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कर्मचारियों की गई नौकरी और ठप हो गई आरटीपीसीआर जांच
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अयोध्या। दो विभागों के फेर में फंसने के कारण राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज गंजा में बनी बीएसएल-2 लैब में लगाए गए कर्मचारियों का सेवा विस्तार नहीं हो सका और 25 कर्मचारियों की नौकरी चली गई।
इससे जिले में छह दिनों से आरटी-पीसीआर जांच ठप है। सभी नमूनों को अब जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ की प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
कर्मचारियों के न होने से लाखों की लागत से बनी इस महत्वपूर्ण लैब में सिर्फ मेडिकल कॉलेज के भर्ती मरीजों की ही जांच हो पा रही है। कोरोना महामारी का दौर शुरू हुआ तो कोविड-19 के आरटी-पीसीआर की जांच के लिए जिले में व्यवस्था नहीं थी।
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नमूनों को गोरखपुर और लखनऊ की प्रयोगशालाओं में भेजा जाता था। जहां से रिपोर्ट आने में भी एक सप्ताह तक लग जाता था। इससे मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती थीं।
इस बीच एमसीआई ने मेडिकल कॉलेजों में बायोलॉजी लैब की अनिवार्यता का फरमान जारी किया। मानक को पूर्ण करने के लिए सितंबर 2020 में करीब सवा करोड़ की लागत से बीएसएल-2 लैब का निर्माण किया गया।
जिसका जनपदवासियों को खासा लाभ मिला और कोरोना महामारी के दौरान नमूनों की समय पर यहीं जांच की गई। जिला स्वास्थ्य समिति ने मेडिकल कॉलेज में बनी बीएसएल-2 लैब में वैज्ञानिकों समेत 25 अलग-अलग कर्मचारियों को नियुक्त किया।
इनका वेतन भी एनएचएम द्वारा दिया जाता था। स्टाफ मिलने के बाद इस लैब में क्षमता के अनुरूप करीब ढाई से तीन हजार नमूनों की जांच प्रतिदिन होने लगी।
समय पर रिपोर्ट मिलने से आमजन को भी इलाज में काफी सुविधाएं मिलीं। कुछ दिन तक अयोध्या के अलावा संतकबीरनगर की जांच भी की गई। अब तक इस लैब में आठ लाख 68 हजार नमूनों की जांच हो चुकी है।
मिशन निदेशक ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पत्र भेजकर बताया कि 26 अप्रैल को अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की बैठक में तय हुआ कि एक मई से मेडिकल कॉलेज में बनी लैब में कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय का व्यय भार स्वयं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा उठाया जाएगा।
इस कारण एक मई के बाद से कर्मचारियों का सेवा विस्तार नहीं किया गया। जबकि, इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेज में कोई पत्र नहीं आया।
एक माह तक सभी कर्मचारियों ने लैब में कार्य किया, लेकिन सेवा विस्तार न होने व मानदेय न मिलने के बाद उन्हें घर बैठा दिया गया। कर्मचारियों के न होने से मेडिकल कॉलेज की लैब में कोविड-19 की जांचें छह दिनों से बंद हैं।
सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन आदि के लिए भर्ती होने वाले 15-20 मरीजों की जांच ही की जा रही है। दो विभागों के चक्कर में फंसकर तीन वैज्ञानिकों समेत 25 कर्मचारियों की नौकरी चली गई। इनमें 14 लैब टेक्नीशियन, छह लैब अटेंडेंट व दो डाटा ऑपरेटर शामिल हैं। इन सभी को अलग तिथियों में नियुक्त किया गया था।
लैब में कार्यरत कर्मचारियों का सेवा विस्तार नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया जा रहा है कि अब इनके मानदेय का व्यय भार चिकित्सा शिक्षा विभाग वहन करेगा, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं मिला है। कर्मचारियों के न होने के कारण सिर्फ मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों की जांच ही बड़ी मुश्किल से हो पा रही है। शासन में वार्ता की जा रही है।-डॉ. सत्यजीत वर्मा, प्राचार्य, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज
कोविड के समय बीएसएल-2 लैब में कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियुक्त किया गया था। अब शासन ने इनका मानदेय चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा देने का निर्णय लिया है। जिसके कारण कर्मचारियों का सेवा विस्तार नहीं हो सका है। प्रतिदिन करीब एक हजार से 13 सौ नमूनों की जांच डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ से कराई जा रही है। -डॉ. अजय राजा, सीएमओ
