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फूलों से इत्र बनाने का सपना अधूरा
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि में एरोमा टेक्नोलॉजी का कोर्स दो वर्ष में भी शुरू नहीं हो सका है। इससे फूलों से इत्र बनाने का सपना अधूरा है। हालांकि फूलों से इत्र बनाने की मशीन विवि प्रशासन खरीद चुका है लेकिन बिल्डिंग का कार्य पूर्ण न होने से मशीन स्थापित नहीं हो पा रही है।
दूसरी ओर पिछले दो वर्ष में विवि प्रशासन की ओर शोध छात्रों के लिए किये गए 11 एमओयू में सिर्फ 35 छात्रों को ही इसका लाभ मिल रहा है। कारण ये है कि इसके लिए विवि प्रशासन की ओर से कोई विशेष प्रयास नहीं किया जा रहा है।
अवध विवि ने वर्ष 2017-18 व वर्ष 2018-19 में विश्वस्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता के नाम पर बारी-बारी 11 संस्थाओं से शोध के लिए एमओयू किया था। इसमें केजीएमयू लखनऊ, भारतीय विष-विज्ञान अनुसंधान, एनबीआरआई लखनऊ, सीडीआरआई, राष्ट्रीय मत्सय अनुवांशिकी संस्थान, सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र, इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर, उत्तर प्रदेश ट्रेवल ट्रेड एसोसिएशन, हनुमानगढ़ी नाका एवं एडवांस मैटेरियल एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल शामिल हैं।
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इसमें विवि का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट फूलों से इत्र बनाने व एरोमा टेक्नॉलोजी का नया कोर्स शामिल है। इसमें विवि की ओर से अयोध्या व फैजाबाद के मठ-मंदिरों से निकलने वाले फूलों को नदी में प्रवाहित न करके जल प्रदूषण रोकने की बात कही गई थी। मगर दो वर्ष बाद भी न तो फूलों से इत्र बनाने वाली मशीन लग सकी और न ही एरोमा टेक्नोलॉजी का कोर्स शुरू हो पाया।
हालांकि विवि ने इतनी उपलब्धि जरूर हासिल कर ली है कि एक लाख से अधिक रुपये मशीन के नाम के एमओयू संबंधित संस्थान को दे दिया है। संस्थान ने भी मशीन तैयार कर ली है लेकिन अभी तक ये मशीन लग नहीं पाई है। इसका कारण ये बताया जा रहा है कि अभी प्रस्तावित बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं है। जैसे ही बिल्डिंग बनेगी मशीन लगने समेत अन्य कार्य पूर्ण होंगे।
दूसरी ओर विवि प्रशासन ने अन्य जो एमओयू किए उसमें पर्याप्त शोधार्थी विवि को नहीं मिले हैं। दो वर्ष में सिर्फ 35 शोधार्थियों को एमओयू का लाभ मिला है। विवि एमओयू करके भूल गया लेकिन इसका व्यपक प्रचार-प्रसार नहीं हो सका। इससे जानकारी के अभाव में शोधार्थी लाभ से वंचित हैं।
अवध विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग के एचओडी डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि पिछले सत्र में शिक्षा की गुणवत्ता के तहत जो 11 एमओयू साइन किये हैं, उनमें 35 विद्यार्थियों को शोध का लाभ मिल रहा है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण न होने वेस्टेज फूलों से इत्र बनाने की मशीन नहीं लग पाई है। 12 अक्तूबर के बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने पर मशीन स्थापित की जाएगी।
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दूसरी ओर पिछले दो वर्ष में विवि प्रशासन की ओर शोध छात्रों के लिए किये गए 11 एमओयू में सिर्फ 35 छात्रों को ही इसका लाभ मिल रहा है। कारण ये है कि इसके लिए विवि प्रशासन की ओर से कोई विशेष प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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अवध विवि ने वर्ष 2017-18 व वर्ष 2018-19 में विश्वस्तरीय शैक्षिक गुणवत्ता के नाम पर बारी-बारी 11 संस्थाओं से शोध के लिए एमओयू किया था। इसमें केजीएमयू लखनऊ, भारतीय विष-विज्ञान अनुसंधान, एनबीआरआई लखनऊ, सीडीआरआई, राष्ट्रीय मत्सय अनुवांशिकी संस्थान, सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र, इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर, उत्तर प्रदेश ट्रेवल ट्रेड एसोसिएशन, हनुमानगढ़ी नाका एवं एडवांस मैटेरियल एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल शामिल हैं।
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इसमें विवि का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट फूलों से इत्र बनाने व एरोमा टेक्नॉलोजी का नया कोर्स शामिल है। इसमें विवि की ओर से अयोध्या व फैजाबाद के मठ-मंदिरों से निकलने वाले फूलों को नदी में प्रवाहित न करके जल प्रदूषण रोकने की बात कही गई थी। मगर दो वर्ष बाद भी न तो फूलों से इत्र बनाने वाली मशीन लग सकी और न ही एरोमा टेक्नोलॉजी का कोर्स शुरू हो पाया।
हालांकि विवि ने इतनी उपलब्धि जरूर हासिल कर ली है कि एक लाख से अधिक रुपये मशीन के नाम के एमओयू संबंधित संस्थान को दे दिया है। संस्थान ने भी मशीन तैयार कर ली है लेकिन अभी तक ये मशीन लग नहीं पाई है। इसका कारण ये बताया जा रहा है कि अभी प्रस्तावित बिल्डिंग बनकर तैयार नहीं है। जैसे ही बिल्डिंग बनेगी मशीन लगने समेत अन्य कार्य पूर्ण होंगे।
दूसरी ओर विवि प्रशासन ने अन्य जो एमओयू किए उसमें पर्याप्त शोधार्थी विवि को नहीं मिले हैं। दो वर्ष में सिर्फ 35 शोधार्थियों को एमओयू का लाभ मिला है। विवि एमओयू करके भूल गया लेकिन इसका व्यपक प्रचार-प्रसार नहीं हो सका। इससे जानकारी के अभाव में शोधार्थी लाभ से वंचित हैं।
अवध विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग के एचओडी डॉ. जसवंत सिंह ने बताया कि पिछले सत्र में शिक्षा की गुणवत्ता के तहत जो 11 एमओयू साइन किये हैं, उनमें 35 विद्यार्थियों को शोध का लाभ मिल रहा है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण न होने वेस्टेज फूलों से इत्र बनाने की मशीन नहीं लग पाई है। 12 अक्तूबर के बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने पर मशीन स्थापित की जाएगी।