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सपा से श्वेता को मिला जिला पंचायत अध्यक्ष का टिकट
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 14 Dec 2015 11:05 PM IST
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तमाम विरोधों के बावजूद आखिरकार श्वेता सिंह को समाजवादी पार्टी से जिला पंचायत अध्यक्ष का टिकट मिल ही गया। श्वेता राजनीति में भले ही नवोदित हैं, मगर वह बड़े कारोबारी परिवार की हैं।
परिवार की सत्ताधारी दल के शीर्ष नेताओं तक सीधी पहुंच का श्वेता को फायदा मिला है। हालांकि सपा की जिला कमेटी ने उनके नाम के प्रस्ताव को विरोध के बाद खारिज कर चार अन्य नाम ही सपा मुखिया व मुख्यमंत्री को भेजे थे।
जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रतिष्ठापूर्ण सीट पर सपा से टिकट पाने की होड़ लगी थी, जबकि बसपा से अभी कोई नाम सामने नहीं आया है। इस बार इन्हीं दोनों पार्टियों के समर्थित उम्मीदवारों ने सबसे अधिक जीत दर्ज की है।
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मगर कुल 43 जिला पंचायत सदस्यों में आधे से अधिक का बहुमत फिलहाल किसी दल के साथ नहीं है। ऐसे में सपा की ओर से हर हाल में जीत के लिए सामर्थ्यवान प्रत्याशी पर दांव लगाना तय माना जा रहा था।
जिले से कैबिनेट मंत्री समेत बहुमत में विधायकों और जिलाध्यक्ष का भी श्वेता सिंह के पक्ष में समर्थन माना जा रहा था, इसका प्रस्ताव पहले ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह को भेजा जा चुका था।
मगर इसका पता चलते ही जिला इकाई ने एक सप्ताह पहले बैठक बुलाई तो जिला महासचिव गंगा सिंह यादव ने जैसे ही श्वेता सिंह का प्रस्ताव रखा, कड़ा विरोध शुरू हो गया।
अंतत: विधायक रहे मित्रसेन की पुत्रवधू व जिला पंचायत सदस्य प्रियंका सेन, सयुस के जिलाध्यक्ष अनूप सिंह की माता सोभावती सिंह, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मीना गुप्ता और सपा नेता शंभूनाथ सिंह दीपू का नाम प्रस्तावित कर भेजा गया।
सपाइयों को जैसे ही सोमवार को श्वेता सिंह के प्रत्याशी बनने की खबर मिली, एक खेमा उत्साहित दिखा। इसके पीछे जीत के समीकरण गिनाने शुरू हो गए।
इनका कहना था कि जीत के लिए पर्याप्त बहुमत की गणित श्वेता सिंह का परिवार ही जुटा सकता है। जबकि टिकट कटने से दूसरे खेमों में नाराजगी छाई रही।
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परिवार की सत्ताधारी दल के शीर्ष नेताओं तक सीधी पहुंच का श्वेता को फायदा मिला है। हालांकि सपा की जिला कमेटी ने उनके नाम के प्रस्ताव को विरोध के बाद खारिज कर चार अन्य नाम ही सपा मुखिया व मुख्यमंत्री को भेजे थे।
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जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रतिष्ठापूर्ण सीट पर सपा से टिकट पाने की होड़ लगी थी, जबकि बसपा से अभी कोई नाम सामने नहीं आया है। इस बार इन्हीं दोनों पार्टियों के समर्थित उम्मीदवारों ने सबसे अधिक जीत दर्ज की है।
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मगर कुल 43 जिला पंचायत सदस्यों में आधे से अधिक का बहुमत फिलहाल किसी दल के साथ नहीं है। ऐसे में सपा की ओर से हर हाल में जीत के लिए सामर्थ्यवान प्रत्याशी पर दांव लगाना तय माना जा रहा था।
जिले से कैबिनेट मंत्री समेत बहुमत में विधायकों और जिलाध्यक्ष का भी श्वेता सिंह के पक्ष में समर्थन माना जा रहा था, इसका प्रस्ताव पहले ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह को भेजा जा चुका था।
मगर इसका पता चलते ही जिला इकाई ने एक सप्ताह पहले बैठक बुलाई तो जिला महासचिव गंगा सिंह यादव ने जैसे ही श्वेता सिंह का प्रस्ताव रखा, कड़ा विरोध शुरू हो गया।
अंतत: विधायक रहे मित्रसेन की पुत्रवधू व जिला पंचायत सदस्य प्रियंका सेन, सयुस के जिलाध्यक्ष अनूप सिंह की माता सोभावती सिंह, निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मीना गुप्ता और सपा नेता शंभूनाथ सिंह दीपू का नाम प्रस्तावित कर भेजा गया।
सपाइयों को जैसे ही सोमवार को श्वेता सिंह के प्रत्याशी बनने की खबर मिली, एक खेमा उत्साहित दिखा। इसके पीछे जीत के समीकरण गिनाने शुरू हो गए।
इनका कहना था कि जीत के लिए पर्याप्त बहुमत की गणित श्वेता सिंह का परिवार ही जुटा सकता है। जबकि टिकट कटने से दूसरे खेमों में नाराजगी छाई रही।