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तीसरी लहर से पहले नौनिहालों का रक्षाकवच कमजोर होने की उम्मीद

Fri, 28 May 2021 11:16 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 May 2021 11:16 PM IST
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Navy's defense armor expected to weaken before third wave
अयोध्या। नौनिहालों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए जिले में भी विभिन्न प्रकार के टीके समयानुसार लगाए जाते हैं। इसके लिए नियमित रूप से बुधवार व शनिवार को टीकाकरण अभियान चलाया जाता है।
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बच्चों को तमाम प्रकार की बीमारियों से बचाने व उनमें प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए होने वाला सामान्य टीकाकरण अभियान परवान नहीं चढ़ सका और लक्ष्य के सापेक्ष महज 43 फीसदी बच्चों को ही टीके लग सके हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में सहजता से इस कार्य के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्थापना और आशा बहू, एएनएम की तैनाती की गई है। वहीं, समय-समय पर मिशन इंद्रधनुष के तहत भी अभियान चलाकर बच्चों को छूटे हुए टीकों की खुराक देकर उनका रक्षाकवच मजबूत किया जाता है।
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अमूमन सामान्य दिनों में इन टीकों की खुराक बच्चों के सुरक्षा तंत्र के लिए बेहद जरूरी है, लेकिन कोरोना जैसी महामारी में इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है। विशेषज्ञ कोरोना महामारी की तीसरी लहर आने का दावा कर रहे हैं।
जिसमें असर नौनिहालों पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बच्चों का सुरक्षा तंत्र मजबूत होना चाहिए, लेकिन इस अवधि में तमाम प्रकार के आवश्यक टीकों की खुराक बच्चों को नहीं मिल सकी है।
जिसकी वजह से उनका रक्षाकवच भगवान भरोसे है। सिर्फ अप्रैल माह की रिपोर्ट पर गौर करें तो विभाग की ओर से इसके लिए करीब 88074 टीके लगाने का लक्ष्य दिया गया था।
जिसके सापेक्ष महज 38584 टीके ही लगाए गए हैं। जो कि लक्ष्य का करीब 43 फीसदी है। टीकाकरण की सबसे खराब स्थिति पीसीवी, जेई, टीडी, रोटा आदि की है।
ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि तीसरी लहर प्रभावी हुई तो बच्चों के लिए कोरोना से जंग जीतना कितना मुश्किल हो सकता है।
बच्चों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण में भी लापरवाही की गई है। जिले में अप्रैल माह में 6626 गर्भवती महिलाओं को टीडी टीका लगाने के लिए लक्षित किया गया था, जिसके सापेक्ष महज 3540 को ही खुराक दी गई है, जो कि लक्ष्य का सिर्फ 53 प्रतिशत है।

बच्चों को लगने वाले टीकों पर एक नजर
जन्म के समय- बीसीजी, हेपेटाइटिस बी, पोलियो
जन्म से छह सप्ताह पर- पोलियो, रोटा वाइरस, आईपीवी, पेंटावैलेंट, पीसीवी
जन्म से 14 सप्ताह पर- पोलियो, रोटा वाइरस, आईपीवी, पेंटावैलेंट, पीसीवी
9 से 12 माह- मीजल्स-रुबेला, पीसीवी बूस्टर डोज,जेई (जापानी इंसिफेलाइटिस)
16 माह से दो वर्ष-पोलियो बूस्टर डोज, मीजल्स-रुबेला, डीपीटी बूस्टर, जेई
पांच से 10 वर्ष- डीपीटी बूस्टर
जन्म से 10 वर्ष- टिटनेस डिपथीरिया
कोविड बचाव कार्यों में आशा बहुओं व एएनएम की ड्यूटी लगाई गई है। इसकी वजह से सामान्य टीकाकरण थोड़ा प्रभावित हुआ है। लेकिन इसमें लक्ष्य के हिसाब से तेजी लाने के लिए निर्देशित किया गया है। इस माह का परिणाम बेहतर होने की उम्मीद है।- डॉ. घनश्याम सिंह, सीएमओ, अयोध्या
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