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परिक्रमा की राह नहीं आसान
फैजाबाद
Updated Sun, 16 Oct 2016 10:33 PM IST
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सड़क किनारे जमा कूड़े का ढेर।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रसिद्ध कार्तिक पूर्णिमा व परिक्रमा मेला आठ नवंबर से शुरू हो रहा है। मेले में देश भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु भक्तों का जमावड़ा होता है। महीने भर से परिक्रमा मेले में जुटने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही है, लेकिन अब तक परिक्रमा मार्ग पर व्याप्त बदहाली की सूरत नहीं बदल सकी है।
कार्तिक मेले का शुभारंभ चौदहकोसी परिक्रमा के साथ होता है। मेले के पहले पर्व पर लाखों की संख्या में परिक्रमार्थी श्रद्धालु चौदहकोसी परिक्रमा पथ पर उतरते हैं। मेले का दूसरा पर्व पंचकोसी परिक्रमा व कार्तिक पूर्णिमा स्नान के साथ मेला संपन्न होता है। लगभग सप्ताह भर तक चलने वाले मेले में श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है।
प्रशासनिक स्तर पर मेला तैयारियों को लेकर बैठकें कर व्यवस्था से जुड़े विभागों को कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए जा रहे हैं लेकिन तैयारियों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शासन स्तर पर परिक्रमा पथ पर परिक्रमार्थियों के लिए पारिजात व अन्य छायादार पौधे लगाए गए थे।
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इन पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड भी बनवाए गए लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि लाखों रुपये खर्च के बाद ट्री-गार्ड टूट गए हैं तो अधिकांश स्थानों पर पेड़ सूखे हैं तो कुछ को जानवर चर गए।
परिक्रमार्थियों के लिए मार्ग पर जगह-जगह मूत्रालय का भी निर्माण लाखों के खर्च पर कराया गया। इनके भी हालात ऐसे हैं कि मूत्रालय में लगी टाइल्स टूटी-फूटी
हैं, अंदर से बाहर तक कूड़ा-कचरा पटा हुआ है।
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कार्तिक मेले का शुभारंभ चौदहकोसी परिक्रमा के साथ होता है। मेले के पहले पर्व पर लाखों की संख्या में परिक्रमार्थी श्रद्धालु चौदहकोसी परिक्रमा पथ पर उतरते हैं। मेले का दूसरा पर्व पंचकोसी परिक्रमा व कार्तिक पूर्णिमा स्नान के साथ मेला संपन्न होता है। लगभग सप्ताह भर तक चलने वाले मेले में श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहता है।
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प्रशासनिक स्तर पर मेला तैयारियों को लेकर बैठकें कर व्यवस्था से जुड़े विभागों को कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए जा रहे हैं लेकिन तैयारियों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शासन स्तर पर परिक्रमा पथ पर परिक्रमार्थियों के लिए पारिजात व अन्य छायादार पौधे लगाए गए थे।
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इन पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड भी बनवाए गए लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि लाखों रुपये खर्च के बाद ट्री-गार्ड टूट गए हैं तो अधिकांश स्थानों पर पेड़ सूखे हैं तो कुछ को जानवर चर गए।
परिक्रमार्थियों के लिए मार्ग पर जगह-जगह मूत्रालय का भी निर्माण लाखों के खर्च पर कराया गया। इनके भी हालात ऐसे हैं कि मूत्रालय में लगी टाइल्स टूटी-फूटी
हैं, अंदर से बाहर तक कूड़ा-कचरा पटा हुआ है।