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इससे जिले में छह दिनों से आरटी-पीसीआर जांच ठप है। सभी नमूनों को अब जांच के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ की प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।
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कर्मचारियों के न होने से लाखों की लागत से बनी इस महत्वपूर्ण लैब में सिर्फ मेडिकल कॉलेज के भर्ती मरीजों की ही जांच हो पा रही है। कोरोना महामारी का दौर शुरू हुआ तो कोविड-19 के आरटी-पीसीआर की जांच के लिए जिले में व्यवस्था नहीं थी।
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नमूनों को गोरखपुर और लखनऊ की प्रयोगशालाओं में भेजा जाता था। जहां से रिपोर्ट आने में भी एक सप्ताह तक लग जाता था। इससे मरीजों को दुश्वारियां झेलनी पड़ती थीं।
इस बीच एमसीआई ने मेडिकल कॉलेजों में बायोलॉजी लैब की अनिवार्यता का फरमान जारी किया। मानक को पूर्ण करने के लिए सितंबर 2020 में करीब सवा करोड़ की लागत से बीएसएल-2 लैब का निर्माण किया गया।
जिसका जनपदवासियों को खासा लाभ मिला और कोरोना महामारी के दौरान नमूनों की समय पर यहीं जांच की गई। जिला स्वास्थ्य समिति ने मेडिकल कॉलेज में बनी बीएसएल-2 लैब में वैज्ञानिकों समेत 25 अलग-अलग कर्मचारियों को नियुक्त किया।
इनका वेतन भी एनएचएम द्वारा दिया जाता था। स्टाफ मिलने के बाद इस लैब में क्षमता के अनुरूप करीब ढाई से तीन हजार नमूनों की जांच प्रतिदिन होने लगी।
समय पर रिपोर्ट मिलने से आमजन को भी इलाज में काफी सुविधाएं मिलीं। कुछ दिन तक अयोध्या के अलावा संतकबीरनगर की जांच भी की गई। अब तक इस लैब में आठ लाख 68 हजार नमूनों की जांच हो चुकी है।
मिशन निदेशक ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को पत्र भेजकर बताया कि 26 अप्रैल को अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की बैठक में तय हुआ कि एक मई से मेडिकल कॉलेज में बनी लैब में कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय का व्यय भार स्वयं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा उठाया जाएगा।
इस कारण एक मई के बाद से कर्मचारियों का सेवा विस्तार नहीं किया गया। जबकि, इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से मेडिकल कॉलेज में कोई पत्र नहीं आया।
एक माह तक सभी कर्मचारियों ने लैब में कार्य किया, लेकिन सेवा विस्तार न होने व मानदेय न मिलने के बाद उन्हें घर बैठा दिया गया। कर्मचारियों के न होने से मेडिकल कॉलेज की लैब में कोविड-19 की जांचें छह दिनों से बंद हैं।
सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन आदि के लिए भर्ती होने वाले 15-20 मरीजों की जांच ही की जा रही है। दो विभागों के चक्कर में फंसकर तीन वैज्ञानिकों समेत 25 कर्मचारियों की नौकरी चली गई। इनमें 14 लैब टेक्नीशियन, छह लैब अटेंडेंट व दो डाटा ऑपरेटर शामिल हैं। इन सभी को अलग तिथियों में नियुक्त किया गया था।
लैब में कार्यरत कर्मचारियों का सेवा विस्तार नहीं हो सका है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया जा रहा है कि अब इनके मानदेय का व्यय भार चिकित्सा शिक्षा विभाग वहन करेगा, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कोई जानकारी नहीं मिला है। कर्मचारियों के न होने के कारण सिर्फ मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों की जांच ही बड़ी मुश्किल से हो पा रही है। शासन में वार्ता की जा रही है।-डॉ. सत्यजीत वर्मा, प्राचार्य, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज
कोविड के समय बीएसएल-2 लैब में कर्मचारियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियुक्त किया गया था। अब शासन ने इनका मानदेय चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा देने का निर्णय लिया है। जिसके कारण कर्मचारियों का सेवा विस्तार नहीं हो सका है। प्रतिदिन करीब एक हजार से 13 सौ नमूनों की जांच डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ से कराई जा रही है। -डॉ. अजय राजा, सीएमओ