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पाइलिंग टेस्टिंग के तीन-तीन भूमिगत स्तंभों के तैयार होंगे चार सेट
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अयोध्या। राममंदिर के लिए नींव खोदने से पहले शुरू हुई टेस्ट पाईलिंग के तहत तीन-तीन भूमिगत स्तंभों के चार सेट तैयार किए जाने हैं। जिसमें से अब तक दो तैयार हो चुके हैं और तीसरे सेट का भी एक पिलर बनकर तैयार हो चुका है। जब चारों सेट तैयार हो जाएंगे तो सभी का एक साथ आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञ परीक्षण करेंगे उसकी रिपोर्ट के आधार पर राममंदिर की नींव के लिए स्थाई पाइलिंग का कार्य किया जाएगा।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि पहला और दूसरा सेट मूल मंदिर के परिधि से बाहर बनाया जा चुका है। जबकि तीसरा सेट मध्य भाग में तैयार किया जा रहा है। राम मंदिर सौ मीटर गहरी और और एक मीटर व्यास की 1200 पाइलिंग पर टिका होगा। उन्होंने बताया कि 12 टेस्ट पाइलिंग का निर्माण कराया जा रहा है। जो चार सेट में तैयार किए जा रहे हैं। अब तक सात टेस्ट पाइलिंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
इसी सप्ताह के अंत तक बाकी पांच का निर्माण हो जाना है। सैकड़ों फीट गहरी खुदाई के साथ टेस्ट पाइलिंग में विशेष तकनीक से आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञों द्वारा बताए गये सीमेंट-गिट्टी का मिश्रण डाला गया है।
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मंदिर की मजबूती पर है सर्वाधिक फोकस
टेस्ट पाइलिंग पर लगभग उतना ही भार दिया जाएगा, जितना भार राम मंदिर में प्रयुक्त होने वाली शिलाओं का होगा। शिलाओं के भार से टेस्ट पाइलिंग में होने वाला परिवर्तन निर्माण की आधुनिकतम तकनीक से रिकॉर्ड किया जाएगा। इसी के आधार पर चेन्नई स्थित एलएंडटी के मुख्यालय पर तकनीकी विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। डॉ. अनिल मिश्र बताते हैं कि हमारा सर्वाधिक फोकस मंदिर की मजबूती पर है। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि मंदिर एक हजार से अधिक वर्ष तक अक्षुण्ण रहे।
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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि पहला और दूसरा सेट मूल मंदिर के परिधि से बाहर बनाया जा चुका है। जबकि तीसरा सेट मध्य भाग में तैयार किया जा रहा है। राम मंदिर सौ मीटर गहरी और और एक मीटर व्यास की 1200 पाइलिंग पर टिका होगा। उन्होंने बताया कि 12 टेस्ट पाइलिंग का निर्माण कराया जा रहा है। जो चार सेट में तैयार किए जा रहे हैं। अब तक सात टेस्ट पाइलिंग का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
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इसी सप्ताह के अंत तक बाकी पांच का निर्माण हो जाना है। सैकड़ों फीट गहरी खुदाई के साथ टेस्ट पाइलिंग में विशेष तकनीक से आईआईटी चेन्नई के विशेषज्ञों द्वारा बताए गये सीमेंट-गिट्टी का मिश्रण डाला गया है।
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मंदिर की मजबूती पर है सर्वाधिक फोकस
टेस्ट पाइलिंग पर लगभग उतना ही भार दिया जाएगा, जितना भार राम मंदिर में प्रयुक्त होने वाली शिलाओं का होगा। शिलाओं के भार से टेस्ट पाइलिंग में होने वाला परिवर्तन निर्माण की आधुनिकतम तकनीक से रिकॉर्ड किया जाएगा। इसी के आधार पर चेन्नई स्थित एलएंडटी के मुख्यालय पर तकनीकी विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। डॉ. अनिल मिश्र बताते हैं कि हमारा सर्वाधिक फोकस मंदिर की मजबूती पर है। यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि मंदिर एक हजार से अधिक वर्ष तक अक्षुण्ण रहे।