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नवाबी शहर की धरोहरों पर हो रहे कब्जे
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2015 10:30 PM IST
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जबकि ऐतिहासिक महत्व की इन संरक्षित इमारतों को सजा संवार कर पर्यटन की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती हैं। जिले में संरक्षित इमारतों का हाल यह है कि कहीं पर बसपा का कार्यालय आबाद हो चुका है तो कहीं पर सपा का कार्यालय चल रहा है।
पुरातत्व विभाग के अफसर नियम को तोड़ने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के पास कार्रवाई के लिए पत्र भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते है।
जिले में पुरातत्व विभाग से संरक्षित कुल सात इमारतें व स्थल है। जिसमें शुजाउद्दौला का मकबरा (गुलाबबाड़ी), बहू बेगम का मकबरा, बनी खानम का मकबरा, हाजी इकबाल का मकबरा, मणिपर्वत, सुग्रीव पर्वत और कुबेर पर्वत है।
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इनमें से ज्यादातर संरक्षित जगहों पर अवैध कब्जों की शिकायतें है। विभागीय नियमों के अनुसार किसी भी संरक्षित इमारत व स्थल से तीन सौ मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार की निर्माण कार्य पर पाबंदी है।
सौ मीटर का इलाका प्रतिषिद्ध क्षेत्र कहलाता है। जहां पर किसी भी कीमत पर कुछ भी नहीं हो सकता है। प्रतिषिद्ध क्षेत्र से दौ सौ मीटर की दूरी तक को विनियमित क्षेत्र कहते है।
यहां पर निर्माण कार्य हो सकता है। लेकिन इसके लिए पुरातत्व विभाग राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण नई दिल्ली से अनुमति प्राप्त करता है। अनुमति के बाद ही निर्माण कार्य हो सकता है।
लेकिन जिले में कई संरक्षित इमारतों के प्रतिषिद्ध एवं विनियमित क्षेत्र में बगैर अनुमति के ही आवास, नर्सिंग होम एवं शैक्षणिक संस्थान खुल गए है। अवध के नवाब शुजाउद्दौला के मकबरे के पास जो निर्माण कार्य इन दिनों चल रहा है, उसके बारे में चर्चा है कि यहां पर गेस्ट हाउस खोलने की तैयारी चल रही है।
बहू बेगम मकबरा के भीतर करीब चार माह से दो बिस्वे में रात के अंधेरे में धर्मस्थल का निर्माण किया जा रहा है। हाल यह है कि क्या मजाल कोई कैमरा चकमा दे। पहरेदारी इतनी तेज है कि कोई भी अजनबी जैसा यदि उधर गया तो उससे सख्त पूछताछ शुरू हो जाती है।
गेट के भीतर घुसते ही दाहिनी ओर चल रहे निर्माण कार्य जिला प्रशासन को नहीं दिख रहा है। पुरातत्व विभाग ने चार माह पहले जिला प्रशासन को बन रहे धार्मिक स्थल को रोकने व निर्माण कर्ताओं के खिलाफ विधिक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा। लेकिन इमारत के निर्माण की गति अब भी जारी है।
उपमंडल कार्यालय पुरातत्व विभाग के संरक्षण सहायक डीके जायसवाल कहते हैं कि बहू बेगम के मकबरा के भीतर धार्मिक स्थल बन रहा है।
शुजाउदैला के मकबरा के सौ मीटर के प्रतिषिद्ध क्षेत्र में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है। जिला प्रशासन को इन लोगों के खिलाफ विधिक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा है।
बसपा का कार्यालय काफी पहले से चल रहा है। जानकारी की गई तो पता चला कि जिला प्रशासन ने आवंटित कर दिया है। जबकि उसे यह अधिकार ही नहीं है।
हम भी संबंधित व्यक्ति को नोटिस नहीं जारी कर सकते हैं। बल्कि डीएम व एसएसपी के पास विधिक कार्यवाही के लिए पत्र लिखते हैं। वो कई बार लिखा जा चुका है।
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पुरातत्व विभाग के अफसर नियम को तोड़ने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन के पास कार्रवाई के लिए पत्र भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते है।
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जिले में पुरातत्व विभाग से संरक्षित कुल सात इमारतें व स्थल है। जिसमें शुजाउद्दौला का मकबरा (गुलाबबाड़ी), बहू बेगम का मकबरा, बनी खानम का मकबरा, हाजी इकबाल का मकबरा, मणिपर्वत, सुग्रीव पर्वत और कुबेर पर्वत है।
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इनमें से ज्यादातर संरक्षित जगहों पर अवैध कब्जों की शिकायतें है। विभागीय नियमों के अनुसार किसी भी संरक्षित इमारत व स्थल से तीन सौ मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार की निर्माण कार्य पर पाबंदी है।
सौ मीटर का इलाका प्रतिषिद्ध क्षेत्र कहलाता है। जहां पर किसी भी कीमत पर कुछ भी नहीं हो सकता है। प्रतिषिद्ध क्षेत्र से दौ सौ मीटर की दूरी तक को विनियमित क्षेत्र कहते है।
यहां पर निर्माण कार्य हो सकता है। लेकिन इसके लिए पुरातत्व विभाग राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण नई दिल्ली से अनुमति प्राप्त करता है। अनुमति के बाद ही निर्माण कार्य हो सकता है।
लेकिन जिले में कई संरक्षित इमारतों के प्रतिषिद्ध एवं विनियमित क्षेत्र में बगैर अनुमति के ही आवास, नर्सिंग होम एवं शैक्षणिक संस्थान खुल गए है। अवध के नवाब शुजाउद्दौला के मकबरे के पास जो निर्माण कार्य इन दिनों चल रहा है, उसके बारे में चर्चा है कि यहां पर गेस्ट हाउस खोलने की तैयारी चल रही है।
बहू बेगम मकबरा के भीतर करीब चार माह से दो बिस्वे में रात के अंधेरे में धर्मस्थल का निर्माण किया जा रहा है। हाल यह है कि क्या मजाल कोई कैमरा चकमा दे। पहरेदारी इतनी तेज है कि कोई भी अजनबी जैसा यदि उधर गया तो उससे सख्त पूछताछ शुरू हो जाती है।
गेट के भीतर घुसते ही दाहिनी ओर चल रहे निर्माण कार्य जिला प्रशासन को नहीं दिख रहा है। पुरातत्व विभाग ने चार माह पहले जिला प्रशासन को बन रहे धार्मिक स्थल को रोकने व निर्माण कर्ताओं के खिलाफ विधिक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा। लेकिन इमारत के निर्माण की गति अब भी जारी है।
उपमंडल कार्यालय पुरातत्व विभाग के संरक्षण सहायक डीके जायसवाल कहते हैं कि बहू बेगम के मकबरा के भीतर धार्मिक स्थल बन रहा है।
शुजाउदैला के मकबरा के सौ मीटर के प्रतिषिद्ध क्षेत्र में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा है। जिला प्रशासन को इन लोगों के खिलाफ विधिक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा है।
बसपा का कार्यालय काफी पहले से चल रहा है। जानकारी की गई तो पता चला कि जिला प्रशासन ने आवंटित कर दिया है। जबकि उसे यह अधिकार ही नहीं है।
हम भी संबंधित व्यक्ति को नोटिस नहीं जारी कर सकते हैं। बल्कि डीएम व एसएसपी के पास विधिक कार्यवाही के लिए पत्र लिखते हैं। वो कई बार लिखा जा चुका है।