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जनम लियो रघुरइया अवध मा...
Sat, 13 Apr 2019 11:59 PM IST
vivek vivek
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
Published by: vivek vivek
Updated Sat, 13 Apr 2019 11:59 PM IST
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अयोध्या में शनिवार को कनक भवन में राम लला के जन्म के बाद बधाई गान गाते कलाकार व थिरकते श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
रामनगरी में आस्था का सैलाब, जिधर देखो श्रद्धालु ही श्रद्धालु, अवसर था प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव का। भक्तों के पग बिना रुके अपने आराध्य की चौखट पर पहुंचने के लिए तेजी से बढ़ते गए। जन्मोत्सव में शामिल होने की बेसब्री प्रत्यक्ष दर्शित हो रही थी। आस्था के आगे प्रचंड धूप व तमाम दुश्वारियां बौनी साबित हुईं।
रामनगरी में श्रीराम जन्मोत्सव आस्था का शिखर निरूपित करने वाला रहा। जन्मोत्सव के मुख्य आकर्षण कनक भवन समेत नगरी के छोटे-बड़े हजारों मंदिरों के गर्भगृह में घंटों पूर्व से निष्पादित राम जन्म का कर्मकांड ऐन 12 बजे तब अभिव्यक्त हुआ, जब मंदिरों के कपाट खुले और ‘भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी..’ के साथ आरती शुरू हुई।
श्रीरामजन्मोत्सव के प्रतिनिधि गीत जनम लियो रघुरईया अवध मा बाजे बधइया... भी गूंजने लगा। हालांकि तिथि विभेद के चलते इस वर्ष भी शनिवार व रविवार दो दिन मनाई जा रही है। सर्वाधिक गहमा-गहमी शनिवार को वैष्णवों की प्रधानतम पीठ मानी-जाने वाली कनक भवन पर रही।
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कनकभवन में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा, जन्मोत्सव की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही थी, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी। जैसे ही घड़ी की सुई दोपहर 12 पर पहुंची, भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी... के साथ शुरू आरती से संपूर्ण मंदिर परिसर घंटा, घड़ियाल की आवाज से गूंज उठा।
भक्त प्रभु के अवतरण की खुशी में नाचने झूमने लगे। मंदिर में चारों तरफ जय श्रीराम का नारा गूंजने लगा। प्रभु के दर्शन को लाखों उमड़ पड़े जिन्हें नियंत्रित करने में प्रशासन के पसीने छूट गए। आस्था का चरमोत्कर्ष अवर्णनीय रहा। प्रभु की एक झलक पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर प्रागंण में ढोल-नगाड़े के साथ साधु-संत व भक्तों के सोहर व बधाई गीत गूंजने लगे।
भजन-कीर्तन की महफिल भी अभीष्ट के प्राकट्य की प्रतीक्षा में चरम पर पहुंचकर थम गई। मंदिर के प्रांगण में तिल तक रखने की जगह नहीं बची थी। जो जहां था, वहीं अटक कर भगवान श्रीराम जन्म के उल्लास में गोता लगाता दिखा। गर्भगृह का पट खुलते ही सजीले-गर्वीले कनक बिहारी सरकार की छवि का दर्शन कर साधु-संत व श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
रामजन्मोत्सव पर श्रीराम चरित मानस में वर्णित ‘गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद। हरषवंत सब जहं तहं नगर नारि नर वृंद।’ की पंक्ति भी निरूपित होती दिखी। अयोध्या के हजारों मंदिरों में रामजन्म का उल्लास उत्सव के रूप में चरम पर रहा। घंटे-घड़ियाल, ढोल-नगाड़े, पटाखे गूंजे तो अबीर-गुलाल उड़ा श्रद्धालु जन्म के क्षणों में डूबे नृत्य करते रहे।
दशरथमहल बड़ास्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में हुए जन्मोत्सव पर धनुषधारी भगवान के अलौकिक स्वरूप का दर्शन कर भक्त निहाल होते रहे। राजगोपाल, जानकी महल, विअहुति भवन, सद्गुरु सदन गोलाघाट, रंगमहल आदि मंदिरों पर भी उत्सव का विशेष उल्लास मंदिर से सड़कों तक बिखरा रहा।
