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अब खसरे से तय होगी किसानों की ऋण सीमा

Tue, 09 Jul 2019 11:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2019 11:06 PM IST
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kisan help
अयोध्या। किसानों को बैंकों से मिलने वाले लोन का आधार अब सिर्फ खतौनी की जोत ही नहीं इससे जुड़े खसरे पर दर्ज की गई फसली जींस को भी बनाया जाएगा।
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नई कृषि एवं ऋण नीति के तहत किसानों की ऋण सीमा तय करने के लिए उनके खेतों में बोई जाने वाली फसलों का छमाही जींस वार का आंकलन कराना होगा जिसके लिए शासन से निर्धारित राशि की सीमा के तहत किसानों को ऋण दिया जाना बैंक तय करेंगे।
किसानों के लिए अब तक खतौनी महत्वपूर्ण होती थी इस पर दर्ज भूमि के रकबे के हिसाब से बैंक किसानों को ऋण देते थे। लेकिन अब जोत के साथ-साथ किसान के खसरे में क्षेत्रीय लेखपालों द्वारा हर छमाही दर्ज की जाने वाली फसलों की जींस वार को भी बैंक ध्यान में रखेंगे।
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हर फसल के लिए शासन से निर्धारित अधिकतम राशि के अंदर ही किसानों को लोन स्वीकृत किया जाएगा। शासन ने बैंकों को नई रणनीति के तहत महत्वपूर्ण फसलों के लिए प्रति हेक्टेयर अधिकतम सीमा की धनराशि तय कर दी है।
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घर बैठे मनमाने तरीके से किसानों की फसली तैयार करने वाले लेखपालों की लापरवाही अब किसानों को भारी पड़ सकती है इसलिए किसानों को भी चौकन्ना रहना होगा और हर खेत में बुवाई किए जाने वाली फसलों को हर छमाही मूल रूप से दर्ज कराना होगा अन्यथा दैवीय आपदा के समय जोत के हिसाब से बोई गई फसल की सही क्षतिपूर्ति भी किसानों को नहीं मिल सकेगी न ही किसान की ऋण सीमा बैंक सही तय करवा पाएंगे।

नई कृषि एवं ऋण नीति की बाबत पूछे जाने पर सहकारी बैंक के प्रबंधक एसके श्रीवास्तव ने बताया शासन ने नई कृषि एवम् ऋण नीति के तहत प्रमुख फसलों की निर्धारित ऋण सीमा बैंकों को उपलब्ध करा दी गई है। इसे आधार बनाकर बैंक अब किसानों की बोई गई फसली को सामने रखकर ऋण सीमा निर्धारित करेंगे।
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