत का स्वरूप जीवित है। जैसे सैनिक देश की सेवा करते हैं वैसे वेद भगवान संस्कृति व स्वरूप की रक्षा करते हैं। वेद से बढ़कर कोई पद्धति नहीं है।


प्रशिक्षण में दिल्ली, उत्तराखंड, प्रयाग, कानपुर से अयोध्या में वेद के आचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम में महंत सिया किशोरी शरण, वैदेही बल्लभ शरण, प्रो. लक्ष्मेश्वर झा, आचार्य चंद्रभानु शर्मा, प्रो. दिवाकर, नारद भट्टराई, आचार्य सुनील शर्मा, महंत राम मंगल दास, राजीव लोचन, महंत बृजमोहन दास, कौशल्यानंद वद्र्धन सहित काफी संख्या में संत-महंत वेद के आचार्य शामिल रहे।
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