वहीं रविवार को मणिरामदासजी की छावनी, रामवल्लभाकुंज, जानकी घाट, गोलाघाट समेत अन्य मंदिरों में रामजन्मोत्सव मनाया जाएगा। रामनगरी के प्रसिद्ध चैत्र रामनवमी मेले के मुख्य पर्व पर शनिवार को लाखों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। ब्रह्म मुहूर्त से ही दर्शन-पूजन को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
स्नान दान के बाद श्रद्धालुओं का हुजूम नागेश्वरनाथ की ओर जलाभिषेक को उमड़ पड़ा। जलाभिषेक मेले में स्नान घाट से मंदिरों की चौखट तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। मेले के मुख्य पर्व राम नवमी पर नगरी में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का जमावड़ा था।
स्नान घाटों से लेकर प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीरामजन्मभूमि, कालेराम मंदिर, श्रीराम बल्लभाकुंज, लवकुश मंदिर आदि मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भोर से शुरू हुआ यह क्रम देर शाम तक चलता रहा।
प्रमुख मंदिरों नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी व श्रीराम जन्मभूमि मंदिरों में दर्शनार्थियों की भीड़ देर शाम तक दर्शन-पूजन के लिए लगी रही। स्नानघाटों पर भोर से ही वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे। सूर्योदय होते ही घाटों पर उत्सव जैसा माहौल रहा। एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि रामनवमी पर सात लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान व दर्शन-पूजन किया है।
श्रद्धालुओं को पग-पग पर प्रशासनिक अव्यवस्थाओं से दो-चार होना पड़ा। सुरक्षा की दृष्टि से दर्शन के लिए की गई व्यवस्था दर्शनार्थियों पर भारी पड़ी। स्थिति यह रही कि एक मंदिर में दर्शन के बाद दूसरे मंदिर पहुंचने में तीर्थयात्रियों को दो से ढाई किलोमीटर की दूरी का चक्कर लगाना पड़ा।
पुलिस-प्रशासन से सरयू के स्नान से लेकर प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए की गई व्यवस्था दर्शनार्थियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई। मार्ग के एक क्रम में स्थित इन मंदिरों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को दो से ढाई किमी तक की दौड़ कड़ी धूप में लगानी पड़ी। अधिकांश श्रद्धालु एक मंदिर में ही दर्शन कर सके।
श्रीराम जन्मोत्सव के मद्देनजर रामनगरी अभेद्य सुरक्षा घेरे में कैद रही। सरयू के स्नान घाटों से प्रमुख मंदिरों तक सुरक्षा बलों के साथ मजिस्ट्रेट तैनात रहे। पूरे मेला क्षेत्र में यातायात प्रतिबंधित रहा। एसएसपी, डीएम, एडीएम सिटी, एसपी सिटी पुलिस फोर्स के साथ मेला क्षेत्र में भ्रमण कर जायजा लेते और निर्देश देते रहे।
कई स्थान पर भीड़ के बढ़ते दबाव पर अफसर स्वयं भीड़ को नियंत्रित करने के लिए निर्देश देते रहे। अयोध्या की परिधि पर पड़ने वाले बैरियरों पर सुरक्षा कर्मी मुस्तैद थे। संवेदनशील स्थलों और प्रमुख मठ-मंदिरों के आसपास अलग से पुलिस पिकेट तैनात की गई थी।
दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की बैरियरों पर सघन चेकिंग के बाद ही गुजारा गया। विवादित परिसर के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सरयू के स्नान घाटों में प्रमुख मठ-मंदिरों नागेश्वरनाथ, कनक भवन, हनुमानगढ़ी पर भारी भीड़ के मद्देनजर मजिस्ट्रेटों के साथ सुरक्षा कर्मी तैनात रहेे।
मुख्य पर्व के साथ संपन्न हुए चैत्र रामनवमी मेले के बाद श्रद्धालुओं की वापसी भी शुरू हो गई है। हालांकि अभी रविवार को भी रामनवमी पर्व मनाए जाने के कारण लाखों की भीड़ अभी भी अयोध्या में डटी हुई है। शनिवार को दर्शन-पूजन के बाद लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ ने अपने घरों का रुख किया।
