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रोशन हुए घर, आतिशबाजी से गूंजा आसमान
फैजाबाद/अमरउजाला ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2015 06:08 PM IST
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पटाखों से कोई हानि न पहुंचे, इसे लेकर बड़े भी साथ रहकर उनका हौसला बढ़ाते रहे। पर्व को लेकर जमकर देर रात तक खरीदारी भी होती रही। मिठाई, मिट्टी के लक्ष्मी-गणेश-खिलौने और पटाखे, मोमबत्तियों का करीब दस करोड़ का कारोबार बताया जा रहा है।
दीप पर्व पर बिक्री के लिए रिकाबगंज से चौक तक दुकानों के सजे होने से नजारा बदला-बदला रहा। छोटे बच्चे अभिभावकों के साथ नरेन्द्रालय और गुलाबबाड़ी में सजी पटाखों की दुकानों पर पहुंचते और जमकर सामान खरीदते रहे। यहां महंगाई का अहसास केवल माता-पिता को हुआ।
बच्चों का तुनकना देखकर बीते साल की तुलना में चार गुना दाम बढ़ जाने के बाद भी पटाखा खरीदने को विवश रहे। मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम जब लंका विजय कर 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे तो उनके स्वागत में अयोध्या रोशनी से नहा उठी थी। अयोध्यावासियों ने जगह-जगह बंदनवार सजाये और घर-घर में दीप जलाये थे।
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उसी परंपरा का निर्वाह धनतेरस से शुरू है और अगले दो दिनों तक चलेगा। अन्य पर्वो की तरह दीपावली पर कर्मकांड और बाह्य चकाचौंध का प्रभाव बढ़ गया है। घी के दीये जलते हैं तो प्रकृति और शुद्ध तथा निर्मल हो जाती है, लेकिन आतिशबाजी के शौकीन पर्यावरण में प्रदूषण का जहर घोल रहे हैं।
चोरी छिपे कई दुकानों पर मिल रहे थे पटाखे
फैजाबाद। सबसे ज्यादा डिमांड चोरी-छिपे बिक रहे तेज आवाज वाले बमों की है। दिखावे को तो इन पटाकों की बिक्री नरेन्द्रालय और गुलाबबाड़ी में हो रही है, लेकिन दुकानदार इन पटाखों की बिक्री चोरी-छिपे कर रहे हैं। एक बार आग लगाने पर रंग-बिरंगी रोशनी के साथ आकाश में दो दर्जन बार आवाज। अंतिम दौर में पटाके सस्ते हो गये थे, 500 रुपये प्रिंट के सामान दुकानदार डेढ़ सौ रुपए में दे रहे थे। इसमें मल्टी कलर की फुलझड़ी, अनार व चर्खी सब शामिल रहे।
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दीप पर्व पर बिक्री के लिए रिकाबगंज से चौक तक दुकानों के सजे होने से नजारा बदला-बदला रहा। छोटे बच्चे अभिभावकों के साथ नरेन्द्रालय और गुलाबबाड़ी में सजी पटाखों की दुकानों पर पहुंचते और जमकर सामान खरीदते रहे। यहां महंगाई का अहसास केवल माता-पिता को हुआ।
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बच्चों का तुनकना देखकर बीते साल की तुलना में चार गुना दाम बढ़ जाने के बाद भी पटाखा खरीदने को विवश रहे। मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम जब लंका विजय कर 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे तो उनके स्वागत में अयोध्या रोशनी से नहा उठी थी। अयोध्यावासियों ने जगह-जगह बंदनवार सजाये और घर-घर में दीप जलाये थे।
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उसी परंपरा का निर्वाह धनतेरस से शुरू है और अगले दो दिनों तक चलेगा। अन्य पर्वो की तरह दीपावली पर कर्मकांड और बाह्य चकाचौंध का प्रभाव बढ़ गया है। घी के दीये जलते हैं तो प्रकृति और शुद्ध तथा निर्मल हो जाती है, लेकिन आतिशबाजी के शौकीन पर्यावरण में प्रदूषण का जहर घोल रहे हैं।
चोरी छिपे कई दुकानों पर मिल रहे थे पटाखे
फैजाबाद। सबसे ज्यादा डिमांड चोरी-छिपे बिक रहे तेज आवाज वाले बमों की है। दिखावे को तो इन पटाकों की बिक्री नरेन्द्रालय और गुलाबबाड़ी में हो रही है, लेकिन दुकानदार इन पटाखों की बिक्री चोरी-छिपे कर रहे हैं। एक बार आग लगाने पर रंग-बिरंगी रोशनी के साथ आकाश में दो दर्जन बार आवाज। अंतिम दौर में पटाके सस्ते हो गये थे, 500 रुपये प्रिंट के सामान दुकानदार डेढ़ सौ रुपए में दे रहे थे। इसमें मल्टी कलर की फुलझड़ी, अनार व चर्खी सब शामिल रहे।