{"_id":"64136d143a792caa6708bfa4","slug":"dukhiyari-mamtas-hut-did-not-shower-blessings-of-abode-faizabad-news-c-13-1-131499-2023-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: दुखियारी ममता की झोपड़ी में नहीं बरसी आवास की कृपा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: दुखियारी ममता की झोपड़ी में नहीं बरसी आवास की कृपा
Fri, 17 Mar 2023 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 17 Mar 2023 12:55 AM IST
विज्ञापन
पूरा बाजार (अयोध्या)। एक मां फावड़ा लिए मजदूरी में पसीना बहा रही है। उधर, तीन साल की बेटी फूस की झोपड़ी में भूख मिटाने के लिए सूखे चावल खा रही है। वह झोपड़ी जो बरसात भर टपकती है, वह अयोध्या शहर में बैठे अफसरों से महज 17 किलोमीटर दूर है। बावजूद इसके प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास की कृपा यह दूरी तय नहीं कर सकी।
करीब 450 वर्ग फीट की यह झोपड़ी पूरा बाजार ब्लॉक के गांव खुशहालगंज में है। इसमें विधवा ममता अपने दो छोटे बच्चों पांच वर्षीय लाडली और तीन वर्ष की माधुरी के साथ रहती हैं। नौ महीने पहले सड़क दुर्घटना में ममता के पति राम संवारे की मौत हो गई। इसलिए परिवार चलाने के लिए ममता मनरेगा में मजदूरी करती है।
झोपड़ी के हालात बखूबी अहसास कराते हैं कि यह परिवार कम से कम एक अदद पक्की छत का पात्र जरूर है। गांव के लोग खुद इस गरीब परिवार को आवास न मिलने पर नाराजगी जताते हैं। प्रधान भी इसकी हिमायत करते हैं, मगर जाने कौन सी बाधा ने इस परिवार की छत रोक रखी है।
विज्ञापन
कुमकुम का दर्द भी कम नहीं
झोपड़ी में ही रहने वाले अमरनाथ और उनकी पत्नी कुमकुम के पांच बच्चे हैं। दीपमाला 17 वर्ष ,चंदन 15 वर्ष, लवकुश 10 वर्ष, अंश 6 वर्ष व रुद्र 2 वर्ष का है। कुमकुम कहती हैं कि दोनों लोग मजदूरी करके किसी तरह बच्चों का पेट भर रहे हैं और पढ़ा रहे हैं। ऐसे में खुद से घर बनवा पाना संभव नहीं है।
गरीबों के इस गांव में बहुतेरे पात्र
इस ग्राम सभा की कुल आबादी लगभग 2000 है। इसमें लगभग 55 फ़ीसदी एससी और 40 फीसदी ओबीसी के लोग हैं। प्रधान रीता की मानें तो गांव में केवल दो प्रधानमंत्री आवास पास हुए हैं। गप्रधान के प्रतिनिधि बंसराज कहते हैं कि पिछले कई वर्षों से पात्रता की सूची में शीला देवी, ममता, कुमकुम, सत्यनारायण, चांद अली, विष्णु सहित दर्जनों लोग के नाम शामिल थे। फिर भी उनका नाम सूची से काट दिया गया।
नौ महीने में भी नहीं मिली सहायता राशि
ममता के पति की सड़क हादसे में मौत को नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन उसे अभी तक सरकार से मिलने वाली सहायता राशि नहीं मिल पाई है। इससे ममता की परेशानी और बढ़ गई है।
बेहद गरीब और झोपड़ी में रहने वाले यह लोग किस तरह अपात्र हो गए हैं, इसका परीक्षण करवाया जाएगा। आगामी सूची में इनके नाम शामिल कराकर पात्र लोगों को आवास दिलाया जाएगा।
-आरपी सिंह, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण
विज्ञापन
करीब 450 वर्ग फीट की यह झोपड़ी पूरा बाजार ब्लॉक के गांव खुशहालगंज में है। इसमें विधवा ममता अपने दो छोटे बच्चों पांच वर्षीय लाडली और तीन वर्ष की माधुरी के साथ रहती हैं। नौ महीने पहले सड़क दुर्घटना में ममता के पति राम संवारे की मौत हो गई। इसलिए परिवार चलाने के लिए ममता मनरेगा में मजदूरी करती है।
विज्ञापन
झोपड़ी के हालात बखूबी अहसास कराते हैं कि यह परिवार कम से कम एक अदद पक्की छत का पात्र जरूर है। गांव के लोग खुद इस गरीब परिवार को आवास न मिलने पर नाराजगी जताते हैं। प्रधान भी इसकी हिमायत करते हैं, मगर जाने कौन सी बाधा ने इस परिवार की छत रोक रखी है।
विज्ञापन
कुमकुम का दर्द भी कम नहीं
झोपड़ी में ही रहने वाले अमरनाथ और उनकी पत्नी कुमकुम के पांच बच्चे हैं। दीपमाला 17 वर्ष ,चंदन 15 वर्ष, लवकुश 10 वर्ष, अंश 6 वर्ष व रुद्र 2 वर्ष का है। कुमकुम कहती हैं कि दोनों लोग मजदूरी करके किसी तरह बच्चों का पेट भर रहे हैं और पढ़ा रहे हैं। ऐसे में खुद से घर बनवा पाना संभव नहीं है।
गरीबों के इस गांव में बहुतेरे पात्र
इस ग्राम सभा की कुल आबादी लगभग 2000 है। इसमें लगभग 55 फ़ीसदी एससी और 40 फीसदी ओबीसी के लोग हैं। प्रधान रीता की मानें तो गांव में केवल दो प्रधानमंत्री आवास पास हुए हैं। गप्रधान के प्रतिनिधि बंसराज कहते हैं कि पिछले कई वर्षों से पात्रता की सूची में शीला देवी, ममता, कुमकुम, सत्यनारायण, चांद अली, विष्णु सहित दर्जनों लोग के नाम शामिल थे। फिर भी उनका नाम सूची से काट दिया गया।
नौ महीने में भी नहीं मिली सहायता राशि
ममता के पति की सड़क हादसे में मौत को नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन उसे अभी तक सरकार से मिलने वाली सहायता राशि नहीं मिल पाई है। इससे ममता की परेशानी और बढ़ गई है।
बेहद गरीब और झोपड़ी में रहने वाले यह लोग किस तरह अपात्र हो गए हैं, इसका परीक्षण करवाया जाएगा। आगामी सूची में इनके नाम शामिल कराकर पात्र लोगों को आवास दिलाया जाएगा।
-आरपी सिंह, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण