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अभिव्यक्ति की आजादी सबको मगर मर्यादा में ः राज्यपाल
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2016 11:22 PM IST
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अभिव्यक्ति की आजादी सबको लेकिन मर्यादा में होनी चाहिए। संविधान के तहत दायित्वों का निर्वहन हर भारतीय की जिम्मेदारी है। जेएनयू में देशद्रोही नारेबाजी का मामला न्यायालय में है। अब संसद भी शुरू है, जाहिर है मामला संसद पटल पर आएगा। ऐसे में गुण-दोष का फैसला न्यायालय व संसद करेगी। यह बात राज्यपाल रामनाईक ने मंगलवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में कही।
राज्यपाल ने इसके पहले समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सूबे के सभी 25 विश्वविद्यालय में सबसे अच्छा कौन? इसकी ग्रेडिंग के लिए सर्वे करा रहे हैं। सर्वे के लिए विद्वानों की एक उच्चस्तरीय कमेटी बना दी गई है। सामान्य विवि समेत मेडिकल-इंजीनियरिंग की कॉमन बातों को निकालकर इसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय आदि की क्रमवार ग्रेडिंग तय होगी, ताकि शिक्षक, छात्र व अभिभावक जान सकें कि कौन सा विवि सर्वोत्तम है और क्यों है।
उन्होंने विवि प्रशासन समेत शिक्षकों-छात्रों का आह्वान किया आप सभी में सर्वोत्तम बनने की क्षमता है, इसे साबित करें। उन्होंने कहा कि अवध विवि में 2 लाख 75 हजार छात्र-छात्राओं में 89 को स्वर्णपदक मिला है। मैंने बैठकर आंकड़े तैयार किए तो चौंकाने वाली बात सामने आई कि स्वर्ण पदक पाने वालों में 53 लड़कियां हैं, जो 60 फीसदी है। अवध विवि का यह दृश्य महिला सशक्तीकरण का परिचायक है।
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यह लड़कों के लिए चिंता की बात होनी चाहिए कि 33 फीसदी आरक्षण मांग रही लड़कियां 60 फीसदी परफारमेंस देती हैं। राज्यपाल ने जब यह कहा कि ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब लड़कों को आरक्षण की मांग करनी पड़ेगी, तो हाल ठहाकों से गूंज उठा। नाईक ने कहा कि महिलाओं के आगे बढ़ने व शिक्षित होने से परिवार-समाज ही नहीं, बल्कि देश आगे बढ़ता है। कहा कि अब डिग्री लेकर छात्रों का महत्वपूर्ण पड़ाव शुरू होगा।
अब खुले आकाश में उड़ो, देश-समाज, गुरुजन से लेकर परिवार की उम्मीदों पर खरे उतरना है। ऐसे में समारोह में लिए गए अपने संकल्पों को याद रखोगे तो जीवन के आखिरी दिन तक आनंद में रहोगे। राज्यपाल ने कहा कि जब मैंने यूपी की कमान संभाली थी तब कई-कई साल से विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह बेपटरी थे।
सबसे पहले इसे हर साल समय से आयोजन को लेकर सख्ती की, इसका नतीजा है कि प्रदेश के 25 विश्वविद्यालयों में इस साल का यह 18 वां दीक्षांत समारोह है। चार विवि की तिथियां तय हो चुकी हैं। बाकी तीन विवि अभी नए हैं, जहां अभी छात्र डिग्री प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं।
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राज्यपाल ने इसके पहले समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सूबे के सभी 25 विश्वविद्यालय में सबसे अच्छा कौन? इसकी ग्रेडिंग के लिए सर्वे करा रहे हैं। सर्वे के लिए विद्वानों की एक उच्चस्तरीय कमेटी बना दी गई है। सामान्य विवि समेत मेडिकल-इंजीनियरिंग की कॉमन बातों को निकालकर इसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय आदि की क्रमवार ग्रेडिंग तय होगी, ताकि शिक्षक, छात्र व अभिभावक जान सकें कि कौन सा विवि सर्वोत्तम है और क्यों है।
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उन्होंने विवि प्रशासन समेत शिक्षकों-छात्रों का आह्वान किया आप सभी में सर्वोत्तम बनने की क्षमता है, इसे साबित करें। उन्होंने कहा कि अवध विवि में 2 लाख 75 हजार छात्र-छात्राओं में 89 को स्वर्णपदक मिला है। मैंने बैठकर आंकड़े तैयार किए तो चौंकाने वाली बात सामने आई कि स्वर्ण पदक पाने वालों में 53 लड़कियां हैं, जो 60 फीसदी है। अवध विवि का यह दृश्य महिला सशक्तीकरण का परिचायक है।
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यह लड़कों के लिए चिंता की बात होनी चाहिए कि 33 फीसदी आरक्षण मांग रही लड़कियां 60 फीसदी परफारमेंस देती हैं। राज्यपाल ने जब यह कहा कि ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब लड़कों को आरक्षण की मांग करनी पड़ेगी, तो हाल ठहाकों से गूंज उठा। नाईक ने कहा कि महिलाओं के आगे बढ़ने व शिक्षित होने से परिवार-समाज ही नहीं, बल्कि देश आगे बढ़ता है। कहा कि अब डिग्री लेकर छात्रों का महत्वपूर्ण पड़ाव शुरू होगा।
अब खुले आकाश में उड़ो, देश-समाज, गुरुजन से लेकर परिवार की उम्मीदों पर खरे उतरना है। ऐसे में समारोह में लिए गए अपने संकल्पों को याद रखोगे तो जीवन के आखिरी दिन तक आनंद में रहोगे। राज्यपाल ने कहा कि जब मैंने यूपी की कमान संभाली थी तब कई-कई साल से विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह बेपटरी थे।
सबसे पहले इसे हर साल समय से आयोजन को लेकर सख्ती की, इसका नतीजा है कि प्रदेश के 25 विश्वविद्यालयों में इस साल का यह 18 वां दीक्षांत समारोह है। चार विवि की तिथियां तय हो चुकी हैं। बाकी तीन विवि अभी नए हैं, जहां अभी छात्र डिग्री प्राप्त करने की प्रक्रिया में हैं।