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खुले धर्मस्थल, भक्तों से गुलजार हुई रामनगरी
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अयोध्या। लॉकडाउन के करीब डेढ़ माह बाद ज्येष्ठ के पहले मंगल से रामनगरी के धर्मस्थल मठ, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा एक बार फिर पूजा व इबादत के लिए खोल दिए गए हैं।
संक्रमण से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए धार्मिक स्थलों को खोला गया। इसी के साथ वीरानी में डूबी रामनगरी एक बार फिर से भक्तों से गुलजार हो गई।
एक बार में पांच भक्त व श्रद्धालु सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क की अनिवार्यता के साथ धार्मिक स्थलों में प्रवेश कर पाए। धार्मिक स्थलों पर प्रतिमा, मूर्ति, पवित्र ग्रंथ को स्पर्श करने की अनुमति नहीं रही।
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नए नियमों के तहत भक्त अपने आराध्य का दर्शन दूर से ही कर सके। डेढ़ माह बाद रामनगरी के मठ-मंदिरों के खुलने को लेकर भक्तों में उत्साह नजर आया।
अपने आराध्य का लंबे समय से दर्शन-पूजन न कर पाने वाले भक्त मंदिर खुलते ही दर्शन-पूजन को पहुंच गए। ज्येष्ठ मास का पहला मंगलवार होने के नाते सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में सुबह चार बजे जैसे ही मंगला आरती हुई।
दर्शन के लिए भक्त उमड़ पड़े। मंदिर के प्रवेश द्वार से लेकर सड़क तक भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। लॉकडाउन के चलते सन्नाटे के आगोश में डूबा हनुमानगढ़ी परिसर जयश्रीराम, जय हनुमान के जयकारों से गूंज उठा।
हालांकि नए नियमों के तहत एक बार में केवल पांच भक्तों को ही प्रवेश दिया गया। दूर से ही आराध्य के दर्शन हुए। प्रवेश व निकास मार्ग अलग-अलग बनाए गए थे।
लंबे समय बाद हनुमानगढ़ी का दर्शन करने पहुंचे साहित्यकार डॉ. हरिप्रसाद दुबे ने एक माह से रामनगरी के मठ-मंदिरों व घर-घर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों का नतीजा रहा कि अयोध्या ने बहुत जल्द ही कोरोना महामारी पर नियंत्रण पा लिया।
डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि ज्येष्ठ मास के पहले मंगलवार को हनुमान जी महाराज से राष्ट्र कल्याण की कामना की है। गोपाल जी दूबे बोले कि भगवान भोलेनाथ के अभिषेक व हनुमंतलला के दर्शन का नियम लॉकडाउन में टूट गया था।
मंदिर खुलने से मन प्रफुल्लित है। इसी तरह कनकभवन, छोटी देवकाली, बड़ी देवकाली, नागेश्वरनाथ, दशरथ महल बड़ास्थान सहित अन्य मंदिरों में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भक्तों ने दर्शन किए।
श्रीरामजन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला के दरबार में भी मंगलवार से रौनक लौटी। अस्थाई मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए भक्तों का आगमन शुरू हो गया। भक्तों के न आने से वीरान पड़े रामजन्मभूमि दर्शन मार्ग की भी रौनक लौट आई।
सुबह सात जैसे ही रामलला का दरबार खुला दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग गई। श्रीरामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ एक बार में केवल पांच भक्तों को ही दूर से ही दर्शन कराए गए।
पौराणिक पीठ नाका हनुमानगढ़ी में ज्येष्ठ मास के पहले मंगलवार को नए नियमों के तहत दर्शन-पूजन शुरू किया गया। पीठ के महंत रामदास द्वारा हनुमंतलला का भव्य शृंगार कर आरती उतारी गई। इसके साथ ही 11 दर्जन केले का भोग भी लगाया गया।
हवन-पूजन व सुंदरकांड के पाठ का भी आयोजन हुआ। महंत रामदास ने बताया कि गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति भक्तों को नहीं दी गयी थी, दूर से ही दर्शन दिया गया। मंदिर खोलने से पहले सुबह सबसे पहले पूरे मंदिर परिसर को सैनिटाइज किया गया।
रामनगरी में मंगलवार से सभी धर्मस्थल मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों को आम भक्तों के लिए खोल दिया गया है। गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड, गुरुद्वारा नजरबाग सहित शहर के अन्य गुरुद्वारों में नए नियमों के साथ अरदास, पूजन का सिलसिला मंगलवार से प्रारंभ हो गया है।
