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सूर्य को अर्घ्य देकर हिंदू नववर्ष का अभिनंदन
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अयोध्या। रामनगरी में शनिवार को भगवान सूर्य को विधि-विधान पूर्वक अर्घ्य देकर हिंदू नववर्ष का भव्य स्वागत किया गया। विक्रमी संवत 2079 नव संवत्सर के शुभारंभ पर सुबह 5.30 बजे बड़ी संख्या में साधु-संत, गुरुकुल के बच्चे व संघ के कार्यकर्ता सरयूतट पर उमड़े। उन्होंने सरयू के जल से अर्घ्य देकर देश में अमन-चैन और सनातन संस्कृति की समृद्धि की कामना की। वहीं श्रीरामजन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन गर्भगृह स्थल पर भी पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद नई धर्मध्वजा फहराई गई।
नव संवत्सर पर श्रीरामजन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन गर्भगृह स्थल पर नई धर्मध्वजा फहराई गई। इस अवसर पर मंदिर निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों व मजदूरों को मिठाई भी बांटकर नववर्ष की खुशी मनाई गईं। नव संवत्सर महोत्सव पर निर्माणाधीन गर्भगृह स्थल पर वैदिक आचार्यों की देखरेख में पूजन-अर्चन कराया गया। वैदिक आचार्य नारद भट्टाराई व दुर्गा प्रसाद गौतम ने वैदिक विधान से ध्वजा पूजन करवाया। इसके बाद पुरानी को हटाकर नई धर्मध्वजा गर्भगृह स्थल पर फहराई गई।
नववर्ष चेतना समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के संरक्षक महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि हिंदू नववर्ष को उत्सव के रूप में मनाने की आवश्यकता है। नववर्ष चेतना समिति के संयोजक प्रवीण दुबे ने बताया कि भारतीय नववर्ष का गौरव फिर प्राप्त करने के प्रयत्न स्वरूप चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2079 को सरयू आरती घाट पर रामनगरी में उदीयमान सूर्य को वैदिक मंत्रोच्चारों के मध्य अर्घ्य देकर हिंदू नववर्ष का स्वागत किया गया।
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इस दौरान महंत शशिकांत दास, वशिष्ठ गुरुकुल के निदेशक डॉ. दिलीप सिंह, प्रधानाचार्य अवनि शुक्ला, संघ के महानगर प्रचारक अनिल, इं. रवि तिवारी, सत्येंद्र श्रीवास्तव, अवधराम शुक्ला व अनिरुद्ध शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे।
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नव संवत्सर पर श्रीरामजन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन गर्भगृह स्थल पर नई धर्मध्वजा फहराई गई। इस अवसर पर मंदिर निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों व मजदूरों को मिठाई भी बांटकर नववर्ष की खुशी मनाई गईं। नव संवत्सर महोत्सव पर निर्माणाधीन गर्भगृह स्थल पर वैदिक आचार्यों की देखरेख में पूजन-अर्चन कराया गया। वैदिक आचार्य नारद भट्टाराई व दुर्गा प्रसाद गौतम ने वैदिक विधान से ध्वजा पूजन करवाया। इसके बाद पुरानी को हटाकर नई धर्मध्वजा गर्भगृह स्थल पर फहराई गई।
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नववर्ष चेतना समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के संरक्षक महंत गिरीशपति त्रिपाठी ने कहा कि हिंदू नववर्ष को उत्सव के रूप में मनाने की आवश्यकता है। नववर्ष चेतना समिति के संयोजक प्रवीण दुबे ने बताया कि भारतीय नववर्ष का गौरव फिर प्राप्त करने के प्रयत्न स्वरूप चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत 2079 को सरयू आरती घाट पर रामनगरी में उदीयमान सूर्य को वैदिक मंत्रोच्चारों के मध्य अर्घ्य देकर हिंदू नववर्ष का स्वागत किया गया।
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इस दौरान महंत शशिकांत दास, वशिष्ठ गुरुकुल के निदेशक डॉ. दिलीप सिंह, प्रधानाचार्य अवनि शुक्ला, संघ के महानगर प्रचारक अनिल, इं. रवि तिवारी, सत्येंद्र श्रीवास्तव, अवधराम शुक्ला व अनिरुद्ध शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे।