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मतदान अधिकारी बन वोट डलवाएंगे स्वीपर व वार्ड बॉय
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2015 10:07 PM IST
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पंचायत चुनाव में इस बार जिला अस्पताल के स्वीपर और वार्ड बॉय भी मतदान अधिकारी बनकर वोट डलवाएंगे। चलने को मोहताज नि:शक्त भी इस बार चुनाव ड्यूटी से नहीं बच पाए हैं।
पंचायत चुनाव में ड्यूटी की व्यवस्था इस बार कुछ ऐसी की गई है कि शनिवार को प्रशिक्षण के चलते जिला अस्पताल में नेत्र परीक्षण और फीजियोथेरेपी का काम ठप रहा। इससे मरीज परेशान रहे।
सॉफ्टवेयर से लगाई गई ड्यूटी में दो सौ से भी ज्यादा ऐसे कर्मचारी बताए गए हैं जो या तो निर्वाचन के कार्य में पहले से लगे हैं या फिर आवश्यक सेवाओं से जुड़े हैं।
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चुनाव में इस बार चतुर्थ श्रेणी में आने वाले जिला अस्पताल के स्वीपर और वार्ड बॉय मतदान अधिकारी बनकर वोट डलवाएंगे। जगन्नाथ, रामकृपाल, अजय पाठक, अनिल कुमार सहित ऐसे कई लोग इसमें शामिल हैं।
कई तो अंगूठाटेक बताए जाते हैं मगर फिर भी मतदान अधिकारी बना दिए गए हैं।
अस्पताल में नेत्र परीक्षण करने वाले रामकृष्ण पांडेय की मतदान ड्यूटी लगने के कारण शनिवार को कक्ष में ताला लगा रहा तो पीठासीन अधिकारी बने फीजियोथेरेपिस्ट बृजेंद्र का भी काम बंद रहा।
जिला अस्पताल के 44 कर्मचारियों की मतदान ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही श्रीराम और महिला अस्पताल के स्टाफ की भी ड्यूटी लगाने की खबर है।
एक महिला समेत पीएचसी, सीएचसी के कुछ डॉक्टरों को भी मतदान अधिकारी बनाया गया है। हनुमत संस्कृत महाविद्यालय अयोध्या के हृदयानंद उपाध्याय को चलने-फिरने में दिक्कत है। वह बीमार हैं लेकिन पीठासीन अधिकारी बनाए गए हैं।
परसावां विद्यालय के रामयज्ञ नि:शक्त हैं लेकिन प्रथम मतदान अधिकारी बनाए गए हैं। सतीश चंद्र मिश्र के पैर में प्लास्टर लगा है लेकिन प्रशिक्षण में आना उनकी मजबूरी है।
इसी तरह सूल्हेपुर में तैनात नि:शक्त शिक्षक मो. ताहिर प्रथम मतदान अधिकारी बनाए गए हैं। प्रेम चंद ओझा बैसाखी के सहारे चलते हैं मगर वह भी प्रशिक्षण में पहुंचे।
निर्वाचन ड्यूटी में लगाए गए अफसर भी पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारी की सूची में शामिल बताए गए हैं। विभिन्न स्थानों पर निर्वाचन का काम देख रहे लोग भी चुनाव ड्यूटी में लगाए गए है।
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पंचायत चुनाव में ड्यूटी की व्यवस्था इस बार कुछ ऐसी की गई है कि शनिवार को प्रशिक्षण के चलते जिला अस्पताल में नेत्र परीक्षण और फीजियोथेरेपी का काम ठप रहा। इससे मरीज परेशान रहे।
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सॉफ्टवेयर से लगाई गई ड्यूटी में दो सौ से भी ज्यादा ऐसे कर्मचारी बताए गए हैं जो या तो निर्वाचन के कार्य में पहले से लगे हैं या फिर आवश्यक सेवाओं से जुड़े हैं।
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चुनाव में इस बार चतुर्थ श्रेणी में आने वाले जिला अस्पताल के स्वीपर और वार्ड बॉय मतदान अधिकारी बनकर वोट डलवाएंगे। जगन्नाथ, रामकृपाल, अजय पाठक, अनिल कुमार सहित ऐसे कई लोग इसमें शामिल हैं।
कई तो अंगूठाटेक बताए जाते हैं मगर फिर भी मतदान अधिकारी बना दिए गए हैं।
अस्पताल में नेत्र परीक्षण करने वाले रामकृष्ण पांडेय की मतदान ड्यूटी लगने के कारण शनिवार को कक्ष में ताला लगा रहा तो पीठासीन अधिकारी बने फीजियोथेरेपिस्ट बृजेंद्र का भी काम बंद रहा।
जिला अस्पताल के 44 कर्मचारियों की मतदान ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही श्रीराम और महिला अस्पताल के स्टाफ की भी ड्यूटी लगाने की खबर है।
एक महिला समेत पीएचसी, सीएचसी के कुछ डॉक्टरों को भी मतदान अधिकारी बनाया गया है। हनुमत संस्कृत महाविद्यालय अयोध्या के हृदयानंद उपाध्याय को चलने-फिरने में दिक्कत है। वह बीमार हैं लेकिन पीठासीन अधिकारी बनाए गए हैं।
परसावां विद्यालय के रामयज्ञ नि:शक्त हैं लेकिन प्रथम मतदान अधिकारी बनाए गए हैं। सतीश चंद्र मिश्र के पैर में प्लास्टर लगा है लेकिन प्रशिक्षण में आना उनकी मजबूरी है।
इसी तरह सूल्हेपुर में तैनात नि:शक्त शिक्षक मो. ताहिर प्रथम मतदान अधिकारी बनाए गए हैं। प्रेम चंद ओझा बैसाखी के सहारे चलते हैं मगर वह भी प्रशिक्षण में पहुंचे।
निर्वाचन ड्यूटी में लगाए गए अफसर भी पीठासीन और प्रथम मतदान अधिकारी की सूची में शामिल बताए गए हैं। विभिन्न स्थानों पर निर्वाचन का काम देख रहे लोग भी चुनाव ड्यूटी में लगाए गए है।