सोशल डिस्टेंसिंग के बीच भक्तों ने अरदास की। मस्जिदों में भी नए नियमों के साथ इबादत का सिलसिला शुरू हो गया है। मस्जिदों को खोलने से पहले सैनिटाइज किया गया। मास्क के साथ ही प्रवेश दिया गया, गाइडलाइन के अनुसार नमाज अदा की गई।
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संक्रमण से बचाव के लिए प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए धार्मिक स्थलों को खोला गया। इसी के साथ वीरानी में डूबी रामनगरी एक बार फिर से भक्तों से गुलजार हो गई।
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एक बार में पांच भक्त व श्रद्धालु सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क की अनिवार्यता के साथ धार्मिक स्थलों में प्रवेश कर पाए। धार्मिक स्थलों पर प्रतिमा, मूर्ति, पवित्र ग्रंथ को स्पर्श करने की अनुमति नहीं रही।
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नए नियमों के तहत भक्त अपने आराध्य का दर्शन दूर से ही कर सके। डेढ़ माह बाद रामनगरी के मठ-मंदिरों के खुलने को लेकर भक्तों में उत्साह नजर आया।
अपने आराध्य का लंबे समय से दर्शन-पूजन न कर पाने वाले भक्त मंदिर खुलते ही दर्शन-पूजन को पहुंच गए। ज्येष्ठ मास का पहला मंगलवार होने के नाते सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में सुबह चार बजे जैसे ही मंगला आरती हुई।
दर्शन के लिए भक्त उमड़ पड़े। मंदिर के प्रवेश द्वार से लेकर सड़क तक भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। लॉकडाउन के चलते सन्नाटे के आगोश में डूबा हनुमानगढ़ी परिसर जयश्रीराम, जय हनुमान के जयकारों से गूंज उठा।
हालांकि नए नियमों के तहत एक बार में केवल पांच भक्तों को ही प्रवेश दिया गया। दूर से ही आराध्य के दर्शन हुए। प्रवेश व निकास मार्ग अलग-अलग बनाए गए थे।
लंबे समय बाद हनुमानगढ़ी का दर्शन करने पहुंचे साहित्यकार डॉ. हरिप्रसाद दुबे ने एक माह से रामनगरी के मठ-मंदिरों व घर-घर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों का नतीजा रहा कि अयोध्या ने बहुत जल्द ही कोरोना महामारी पर नियंत्रण पा लिया।
डॉ. आनंद उपाध्याय ने कहा कि ज्येष्ठ मास के पहले मंगलवार को हनुमान जी महाराज से राष्ट्र कल्याण की कामना की है। गोपाल जी दूबे बोले कि भगवान भोलेनाथ के अभिषेक व हनुमंतलला के दर्शन का नियम लॉकडाउन में टूट गया था।
मंदिर खुलने से मन प्रफुल्लित है। इसी तरह कनकभवन, छोटी देवकाली, बड़ी देवकाली, नागेश्वरनाथ, दशरथ महल बड़ास्थान सहित अन्य मंदिरों में भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भक्तों ने दर्शन किए।
श्रीरामजन्मभूमि परिसर में विराजमान रामलला के दरबार में भी मंगलवार से रौनक लौटी। अस्थाई मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए भक्तों का आगमन शुरू हो गया। भक्तों के न आने से वीरान पड़े रामजन्मभूमि दर्शन मार्ग की भी रौनक लौट आई।
सुबह सात जैसे ही रामलला का दरबार खुला दर्शन के लिए भक्तों की लंबी लाइन लग गई। श्रीरामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ एक बार में केवल पांच भक्तों को ही दूर से ही दर्शन कराए गए।
पौराणिक पीठ नाका हनुमानगढ़ी में ज्येष्ठ मास के पहले मंगलवार को नए नियमों के तहत दर्शन-पूजन शुरू किया गया। पीठ के महंत रामदास द्वारा हनुमंतलला का भव्य शृंगार कर आरती उतारी गई। इसके साथ ही 11 दर्जन केले का भोग भी लगाया गया।
हवन-पूजन व सुंदरकांड के पाठ का भी आयोजन हुआ। महंत रामदास ने बताया कि गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति भक्तों को नहीं दी गयी थी, दूर से ही दर्शन दिया गया। मंदिर खोलने से पहले सुबह सबसे पहले पूरे मंदिर परिसर को सैनिटाइज किया गया।
रामनगरी में मंगलवार से सभी धर्मस्थल मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारों को आम भक्तों के लिए खोल दिया गया है। गुरुद्वारा ब्रह्मकुंड, गुरुद्वारा नजरबाग सहित शहर के अन्य गुरुद्वारों में नए नियमों के साथ अरदास, पूजन का सिलसिला मंगलवार से प्रारंभ हो गया है।
सोशल डिस्टेंसिंग के बीच भक्तों ने अरदास की। मस्जिदों में भी नए नियमों के साथ इबादत का सिलसिला शुरू हो गया है। मस्जिदों को खोलने से पहले सैनिटाइज किया गया। मास्क के साथ ही प्रवेश दिया गया, गाइडलाइन के अनुसार नमाज अदा की गई।