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मजहब के नाम पर वोट न दें मुसलमान : ओवैसी
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2016 11:41 PM IST
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सूबे की समाजवादी सरकार में मुसलमानों की हालत दलितों से भी गई गुजरी है। 18 फीसदी मुसलमान आबादी होने के बावजूद वे न केवल पिछड़े हैं बल्कि गरीबी के कारण सबसे ज्यादा बच्चे मुसलमानों के ही मरते हैं। सरकारी नौकरियों में तीन फीसदी भागीदारी भी मुसलमानों की नहीं है।
ओवैसी रविवार को सोहावल के आरडी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन से उन्होंने साफ कर दिया कि सूबे की चुनावी सियासत में उन्होंने जिस दलित-मुस्लिम समीकरण के कंधों पर सवार हो दाखिल हुए हैं उसे वे 2017 के विधानसभा चुनाव तक और धारदार बनाएंगे।
अपनी इस मंशा को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि दलित-मुस्लिम गठजोड़ ही डॉ. अंबेडकर की सोच को साकार कर सकता है। अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज अपनी बेहतरी के लिए उनके दल के झंडे तले सत्ता तक पहुंचे।
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उन्होंने समाजवादी सरकार व सपा मुखिया मुलायम सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर सहित प्रदेश में दंगों के दौरान मुस्लिम औरतों पर हुए जुल्म समाजवादी सरकार की कलई खोलने के लिए काफी हैं।
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ओवैसी रविवार को सोहावल के आरडी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन से उन्होंने साफ कर दिया कि सूबे की चुनावी सियासत में उन्होंने जिस दलित-मुस्लिम समीकरण के कंधों पर सवार हो दाखिल हुए हैं उसे वे 2017 के विधानसभा चुनाव तक और धारदार बनाएंगे।
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अपनी इस मंशा को विस्तार देते हुए उन्होंने कहा कि दलित-मुस्लिम गठजोड़ ही डॉ. अंबेडकर की सोच को साकार कर सकता है। अब समय आ गया है कि मुस्लिम समाज अपनी बेहतरी के लिए उनके दल के झंडे तले सत्ता तक पहुंचे।
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उन्होंने समाजवादी सरकार व सपा मुखिया मुलायम सिंह पर हमला बोलते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर सहित प्रदेश में दंगों के दौरान मुस्लिम औरतों पर हुए जुल्म समाजवादी सरकार की कलई खोलने के लिए काफी हैं।