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राम जन्मभूमि में चांदी की चौकी पर स्थापित होगा कलश
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अयोध्या-रामलला को भेंट की गई चांदी की चौकी व चरण पादुका।
- फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद अयोध्या में पहली बार श्रीराम जन्मोत्सव के पर्व पर त्रेतायुग को जीवंत करने की तैयारी जोरों पर चल रही हैं। इस बार राम जन्मोत्सव की भव्यता देखते ही बनेगी।
पहली राम जन्मोत्सव पर गर्भगृह को फूलों से सजाया जाएगा तो विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगेगा। रामलला व तीनों भाई सोने का मुकुट धारण करेंगे। इसी क्रम में पांच सौ साल बाद नवरात्र की पूजा भी रामलला के दरबार में भव्यता पूर्वक होगी।
इस बार रामलला के सम्मुख लकड़ी की नहीं चांदी की चौकी पर नवरात्र का कलश स्थापित कर नौ दिनों तक पूजा-अर्चना की जाएगी। छह दिसंबर 1992 की घटना के बाद टेंट में विराजमान हुए रामलला की पूजा-अर्चना, पर्व व त्योहार तमाम बंदिशों के चलते परंपरा निर्वहन तक ही सीमित रहते थे।
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अब परिस्थिति बदली है न सिर्फ भव्य राममंदिर का निर्माण हो रहा है बल्कि रामलला भी टेंट से निकलकर सुविधाओं से युक्त अस्थाई मंदिर में विराजमान हैं।
यहां विराजते ही रामलला के ठाठ-बाट में निरंतर वृद्धि हो रही है। हर पर्व व उत्सव की भव्यता देखतेे ही बनती है। नवरात्र में रामलला के सम्मुख कलश स्थापना की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
पहले लकड़ी की चौकी पर नवरात्र में कलश स्थापित किया जाता था, लेकिन इस वर्ष पहली बार नवरात्र में चांदी की चौकी पर नवरात्र का कलश स्थापित किया जाएगा।
प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि मध्यप्रदेश से आए भक्तों बाबूलाल महाजन, मुकेश महाजन, राजेश महाजन आदि द्वारा साढ़े किलो की चांदी का चरणपादुका एवं रामजी के आभूषण व चांदी की चौकी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई है।
इसी चांदी की चौकी को नवरात्र में रामलला के सम्मुख स्थापित कर नौ दिनों तक पूजा-अर्चना की जाएगी। राममंदिर निर्माण में वैदिक वास्तुु शास्त्र का भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए देश के जाने-माने वास्तुविदों की एक कमेटी भी बनाई है।
वास्तु के अनुसार ही रामलला के गर्भगृह की सुरक्षा के लिए 10 दिग्पाल की स्थापना की जाएगी। गर्भगृह में सभी 10 दिशाओं के अलग-अलग रक्षक देवताओं की शिला स्थापित की जाएगी।
ये शिलाएं राजस्थान में तैयार की जा रही हैं। वास्तु शास्त्र में मान्यता है कि जहां पर दिग्पाल रहते हैं वह भूमि, मंदिर व भवन दीर्घकाल तक सुरक्षित बना रहता है।
राम मंदिर के गर्भगृह में सभी 10 दिशाओं के अलग-अलग रक्षक देवताओं का भी वास होगा। विधिवित पूजन अर्चना के साथ देवताओं के आयुध (अस्त्र) से युक्त शिलाएं गर्भगृह में प्रतिष्ठित की जाएंगी।
वास्तु शास्त्र के दृष्टिकोण से ये सभी शिलाएं मंदिर को दीर्घकालिक बनाने में सहायक होंगी। इन दिनों राजस्थान में शिलाएं तैयार की जा रही हैं। कुल 10 शिलाएं गढ़ी जा रही हैं।
इन सभी शिलाओं पर दिशाओं के अनुरूप रक्षक देवता के अस्त्र उत्कीर्ण किए जा रहे हैं। इन्हें मई माह में गर्भगृह में स्थापित करने की योजना है। आचार्य प्रवीण बताते हैं कि प्रमुख रूप से चार दिशाएं पूरब, उत्तर, पश्चिम व दक्षिण हैं।
चार विदिशाएं ईशान, अग्नि, नैऋत्य व वायव्य हैं। इसके अलावा ऊर्ध्व व अधो दिशाएं भी शास्त्रों में मानी गई हैं। इन दिशाओं के देवता ही दिग्पाल के नाम से जाने जाते हैं, जो निर्धारित दिशाओं से संसार की रक्षा करते हैं।
वह बताते हैं कि जहां पर इन देवताओं को पूजित कर स्थापित किया जाता है वह भूमि, मंदिर व भवन दीर्घकाल तक सुरक्षित बना रहता है।
इस बार श्रीराम जन्मोत्सव की भव्यता देखते ही बनेगी। त्रेतायुग जीवंत होता दिखेगा। रामजन्मोत्सव का लाइव प्रसारण होगा। रामलला को 56 भोग लगेगा। नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे। रामलला, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न को सोने का मुकुट पहनाया जाएगा। पहली वार नवरात्र पर चांदी की चौकी पर कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार का रामजन्मोत्सव पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।- डॉ.अनिल मिश्र, ट्रस्टी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
