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अचानक लुढ़का पारा, कांपे लाखों श्रद्धालु
फैजाबाद
Updated Sun, 29 Jan 2017 10:15 PM IST
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अयोध्या में रविवार की भोर राम की पैड़ी पर ऐसी दिखी श्रद्धालुओं की चहल-पहल।
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी व पछुवा हवा से रविवार को अचानक मौसम बर्फीला हो गया। आसमान से टपक रही बर्फीली बूंदों से धर्मनगरी में प्रयाग नहाकर आए लाखों श्रद्धालु कांपते रहे। स्नान घाट, सड़क व चौराहों से मठ-मंदिरों की चौखट तक ठंड से निपटने के लिए अलाव तक के इंतजाम नहीं थे। जुड़वा शहर के रेलवे स्टेशन व रोडवेज समेत निजी बस अड्डों पर माघ मेला प्रयाग से लौट रहे लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा ठंड से बेहाल रहा।
रविवार को दिन चढ़ने के साथ पछुवा हवा के साथ मौसम ने करवट बदली तो देखते ही देखते सूरज बादलों की ओट में छिप गया। बर्फीली हवा से वातावरण कड़कड़ाती ठंड में बदला तो श्रद्धालुओं से आम नागरिक तक कंपकंपाने लगे।
अचानक लुढ़के पारे से बढ़ी ठंड से हर आम ओ खास गर्म कपड़ों की ओट में शरीर को छुपाते मिले लेकिन नगर पालिका व प्रशासनिक स्तर पर धर्मनगरी में ठंड से बचाव के इंतजाम नदारद रहे। स्नान घाट से सड़कों व चौक-चौराहों से मठ-मंदिरों की दहलीज तक अलाव नहीं जलवाए गए, जिससे ठंड से कांपते लोग हाथ मल कर शरीर को गरम करते रहे।
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ठंडक का आलम यह रहा कि नयाघाट से टेढ़ीबाजार तक मार्ग पर स्थानीय स्तर पर लोग अलाव जलाकर बैठे तो जानवर भी ठंड से बचाव के लिए आसपास जमा रहे। धार्मिक यात्रा पर झारखंड के दुमका जिले से अपनी मां बागदेई के साथ आए जयकरन बताते हैं कि संगम स्नान कर अयोध्या आए हैं।
संगम की रेती पर ठंड से बचाव को जगह-जगह अलाव तो मिले लेकिन अयोध्या में नहीं दिखे। देवरिया जिले से आए चंद्र प्रताप मिश्र भी कड़ाके की ठंड में प्रशासनिक व्यवस्था को कोसते नजर आए। कहते हैं कि अयोध्या में अन्य मेलों की तरह माघ मेला भी एक बड़ा मेला है, जिसमें देश भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं लेकिन व्यवस्था कुछ नहीं है।
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रविवार को दिन चढ़ने के साथ पछुवा हवा के साथ मौसम ने करवट बदली तो देखते ही देखते सूरज बादलों की ओट में छिप गया। बर्फीली हवा से वातावरण कड़कड़ाती ठंड में बदला तो श्रद्धालुओं से आम नागरिक तक कंपकंपाने लगे।
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अचानक लुढ़के पारे से बढ़ी ठंड से हर आम ओ खास गर्म कपड़ों की ओट में शरीर को छुपाते मिले लेकिन नगर पालिका व प्रशासनिक स्तर पर धर्मनगरी में ठंड से बचाव के इंतजाम नदारद रहे। स्नान घाट से सड़कों व चौक-चौराहों से मठ-मंदिरों की दहलीज तक अलाव नहीं जलवाए गए, जिससे ठंड से कांपते लोग हाथ मल कर शरीर को गरम करते रहे।
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ठंडक का आलम यह रहा कि नयाघाट से टेढ़ीबाजार तक मार्ग पर स्थानीय स्तर पर लोग अलाव जलाकर बैठे तो जानवर भी ठंड से बचाव के लिए आसपास जमा रहे। धार्मिक यात्रा पर झारखंड के दुमका जिले से अपनी मां बागदेई के साथ आए जयकरन बताते हैं कि संगम स्नान कर अयोध्या आए हैं।
संगम की रेती पर ठंड से बचाव को जगह-जगह अलाव तो मिले लेकिन अयोध्या में नहीं दिखे। देवरिया जिले से आए चंद्र प्रताप मिश्र भी कड़ाके की ठंड में प्रशासनिक व्यवस्था को कोसते नजर आए। कहते हैं कि अयोध्या में अन्य मेलों की तरह माघ मेला भी एक बड़ा मेला है, जिसमें देश भर से लाखों श्रद्धालु आते हैं लेकिन व्यवस्था कुछ नहीं है।