इसके चलते रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर वापसी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है। वहीं हाईवे पर साकेत पेट्रोल पंप के पास बने करीब आठ पार्किंगों व सड़क किनारे खड़ी हजारों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली भी श्रद्धालुओं को लेकर रवाना होती दिखी। हालांकि ज्यादातर श्रद्धालु रविवार को वापसी करेंगे, ऐसे में चुनौती रहेगी।
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रामनगरी में श्रीराम जन्मोत्सव आस्था का शिखर निरूपित करने वाला रहा। जन्मोत्सव के मुख्य आकर्षण कनक भवन समेत नगरी के छोटे-बड़े हजारों मंदिरों के गर्भगृह में घंटों पूर्व से निष्पादित राम जन्म का कर्मकांड ऐन 12 बजे तब अभिव्यक्त हुआ, जब मंदिरों के कपाट खुले और ‘भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी..’ के साथ आरती शुरू हुई।
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श्रीरामजन्मोत्सव के प्रतिनिधि गीत जनम लियो रघुरईया अवध मा बाजे बधइया... भी गूंजने लगा। हालांकि तिथि विभेद के चलते इस वर्ष भी शनिवार व रविवार दो दिन मनाई जा रही है। सर्वाधिक गहमा-गहमी शनिवार को वैष्णवों की प्रधानतम पीठ मानी-जाने वाली कनक भवन पर रही।
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कनकभवन में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा, जन्मोत्सव की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही थी, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की उत्सुकता भी बढ़ती जा रही थी। जैसे ही घड़ी की सुई दोपहर 12 पर पहुंची, भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौशल्या हितकारी... के साथ शुरू आरती से संपूर्ण मंदिर परिसर घंटा, घड़ियाल की आवाज से गूंज उठा।
भक्त प्रभु के अवतरण की खुशी में नाचने झूमने लगे। मंदिर में चारों तरफ जय श्रीराम का नारा गूंजने लगा। प्रभु के दर्शन को लाखों उमड़ पड़े जिन्हें नियंत्रित करने में प्रशासन के पसीने छूट गए। आस्था का चरमोत्कर्ष अवर्णनीय रहा। प्रभु की एक झलक पाने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर प्रागंण में ढोल-नगाड़े के साथ साधु-संत व भक्तों के सोहर व बधाई गीत गूंजने लगे।
भजन-कीर्तन की महफिल भी अभीष्ट के प्राकट्य की प्रतीक्षा में चरम पर पहुंचकर थम गई। मंदिर के प्रांगण में तिल तक रखने की जगह नहीं बची थी। जो जहां था, वहीं अटक कर भगवान श्रीराम जन्म के उल्लास में गोता लगाता दिखा। गर्भगृह का पट खुलते ही सजीले-गर्वीले कनक बिहारी सरकार की छवि का दर्शन कर साधु-संत व श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
रामजन्मोत्सव पर श्रीराम चरित मानस में वर्णित ‘गृह गृह बाज बधाव सुभ प्रगटे सुषमा कंद। हरषवंत सब जहं तहं नगर नारि नर वृंद।’ की पंक्ति भी निरूपित होती दिखी। अयोध्या के हजारों मंदिरों में रामजन्म का उल्लास उत्सव के रूप में चरम पर रहा। घंटे-घड़ियाल, ढोल-नगाड़े, पटाखे गूंजे तो अबीर-गुलाल उड़ा श्रद्धालु जन्म के क्षणों में डूबे नृत्य करते रहे।
दशरथमहल बड़ास्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में हुए जन्मोत्सव पर धनुषधारी भगवान के अलौकिक स्वरूप का दर्शन कर भक्त निहाल होते रहे। राजगोपाल, जानकी महल, विअहुति भवन, सद्गुरु सदन गोलाघाट, रंगमहल आदि मंदिरों पर भी उत्सव का विशेष उल्लास मंदिर से सड़कों तक बिखरा रहा।
वहीं रविवार को मणिरामदासजी की छावनी, रामवल्लभाकुंज, जानकी घाट, गोलाघाट समेत अन्य मंदिरों में रामजन्मोत्सव मनाया जाएगा। रामनगरी के प्रसिद्ध चैत्र रामनवमी मेले के मुख्य पर्व पर शनिवार को लाखों श्रद्धालुओं ने पतित पावनी सरयू में आस्था की डुबकी लगाई। ब्रह्म मुहूर्त से ही दर्शन-पूजन को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
