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हनुमानगढ़ी में निशान पूजा कर ली गई भूमि पूजन की अनुमति
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों बुधवार को होने वाले भूमि पूजन को लेकर अयोध्या में उत्सव जैसा माहौल है। इससे पूर्व मंगलवार को हनुमानगढ़ी में हनुमान जी के निशान की पूजा-अर्चना कर भूमि पूजन की अनुमति ली गई। पहले यह निशान श्रीरामजन्मभूमि ले जाकर वहां पूजा करने का कार्यक्रम था लेकिन कोरोना के नियमों को देखते हुए इसमें परिवर्तन करते हुए हनुमानगढ़ी में इसकी विशेष पूजा-अर्चना की गयी।
निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव गौरीशंकर दास ने बताया कि सुबह नौ बजे हनुमान जी महाराज के निशान को बक्से से निकालकर गद्दी दलान में लाया गया जहां विधिविधान पूर्वक हनुमानगढ़ी के पुजारियों एवं वैदिक पंडितों ने हनुमानगढ़ी की परंपरा के अनुरूप इसका पूजन-अर्चन किया। इसके बाद निशान की आरती उतारी गई, साथ ही हनुमान जी महाराज की भी भव्य आरती की गई।
उन्होंने बताया कि अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में एक विशेष ‘हनुमान निशान’ है जो करीब सात सौ वर्ष पुराना है। यह चार मीटर चौड़ा और आठ मीटर लंबा ध्वज है। इसके साथ ही एक गदा और एक त्रिशूल भी है जिसे करीब 20 लोग हनुमानगढ़ी से रामजन्मभूमि स्थल पर ले जाते हैं। कोरोना संकट के कारण इसको टाला गया है।
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इसी कारण विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों के साथ हनुमानगढ़ी मंदिर में पुजारियों ने हनुमान निशान की विशेष पूजा की। इस मौके पर संतों और राम भक्तों का उत्साह चरम पर दिखा। कोई भगवा लहरा रहा था तो कोई हनुमान जी का वेश धारण कर आनंदमग्न था। विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र, अशोक तिवारी सहित स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती भी पूजन के दौरान मौजूद रहे।
पुजारी राजूदास बताते हैं कि अयोध्या में हनुमान जी महाराज राजा के रूप में विराजमान हैं। इसलिए शुभ कार्य से पहले हनुमान जी की अनुमति लेनी आवश्यक होती है। परंपरा के अनुसार, हर पूजा से पहले हनुमान निशान राम जन्मभूमि स्थल जाता है। कोई शुभ कार्य होता है तो हनुमान निशान की पूजा पहले की जाती है। वहां से ही निशान को ले जाया जाता है, ऐसा ही भूमि पूजन के लिए होना था।
भूमि पूजन के तीन दिवसीय अनुष्ठान के क्रम में दूसरे दिन रामजन्मभूमि में रामार्चा पूजन का आयोजन किया गया। रामार्चा पूजन और कथा का दायित्व रामनगरी के ही प्रतिष्ठित रामकुंज मंदिर के महंत रामानंददास संभाल रहे हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप भूमि पूजन का तीन दिवसीय अनुष्ठान सोमवार से ही शुरू हो गया है। इसकी पूर्णाहुति पांच अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी भूमिपूजन के साथ मंदिर की आधारशिला रख कर करेंगे। अनुष्ठान के शुभारंभ के मौके पर दिल्ली के आचार्य चंद्रभानु, अयोध्या के ही आचार्य इंद्रदेव एवं प्रयाग के आचार्य पंकज जैसे पारंगत वेदज्ञों के साथ 21 वैदिक आचार्यों ने पूजन किया।
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निर्वाणी अनी अखाड़ा के महासचिव गौरीशंकर दास ने बताया कि सुबह नौ बजे हनुमान जी महाराज के निशान को बक्से से निकालकर गद्दी दलान में लाया गया जहां विधिविधान पूर्वक हनुमानगढ़ी के पुजारियों एवं वैदिक पंडितों ने हनुमानगढ़ी की परंपरा के अनुरूप इसका पूजन-अर्चन किया। इसके बाद निशान की आरती उतारी गई, साथ ही हनुमान जी महाराज की भी भव्य आरती की गई।
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उन्होंने बताया कि अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर में एक विशेष ‘हनुमान निशान’ है जो करीब सात सौ वर्ष पुराना है। यह चार मीटर चौड़ा और आठ मीटर लंबा ध्वज है। इसके साथ ही एक गदा और एक त्रिशूल भी है जिसे करीब 20 लोग हनुमानगढ़ी से रामजन्मभूमि स्थल पर ले जाते हैं। कोरोना संकट के कारण इसको टाला गया है।
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इसी कारण विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों के साथ हनुमानगढ़ी मंदिर में पुजारियों ने हनुमान निशान की विशेष पूजा की। इस मौके पर संतों और राम भक्तों का उत्साह चरम पर दिखा। कोई भगवा लहरा रहा था तो कोई हनुमान जी का वेश धारण कर आनंदमग्न था। विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक दिनेश चंद्र, अशोक तिवारी सहित स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती भी पूजन के दौरान मौजूद रहे।
पुजारी राजूदास बताते हैं कि अयोध्या में हनुमान जी महाराज राजा के रूप में विराजमान हैं। इसलिए शुभ कार्य से पहले हनुमान जी की अनुमति लेनी आवश्यक होती है। परंपरा के अनुसार, हर पूजा से पहले हनुमान निशान राम जन्मभूमि स्थल जाता है। कोई शुभ कार्य होता है तो हनुमान निशान की पूजा पहले की जाती है। वहां से ही निशान को ले जाया जाता है, ऐसा ही भूमि पूजन के लिए होना था।
भूमि पूजन के तीन दिवसीय अनुष्ठान के क्रम में दूसरे दिन रामजन्मभूमि में रामार्चा पूजन का आयोजन किया गया। रामार्चा पूजन और कथा का दायित्व रामनगरी के ही प्रतिष्ठित रामकुंज मंदिर के महंत रामानंददास संभाल रहे हैं। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप भूमि पूजन का तीन दिवसीय अनुष्ठान सोमवार से ही शुरू हो गया है। इसकी पूर्णाहुति पांच अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी भूमिपूजन के साथ मंदिर की आधारशिला रख कर करेंगे। अनुष्ठान के शुभारंभ के मौके पर दिल्ली के आचार्य चंद्रभानु, अयोध्या के ही आचार्य इंद्रदेव एवं प्रयाग के आचार्य पंकज जैसे पारंगत वेदज्ञों के साथ 21 वैदिक आचार्यों ने पूजन किया।