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पारा दो डिग्री, गुरुवार अब तक का सबसे ठंडा दिन
फैजाबाद
Updated Thu, 12 Jan 2017 10:51 PM IST
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अयोध्या में गुरुवार को ठंड व गलन से परेशान होकर अलाव तापते लोग व मवेशी।
- फोटो : अमर उजाला
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चार डिग्री तक लुढ़का पारा कुछ ही घंटे में दो डिग्री रिकार्ड होने से लोग कांप उठे हैं। यह अब तक का सबसे सर्द दिन रहे वर्ष 2012 के रिकार्ड को छू चुका है, मगर मौसम वैज्ञानिकों की माने तो आधी रात से शुक्रवार भोर तक सारा रिकार्ड ध्वस्त हो सकता है।
पारा और लुढ़कने के आसार हैं। पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी व पछुआ हवा चलने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। ठंड और गलन बढ़ने से लोग दिन भर घरों में दुबके रहे। नौकरी पर बाहर निकले लोग कांपते रहे। दिनभर धूप के बावजूद गलन पैरों और हाथों में नश्तर की तरह चुभती रही। बच्चों व बुजुर्गों का सबसे बुरा हाल है। मगर शहर समेत देहात में अलाव के नाम पर कोरम पूरा हो रहा है।
गुरुवार को शाम होते ही गलन और बढ़ गयी। सबसे बुरा हाल बेजुबान पशुओं और बंदरों का रहा। कहीं अलाव जला मिला तो उसके आसपास जानवर मंडराते रहे। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक शुक्रवार को ठंड का पुराना टूट सकता है और पारा दो डिग्री से भी नीचे जा सकता है।
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वर्ष 2012 में न्यूनतम तापमान दो डिग्री था। हवा का रुख नहीं बदला तो गलन-ठंड में और इजाफा होगा। मैदानों में सभी के सामने ऐसी दिक्कत जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के पहाड़ों पर होती बर्फबारी से हो रही है। जूनियर तक के स्कूल प्रशासन ने बंद कर दिये हैं, लेकिन इससे ऊपर की कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए ठंड-गलन मुसीबत बनी रही।
वैसे धूप होने से फसलों के लिए मौसम अनुकूल माना जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश यादव ने बताया कि गेहूं की फसल को इससे जहां खासा फायदा होगा, वहीं आलू की फसल झुलसा तो सरसों की फसल माहू के प्रकोप से बचेगी। ऐसे मौसम से गेहूं, आलू व सरसों आदि सभी फसलों को फायदा होगा।
मौसम विज्ञान विभाग कुमारगंज के वैज्ञानिक का कहना है कि ठंड व गलन का असर लोगों को कुछ ज्यादा ही महसूस हुआ। दिन में धूप होने के बाद भी पहाड़ों की बर्फबारी पछुआ हवा के साथ मैदानों में पहुंची तो गलन और महसूस हुई। कहा कि पछुआ हवा तो आग में घी डालने जैसा काम कर रही है। अगले दो दिनों तक ठंड गलन बढने व तापमान के और गिरने की संभावना है।
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पारा और लुढ़कने के आसार हैं। पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी व पछुआ हवा चलने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। ठंड और गलन बढ़ने से लोग दिन भर घरों में दुबके रहे। नौकरी पर बाहर निकले लोग कांपते रहे। दिनभर धूप के बावजूद गलन पैरों और हाथों में नश्तर की तरह चुभती रही। बच्चों व बुजुर्गों का सबसे बुरा हाल है। मगर शहर समेत देहात में अलाव के नाम पर कोरम पूरा हो रहा है।
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गुरुवार को शाम होते ही गलन और बढ़ गयी। सबसे बुरा हाल बेजुबान पशुओं और बंदरों का रहा। कहीं अलाव जला मिला तो उसके आसपास जानवर मंडराते रहे। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक शुक्रवार को ठंड का पुराना टूट सकता है और पारा दो डिग्री से भी नीचे जा सकता है।
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वर्ष 2012 में न्यूनतम तापमान दो डिग्री था। हवा का रुख नहीं बदला तो गलन-ठंड में और इजाफा होगा। मैदानों में सभी के सामने ऐसी दिक्कत जम्मू-कश्मीर और हिमाचल के पहाड़ों पर होती बर्फबारी से हो रही है। जूनियर तक के स्कूल प्रशासन ने बंद कर दिये हैं, लेकिन इससे ऊपर की कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए ठंड-गलन मुसीबत बनी रही।
वैसे धूप होने से फसलों के लिए मौसम अनुकूल माना जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश यादव ने बताया कि गेहूं की फसल को इससे जहां खासा फायदा होगा, वहीं आलू की फसल झुलसा तो सरसों की फसल माहू के प्रकोप से बचेगी। ऐसे मौसम से गेहूं, आलू व सरसों आदि सभी फसलों को फायदा होगा।
मौसम विज्ञान विभाग कुमारगंज के वैज्ञानिक का कहना है कि ठंड व गलन का असर लोगों को कुछ ज्यादा ही महसूस हुआ। दिन में धूप होने के बाद भी पहाड़ों की बर्फबारी पछुआ हवा के साथ मैदानों में पहुंची तो गलन और महसूस हुई। कहा कि पछुआ हवा तो आग में घी डालने जैसा काम कर रही है। अगले दो दिनों तक ठंड गलन बढने व तापमान के और गिरने की संभावना है।