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आईआईटी में बने तिरपाल तले विराजेंगे रामलला
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 18 Aug 2015 10:34 PM IST
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इससे बंदरों की उछल-कूद से होने वाली क्षति अब नहीं हो सकेगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रामलला के मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर के लिए आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए विशेष तिरपाल का आर्डर दिया गया है।
इसकी कीमत 11 लाख 40 हजार बताई जा रही है। लेकिन पूरा स्ट्रक्चर बनने में दो माह का वक्त लग सकता है। गौरतलब है कि मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर का तिरपाल जुलाई 2014 में तीन साल के लिए बदला गया था। लेकिन यह छह माह में ही कई जगहों से फट गया।
रिसीवर और ऑब्जर्वर की ओर से आंधी-तूफान में बल्ली की कील की जगह से फटने की रिपोर्ट दी गई थी। बाद में बंदरों की उछल-कूद से ये और फट गया। जिससे बारिश का पानी अंदर टपकने लगा।
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ऑब्जर्वर की हर माह के दूसरे रविवार होने वाली नियमित निरीक्षण रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को फैजाबाद के कलेक्टर और दो स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में मरम्मत कराने की मंजूरी दी थी।
इसके बाद आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों ने प्रस्ताव भेजा कि उनके यहां निर्मित तिरपाल हाई क्वालिटी का है। इसके फटने का कोई संकट नहीं है। आग लगने पर भी कोई नुकसान नहीं होता।
बारिश से लेकर ओले पड़ने पर भी कोई असर नहीं पड़ सकता। बांस-बल्ली पर कसा तिरपाल बोझ भी उठा सकता है। इस तिरपाल पर बंदरों की उछल-कूद का कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस प्रस्ताव को स्वीकार करके 80 गुणा 40 फीट में विराजमान रामलला के लिए इस तिरपाल का ऑर्डर दिया जा रहा है। कमिश्नर व रिसीवर सूर्य प्रकाश मिश्र ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर (गर्भ गृह) का फटा तिरपाल बदला जाना है।
इस बार आईआईटी रुड़की से मॉडर्न तकनीक पर बने तिरपाल का ऑर्डर भेजा गया है। ताकि नियत अवधि से पहले कटने-फटने की गुंजाइश न रहे।
इसकी कीमत 11.40 लाख रुपये बताई गई है। जो फायर प्रूफ, वाटर प्रूफ होने के साथ हल्की मार झेलने की झमता रखता है।
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इसकी कीमत 11 लाख 40 हजार बताई जा रही है। लेकिन पूरा स्ट्रक्चर बनने में दो माह का वक्त लग सकता है। गौरतलब है कि मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर का तिरपाल जुलाई 2014 में तीन साल के लिए बदला गया था। लेकिन यह छह माह में ही कई जगहों से फट गया।
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रिसीवर और ऑब्जर्वर की ओर से आंधी-तूफान में बल्ली की कील की जगह से फटने की रिपोर्ट दी गई थी। बाद में बंदरों की उछल-कूद से ये और फट गया। जिससे बारिश का पानी अंदर टपकने लगा।
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ऑब्जर्वर की हर माह के दूसरे रविवार होने वाली नियमित निरीक्षण रिपोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को फैजाबाद के कलेक्टर और दो स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में मरम्मत कराने की मंजूरी दी थी।
इसके बाद आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों ने प्रस्ताव भेजा कि उनके यहां निर्मित तिरपाल हाई क्वालिटी का है। इसके फटने का कोई संकट नहीं है। आग लगने पर भी कोई नुकसान नहीं होता।
बारिश से लेकर ओले पड़ने पर भी कोई असर नहीं पड़ सकता। बांस-बल्ली पर कसा तिरपाल बोझ भी उठा सकता है। इस तिरपाल पर बंदरों की उछल-कूद का कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस प्रस्ताव को स्वीकार करके 80 गुणा 40 फीट में विराजमान रामलला के लिए इस तिरपाल का ऑर्डर दिया जा रहा है। कमिश्नर व रिसीवर सूर्य प्रकाश मिश्र ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर (गर्भ गृह) का फटा तिरपाल बदला जाना है।
इस बार आईआईटी रुड़की से मॉडर्न तकनीक पर बने तिरपाल का ऑर्डर भेजा गया है। ताकि नियत अवधि से पहले कटने-फटने की गुंजाइश न रहे।
इसकी कीमत 11.40 लाख रुपये बताई गई है। जो फायर प्रूफ, वाटर प्रूफ होने के साथ हल्की मार झेलने की झमता रखता है।