स्नान दान के बाद श्रद्धालुओं का हुजूम नागेश्वरनाथ की ओर जलाभिषेक को उमड़ पड़ा। जलाभिषेक मेले में स्नान घाट से मंदिरों की चौखट तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। मेले के मुख्य पर्व राम नवमी पर नगरी में देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं का जमावड़ा था।
स्नान घाटों से लेकर प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, क्षीरेश्वरनाथ, श्रीरामजन्मभूमि, कालेराम मंदिर, श्रीराम बल्लभाकुंज, लवकुश मंदिर आदि मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रही। भोर से शुरू हुआ यह क्रम देर शाम तक चलता रहा।
प्रमुख मंदिरों नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी व श्रीराम जन्मभूमि मंदिरों में दर्शनार्थियों की भीड़ देर शाम तक दर्शन-पूजन के लिए लगी रही। स्नानघाटों पर भोर से ही वैदिक मंत्रोच्चार गूंजते रहे। सूर्योदय होते ही घाटों पर उत्सव जैसा माहौल रहा। एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया ने बताया कि रामनवमी पर सात लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान व दर्शन-पूजन किया है।
श्रद्धालुओं को पग-पग पर प्रशासनिक अव्यवस्थाओं से दो-चार होना पड़ा। सुरक्षा की दृष्टि से दर्शन के लिए की गई व्यवस्था दर्शनार्थियों पर भारी पड़ी। स्थिति यह रही कि एक मंदिर में दर्शन के बाद दूसरे मंदिर पहुंचने में तीर्थयात्रियों को दो से ढाई किलोमीटर की दूरी का चक्कर लगाना पड़ा।
पुलिस-प्रशासन से सरयू के स्नान से लेकर प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी, कनक भवन, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए की गई व्यवस्था दर्शनार्थियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई। मार्ग के एक क्रम में स्थित इन मंदिरों के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को दो से ढाई किमी तक की दौड़ कड़ी धूप में लगानी पड़ी। अधिकांश श्रद्धालु एक मंदिर में ही दर्शन कर सके।
श्रीराम जन्मोत्सव के मद्देनजर रामनगरी अभेद्य सुरक्षा घेरे में कैद रही। सरयू के स्नान घाटों से प्रमुख मंदिरों तक सुरक्षा बलों के साथ मजिस्ट्रेट तैनात रहे। पूरे मेला क्षेत्र में यातायात प्रतिबंधित रहा। एसएसपी, डीएम, एडीएम सिटी, एसपी सिटी पुलिस फोर्स के साथ मेला क्षेत्र में भ्रमण कर जायजा लेते और निर्देश देते रहे।
कई स्थान पर भीड़ के बढ़ते दबाव पर अफसर स्वयं भीड़ को नियंत्रित करने के लिए निर्देश देते रहे। अयोध्या की परिधि पर पड़ने वाले बैरियरों पर सुरक्षा कर्मी मुस्तैद थे। संवेदनशील स्थलों और प्रमुख मठ-मंदिरों के आसपास अलग से पुलिस पिकेट तैनात की गई थी।
दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की बैरियरों पर सघन चेकिंग के बाद ही गुजारा गया। विवादित परिसर के आसपास विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सरयू के स्नान घाटों में प्रमुख मठ-मंदिरों नागेश्वरनाथ, कनक भवन, हनुमानगढ़ी पर भारी भीड़ के मद्देनजर मजिस्ट्रेटों के साथ सुरक्षा कर्मी तैनात रहेे।
मुख्य पर्व के साथ संपन्न हुए चैत्र रामनवमी मेले के बाद श्रद्धालुओं की वापसी भी शुरू हो गई है। हालांकि अभी रविवार को भी रामनवमी पर्व मनाए जाने के कारण लाखों की भीड़ अभी भी अयोध्या में डटी हुई है। शनिवार को दर्शन-पूजन के बाद लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ ने अपने घरों का रुख किया।
इसके चलते रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन पर वापसी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है। वहीं हाईवे पर साकेत पेट्रोल पंप के पास बने करीब आठ पार्किंगों व सड़क किनारे खड़ी हजारों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली भी श्रद्धालुओं को लेकर रवाना होती दिखी। हालांकि ज्यादातर श्रद्धालु रविवार को वापसी करेंगे, ऐसे में चुनौती रहेगी।