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पहली राम जन्मोत्सव पर गर्भगृह को फूलों से सजाया जाएगा तो विभिन्न प्रकार के पकवानों का भोग लगेगा। रामलला व तीनों भाई सोने का मुकुट धारण करेंगे। इसी क्रम में पांच सौ साल बाद नवरात्र की पूजा भी रामलला के दरबार में भव्यता पूर्वक होगी।
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इस बार रामलला के सम्मुख लकड़ी की नहीं चांदी की चौकी पर नवरात्र का कलश स्थापित कर नौ दिनों तक पूजा-अर्चना की जाएगी। छह दिसंबर 1992 की घटना के बाद टेंट में विराजमान हुए रामलला की पूजा-अर्चना, पर्व व त्योहार तमाम बंदिशों के चलते परंपरा निर्वहन तक ही सीमित रहते थे।
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अब परिस्थिति बदली है न सिर्फ भव्य राममंदिर का निर्माण हो रहा है बल्कि रामलला भी टेंट से निकलकर सुविधाओं से युक्त अस्थाई मंदिर में विराजमान हैं।
यहां विराजते ही रामलला के ठाठ-बाट में निरंतर वृद्धि हो रही है। हर पर्व व उत्सव की भव्यता देखतेे ही बनती है। नवरात्र में रामलला के सम्मुख कलश स्थापना की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
पहले लकड़ी की चौकी पर नवरात्र में कलश स्थापित किया जाता था, लेकिन इस वर्ष पहली बार नवरात्र में चांदी की चौकी पर नवरात्र का कलश स्थापित किया जाएगा।
प्रधान अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि मध्यप्रदेश से आए भक्तों बाबूलाल महाजन, मुकेश महाजन, राजेश महाजन आदि द्वारा साढ़े किलो की चांदी का चरणपादुका एवं रामजी के आभूषण व चांदी की चौकी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई है।
इसी चांदी की चौकी को नवरात्र में रामलला के सम्मुख स्थापित कर नौ दिनों तक पूजा-अर्चना की जाएगी। राममंदिर निर्माण में वैदिक वास्तुु शास्त्र का भी पूरा ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए देश के जाने-माने वास्तुविदों की एक कमेटी भी बनाई है।
वास्तु के अनुसार ही रामलला के गर्भगृह की सुरक्षा के लिए 10 दिग्पाल की स्थापना की जाएगी। गर्भगृह में सभी 10 दिशाओं के अलग-अलग रक्षक देवताओं की शिला स्थापित की जाएगी।
ये शिलाएं राजस्थान में तैयार की जा रही हैं। वास्तु शास्त्र में मान्यता है कि जहां पर दिग्पाल रहते हैं वह भूमि, मंदिर व भवन दीर्घकाल तक सुरक्षित बना रहता है।
राम मंदिर के गर्भगृह में सभी 10 दिशाओं के अलग-अलग रक्षक देवताओं का भी वास होगा। विधिवित पूजन अर्चना के साथ देवताओं के आयुध (अस्त्र) से युक्त शिलाएं गर्भगृह में प्रतिष्ठित की जाएंगी।
वास्तु शास्त्र के दृष्टिकोण से ये सभी शिलाएं मंदिर को दीर्घकालिक बनाने में सहायक होंगी। इन दिनों राजस्थान में शिलाएं तैयार की जा रही हैं। कुल 10 शिलाएं गढ़ी जा रही हैं।
इन सभी शिलाओं पर दिशाओं के अनुरूप रक्षक देवता के अस्त्र उत्कीर्ण किए जा रहे हैं। इन्हें मई माह में गर्भगृह में स्थापित करने की योजना है। आचार्य प्रवीण बताते हैं कि प्रमुख रूप से चार दिशाएं पूरब, उत्तर, पश्चिम व दक्षिण हैं।
चार विदिशाएं ईशान, अग्नि, नैऋत्य व वायव्य हैं। इसके अलावा ऊर्ध्व व अधो दिशाएं भी शास्त्रों में मानी गई हैं। इन दिशाओं के देवता ही दिग्पाल के नाम से जाने जाते हैं, जो निर्धारित दिशाओं से संसार की रक्षा करते हैं।
वह बताते हैं कि जहां पर इन देवताओं को पूजित कर स्थापित किया जाता है वह भूमि, मंदिर व भवन दीर्घकाल तक सुरक्षित बना रहता है।
इस बार श्रीराम जन्मोत्सव की भव्यता देखते ही बनेगी। त्रेतायुग जीवंत होता दिखेगा। रामजन्मोत्सव का लाइव प्रसारण होगा। रामलला को 56 भोग लगेगा। नवीन वस्त्र धारण कराए जाएंगे। रामलला, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न को सोने का मुकुट पहनाया जाएगा। पहली वार नवरात्र पर चांदी की चौकी पर कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार का रामजन्मोत्सव पूरी दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र होगा।- डॉ.अनिल मिश्र, ट्रस्टी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट