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अगर हवा चली तो कच्चे घाट पर लगाए जा सकते हैं दीये
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अयोध्या। छठे दीपोत्सव को भव्य बनाने में अवध विश्वविद्यालय ने इस बार शासन द्वारा निर्धारित 14.50 लाख की जगह 16 लाख दीप जलाने का लक्ष्य बनाया है।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉड में एक बार फिर अपना नाम दर्ज कराने के लिए दीपों का करीब पांच मिनट तक जलना अनिवार्य है। इसको लेकर विवि प्रशासन सभी आवश्यक तैयारियां कर रहा है।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि नदी के पक्के घाट के किनारे लगे दीपक तेज हवा के चलते शायद जल न सके, इसके लिए विकल्प के रुप में कच्चे घाट से चौधरी चरण सिंह घाट तक को भी चिह्नित किया गया है।
इसकी साफ-सफाई कर हर तरह से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ही घाट के स्थान में परिवर्तन किया जाएगा। दीपोत्सव समारोह पर दीप जलाने का मुख्य स्थल राम की पैड़ी है।
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अभी तक हर वर्ष इसके 32 घाटों पर दीप जलाए जाते थे। इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य को लेकर यह जगह कम पड़ेगी। लक्ष्य पूरा करने के लिए इस बार 40 घाटों पर दीप जलाए जाएंगे।
अवध विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूर्व में राम की पैड़ी पर पंप स्टेशन से लक्ष्मण किला से आगे सद्गुरु सदन तक के घाटों का चयन किया था। पक्के घाट पर स्थित यह घाट ठीक नदी के किनारे हैं। यहां हमेशा हवा रहती है।
इससे दीप जलने में व्यवधान आ सकता है। इसको लेकर अवध विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका विकल्प तैयार किया है। इसके तहत ठीक इसके पूरब में स्थित चौधरी चरण सिंह तक के कच्चे घाट का विकल्प के रूप में चयन किया है।
इस घाट से नदी की धारा दूर रहती है, साथ ही घाट के उत्तरी ओर बाउंड्रीवाल भी बनी हुई है। इससे हवा चलने पर भी दीप बुझने की संभावना कम रहेगी।
अवध विवि के दीपोत्सव के सह नोडल प्रभारी डॉॅ. संग्राम सिंह ने बताया कि अवध विश्वविद्यालय की दीपोत्सव टीम ने इसका निरीक्षण कर अपनी सहमति देते हुए कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर यहां पर दीप लगाए जा सकते हैं।
इसके बाद इस घाट की साफ-सफाई कर इसे तैयार करने का निर्देश दिया गया है। कहा कि समारोह को भव्य और सफल बनाने के लिए हर संभव तैयारी की जा रही है।
हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखा जा रहा है। हमारा प्रयास है कि एक बार फिर दीपोत्सव अयोध्या की भव्यता पर चार चांद लगाए। दीपोत्सव में जलने वाले करीब 16 लाख दीपों में प्रत्येक में 40 एमएल सरसों का तेल और एक बाती डाली जाएगी।
इसके लिए करीब 55 हजार लीटर सरसों के तेल की आवश्यकता होगी। दीप लगाने के लिए पिछली बार करीब 12 स्वयंसेवकों की जरूरत पड़ी थी। जबकि इस बार दीपों की संख्या बढ़ने पर यह संख्या बढ़ाकर 18 हजार कर दी गई है।
दीप जलाने के लिए इन स्वयंसेवकों को तीन दिन मेहनत करनी होगी। ऐसे में उन्हें भोजन देने की जिम्मेदारी और इनको कार्यक्रम स्थल तक ले जाने की जिम्मेदारी भी इस बार अवध विवि प्रशासन निभाएगा।
पांच वर्षों में जले दीपों की संख्या
वर्ष कुल दीप
2017 1,80, 000
2018 3,01,152
2019 5,50,000
2020 5,51,000
2021 9,41,551
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गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉड में एक बार फिर अपना नाम दर्ज कराने के लिए दीपों का करीब पांच मिनट तक जलना अनिवार्य है। इसको लेकर विवि प्रशासन सभी आवश्यक तैयारियां कर रहा है।
संभावना व्यक्त की जा रही है कि नदी के पक्के घाट के किनारे लगे दीपक तेज हवा के चलते शायद जल न सके, इसके लिए विकल्प के रुप में कच्चे घाट से चौधरी चरण सिंह घाट तक को भी चिह्नित किया गया है।
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इसकी साफ-सफाई कर हर तरह से तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ही घाट के स्थान में परिवर्तन किया जाएगा। दीपोत्सव समारोह पर दीप जलाने का मुख्य स्थल राम की पैड़ी है।
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अभी तक हर वर्ष इसके 32 घाटों पर दीप जलाए जाते थे। इस वर्ष निर्धारित लक्ष्य को लेकर यह जगह कम पड़ेगी। लक्ष्य पूरा करने के लिए इस बार 40 घाटों पर दीप जलाए जाएंगे।
अवध विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूर्व में राम की पैड़ी पर पंप स्टेशन से लक्ष्मण किला से आगे सद्गुरु सदन तक के घाटों का चयन किया था। पक्के घाट पर स्थित यह घाट ठीक नदी के किनारे हैं। यहां हमेशा हवा रहती है।
इससे दीप जलने में व्यवधान आ सकता है। इसको लेकर अवध विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसका विकल्प तैयार किया है। इसके तहत ठीक इसके पूरब में स्थित चौधरी चरण सिंह तक के कच्चे घाट का विकल्प के रूप में चयन किया है।
इस घाट से नदी की धारा दूर रहती है, साथ ही घाट के उत्तरी ओर बाउंड्रीवाल भी बनी हुई है। इससे हवा चलने पर भी दीप बुझने की संभावना कम रहेगी।
अवध विवि के दीपोत्सव के सह नोडल प्रभारी डॉॅ. संग्राम सिंह ने बताया कि अवध विश्वविद्यालय की दीपोत्सव टीम ने इसका निरीक्षण कर अपनी सहमति देते हुए कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर यहां पर दीप लगाए जा सकते हैं।
इसके बाद इस घाट की साफ-सफाई कर इसे तैयार करने का निर्देश दिया गया है। कहा कि समारोह को भव्य और सफल बनाने के लिए हर संभव तैयारी की जा रही है।
हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखा जा रहा है। हमारा प्रयास है कि एक बार फिर दीपोत्सव अयोध्या की भव्यता पर चार चांद लगाए। दीपोत्सव में जलने वाले करीब 16 लाख दीपों में प्रत्येक में 40 एमएल सरसों का तेल और एक बाती डाली जाएगी।
इसके लिए करीब 55 हजार लीटर सरसों के तेल की आवश्यकता होगी। दीप लगाने के लिए पिछली बार करीब 12 स्वयंसेवकों की जरूरत पड़ी थी। जबकि इस बार दीपों की संख्या बढ़ने पर यह संख्या बढ़ाकर 18 हजार कर दी गई है।
दीप जलाने के लिए इन स्वयंसेवकों को तीन दिन मेहनत करनी होगी। ऐसे में उन्हें भोजन देने की जिम्मेदारी और इनको कार्यक्रम स्थल तक ले जाने की जिम्मेदारी भी इस बार अवध विवि प्रशासन निभाएगा।
पांच वर्षों में जले दीपों की संख्या
वर्ष कुल दीप
2017 1,80, 000
2018 3,01,152
2019 5,50,000
2020 5,51,000
2021 9,41,551