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Ayodhya News: परकोटे में उकेरे जाएंगे वेद, गीता व रामायण के प्रसंग
Sat, 11 Mar 2023 12:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sat, 11 Mar 2023 12:25 AM IST
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अयोध्या। राममंदिर निर्माण के साथ-साथ परकोटा निर्माण का भी काम शुरू हो चुका है। 800 मीटर लंबे राममंदिर के परकोटे में भारतीय संस्कृति-सनातन संस्कृति के दर्शन होंगे। परकोटे में करीब 125 प्रसंग उकेरे जाएंगे।
इन प्रसंगों में वेद, गीता व रामायण के दर्शन होंगे। सूर्यवंश की पूरी वंशावली भी चित्रित की जाएगी। इसके अलावा ऋषि, आचार्य व संत परंपरा दर्शायी जाएगी।
राममंदिर के परकोटे में उकेरे जाने वाले प्रसंगों को लेकर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट विद्वानों की राय ले रहा है। इसी क्रम में कुछ सुझाव ट्रस्ट के पास आए हैं, जिस पर लगभग सहमति बन भी चुकी है।
बताया गया कि वेदों का दर्शन, सूर्य से वेद प्राप्ति, यज्ञ प्रधान भारतीय संस्कृति, भगीरथ तपस्या, गंगावतरण, महाराजा दिलीप की गोरक्षा, महाराजा रघु का सर्वस्वदान, निर्भय भरत-सिंह के दांत गिनते हुए जैसे चित्रों को परकोटा में उकेरा जाएगा।
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इसी तरह कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश, पतिव्रता सावित्री-यमराज से संवाद, भीष्म की प्रतिज्ञा, महर्षि दधीचि-विश्व रक्षा के लिए अस्थि दान, मार्कण्डेय मुनि की शिवनिष्ठा, आदिकवि वाल्मीकि की करुणा का भी प्रसंग उकेरा जाएगा।
चतुर्वेद-वेदांग, अवतार परंपरा, ऋषि परंपरा, आचार्य परंपरा, संत परंपरा, ज्ञान परंपरा, विज्ञान परंपरा, शौर्य परंपरा, कला परंपरा, साहित्य परंपरा, सूर्यवंश, चंद्र वंश का भी चित्रण परकोटा में किया जाना है।
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इन प्रसंगों में वेद, गीता व रामायण के दर्शन होंगे। सूर्यवंश की पूरी वंशावली भी चित्रित की जाएगी। इसके अलावा ऋषि, आचार्य व संत परंपरा दर्शायी जाएगी।
राममंदिर के परकोटे में उकेरे जाने वाले प्रसंगों को लेकर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट विद्वानों की राय ले रहा है। इसी क्रम में कुछ सुझाव ट्रस्ट के पास आए हैं, जिस पर लगभग सहमति बन भी चुकी है।
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बताया गया कि वेदों का दर्शन, सूर्य से वेद प्राप्ति, यज्ञ प्रधान भारतीय संस्कृति, भगीरथ तपस्या, गंगावतरण, महाराजा दिलीप की गोरक्षा, महाराजा रघु का सर्वस्वदान, निर्भय भरत-सिंह के दांत गिनते हुए जैसे चित्रों को परकोटा में उकेरा जाएगा।
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इसी तरह कुरुक्षेत्र में गीता उपदेश, पतिव्रता सावित्री-यमराज से संवाद, भीष्म की प्रतिज्ञा, महर्षि दधीचि-विश्व रक्षा के लिए अस्थि दान, मार्कण्डेय मुनि की शिवनिष्ठा, आदिकवि वाल्मीकि की करुणा का भी प्रसंग उकेरा जाएगा।
चतुर्वेद-वेदांग, अवतार परंपरा, ऋषि परंपरा, आचार्य परंपरा, संत परंपरा, ज्ञान परंपरा, विज्ञान परंपरा, शौर्य परंपरा, कला परंपरा, साहित्य परंपरा, सूर्यवंश, चंद्र वंश का भी चित्रण परकोटा में किया जाना है।