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सावन झूला महोत्सव की हर तरफ धूम
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Aug 2015 10:56 PM IST
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सांस्कृतिक क्षितिज पर अयोध्या का सावन खास वैशिष्टय लिए हुए आ गया है। क्या मंदिर, क्या मठ, हर जगह परंपरा की धारा संझा होते ही ही जगमोहन में फूट पड़ रही है।
शास्त्रीयता से ओत-प्रोत गीत-संगीत व नृत्य की त्रिवेणी मधुरिम धारा में बह रही है। सरयू की मचलती स्वर्णिम लहरों में उतर भक्त अपनी आस्था अर्पित कर रहे है।
नागेश्वरनाथ मंदिर इलाके में सुबह का दृश्य तो ऐसा दिखा मानों अयोध्या की गलियां सरयू से गलबहिया करने को आतुर हो उठी हो। चहुंओर उल्लास, उमंग और आनंद का अतिरेक, जिससे अंतर्धारा में फूट पड़ रही है रस-सलिला और खिल उठ रहा है भीतर का कमल।
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रामनगरी में सावन मेला शुरू होने के साथ ही मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव परवान चढ़ने लगा है। शनिवार रात से ही मंदिरों में झूले पर चल विग्रहों की वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापना के बाद गीत-संगीत व नृत्य की स्वर लहरियां बिखरने लगी हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आराध्य के दर्शन-पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़ने लगी है। मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव के तहत पारंपरिक, शास्त्रीय गीत-संगीत व नृत्य के कार्यक्रम भी परवान चढ़ने लगे हैं।
शाम होते ही मंदिरों के जगमोहन से तबले की थाप व हारमोनियम की धुनें श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींचने लगीं है। कभी-कभार ऐसा भावपूर्ण माहौल बन जा रहा है कि भक्त अपनी सुध-बुध खो भाव-नर्तन की मुद्रा में हो जाते है।
अयोध्या के तंत्र साधक मंत्र मर्मज्ञ डॉ. रामानंद शुक्ला ने कहा कि सावन में संस्कृति की वैभव की विभिन्न मंदिरों में अभिव्यक्ति होती है। सबकी अपनी खास परंपरा है, जिसमें नहा भक्त ही नहीं अयोध्या भी विह्वल हो उठती है।
अयोध्या के मंदिरों में ‘झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं, आलिन मन मोहने मानौ सुछवि शृंगार बैठे हैं’ ‘घिरि-घिरि आए घुमड़ घनघोर परे रिमझिम बूंद फुहारे, अरे रामा चमकि रही दमिनियां झूले राजा रनिया ऐ हरी’ ‘राम रसिया सरयू किनारे कदम जूरि, भइया राम रसिया हिंडोरा लागे ला बा, हरे रामा रिमझिम बरसे पनियां झूले राजा रनिया रे हरी’ आदि गीत गुंजायमान हो रहे हैं।
विअहुति भवन, सद्गुरु सदन, सियाराम किला, श्रीराम वल्लभाकुंज, हनुमानगढ़ी, श्रीमणिराम दास की छावनी, अशर्फी भवन, कनक भवन, श्रीकालेराम मंदिर, बावन मंदिर, बड़ा स्थान, बड़ा भक्तमाल, कोशलेश सदन आदि मंदिरों के जगमोहन में हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तों और रसिकों को तर-बतर कर दे रहे हैं।
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शास्त्रीयता से ओत-प्रोत गीत-संगीत व नृत्य की त्रिवेणी मधुरिम धारा में बह रही है। सरयू की मचलती स्वर्णिम लहरों में उतर भक्त अपनी आस्था अर्पित कर रहे है।
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नागेश्वरनाथ मंदिर इलाके में सुबह का दृश्य तो ऐसा दिखा मानों अयोध्या की गलियां सरयू से गलबहिया करने को आतुर हो उठी हो। चहुंओर उल्लास, उमंग और आनंद का अतिरेक, जिससे अंतर्धारा में फूट पड़ रही है रस-सलिला और खिल उठ रहा है भीतर का कमल।
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रामनगरी में सावन मेला शुरू होने के साथ ही मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव परवान चढ़ने लगा है। शनिवार रात से ही मंदिरों में झूले पर चल विग्रहों की वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापना के बाद गीत-संगीत व नृत्य की स्वर लहरियां बिखरने लगी हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आराध्य के दर्शन-पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उमड़ने लगी है। मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव के तहत पारंपरिक, शास्त्रीय गीत-संगीत व नृत्य के कार्यक्रम भी परवान चढ़ने लगे हैं।
शाम होते ही मंदिरों के जगमोहन से तबले की थाप व हारमोनियम की धुनें श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खींचने लगीं है। कभी-कभार ऐसा भावपूर्ण माहौल बन जा रहा है कि भक्त अपनी सुध-बुध खो भाव-नर्तन की मुद्रा में हो जाते है।
अयोध्या के तंत्र साधक मंत्र मर्मज्ञ डॉ. रामानंद शुक्ला ने कहा कि सावन में संस्कृति की वैभव की विभिन्न मंदिरों में अभिव्यक्ति होती है। सबकी अपनी खास परंपरा है, जिसमें नहा भक्त ही नहीं अयोध्या भी विह्वल हो उठती है।
अयोध्या के मंदिरों में ‘झूलन में आज सज-धज के युगल सरकार बैठे हैं, आलिन मन मोहने मानौ सुछवि शृंगार बैठे हैं’ ‘घिरि-घिरि आए घुमड़ घनघोर परे रिमझिम बूंद फुहारे, अरे रामा चमकि रही दमिनियां झूले राजा रनिया ऐ हरी’ ‘राम रसिया सरयू किनारे कदम जूरि, भइया राम रसिया हिंडोरा लागे ला बा, हरे रामा रिमझिम बरसे पनियां झूले राजा रनिया रे हरी’ आदि गीत गुंजायमान हो रहे हैं।
विअहुति भवन, सद्गुरु सदन, सियाराम किला, श्रीराम वल्लभाकुंज, हनुमानगढ़ी, श्रीमणिराम दास की छावनी, अशर्फी भवन, कनक भवन, श्रीकालेराम मंदिर, बावन मंदिर, बड़ा स्थान, बड़ा भक्तमाल, कोशलेश सदन आदि मंदिरों के जगमोहन में हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रम भक्तों और रसिकों को तर-बतर कर दे रहे हैं।