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बच्चों की ड्रेस का पता न मिलीं किताबें
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2015 11:11 PM IST
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बुनियादी शिक्षा का हाल यह है कि ड्रेस देने के लिए अभी तक न स्कूलों में नाप ली गई, न कपड़े ही आए। किताबें भी बंटी तो वह भी आधी-अधूरी। गांव-गिरांव के मासूम महकमे की उदासीनता का दंश झेलने को मजबूर है।
जिला मुख्यालय पर मांग के सापेक्ष 15 लाख किताबें पहुंच गई है। लेकिन जिले के हर ब्लॉक में दर्जनों विद्यालय ऐसे हैं जहां के छात्र/छात्राओं की आंखें नई किताबों को पाने के लिए टुकुर-टुकुर इंतजार कर रही है।
पुस्तक वितरण कार्यक्रम में घोर लापरवाही के दृश्य जिले के सभी शिक्षा क्षेत्रों में नजर आ रहे है। विभाग की ओर से यह तय हुआ कि इस बार स्कूलों तक किताबें पहुंचाई जाएगी।
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लेकिन जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार बीआरसी व एनपीआरसी पर किताबे बंडल की बंडल बधी पड़ी हुई है। विभाग से स्कूल तक किताबों के भेजने का टेंडर हुआ था।
लेकिन हाल यह है कि शिक्षकों से विभागीय स्तर से निर्देश जारी हो रहा है कि वे बीआरसी व एनपीआरसी पर जाकर किताब उठा ले। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने टेंडर मामले की जांच की मांग बीएसए से की है।
प्राथमिक स्कूल बेलगरा में छात्र/छात्राओं की तादात सौ है लेकिन यहां पर अभी एक भी किताब नहीं पहुंची है। यहां के प्रधानाध्यापक राजेश दुबे ने बताया कि पुरानी किताबों के सहारे किसी ढंग से काम चला रहे है। कमोबेश ऐसी ही स्याह तस्वीरे प्राथमिक स्कूल सहसीपुर व जूनियर हाईस्कूल सहसीपुर की भी है।
पुस्तक प्रभारी पीएन तिवारी ने कहा कि जिले से 15 लाख किताबों की मांग हुई थी और उसके सापेक्ष सभी किताबें आ गई है।
28 जून से किताबें आनी शुरू हुई और सत्यापन के बाद यहां से भेजी जा रही है। स्कूलों तक किताबें नहीं पहुंचने के बाबत कहा कि यहां से तो भेजा जा रहा है। क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। मामले के बारे में पता लगाया जाएगा।
बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि पुस्तक वितरण के लिए टेंडर हुआ है। ब्लॉकों पर जिला मुख्यालय से किताबें भेजी जा रही है।
वहां से खंड शिक्षाधिकारी व्यैक्तिक स्तर पर वाहन का प्रबंध करके स्कूलों तक भेज रहे है। जितना खर्च हो रहा है, टेंडर लेने वाला उसका भुगतान कर दे रहा है। यदि कहीं कोई दिक्कत है तो मामले की जांच कर समुचित कदम उठाया जाएगा।
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जिला मुख्यालय पर मांग के सापेक्ष 15 लाख किताबें पहुंच गई है। लेकिन जिले के हर ब्लॉक में दर्जनों विद्यालय ऐसे हैं जहां के छात्र/छात्राओं की आंखें नई किताबों को पाने के लिए टुकुर-टुकुर इंतजार कर रही है।
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पुस्तक वितरण कार्यक्रम में घोर लापरवाही के दृश्य जिले के सभी शिक्षा क्षेत्रों में नजर आ रहे है। विभाग की ओर से यह तय हुआ कि इस बार स्कूलों तक किताबें पहुंचाई जाएगी।
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लेकिन जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार बीआरसी व एनपीआरसी पर किताबे बंडल की बंडल बधी पड़ी हुई है। विभाग से स्कूल तक किताबों के भेजने का टेंडर हुआ था।
लेकिन हाल यह है कि शिक्षकों से विभागीय स्तर से निर्देश जारी हो रहा है कि वे बीआरसी व एनपीआरसी पर जाकर किताब उठा ले। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ने टेंडर मामले की जांच की मांग बीएसए से की है।
प्राथमिक स्कूल बेलगरा में छात्र/छात्राओं की तादात सौ है लेकिन यहां पर अभी एक भी किताब नहीं पहुंची है। यहां के प्रधानाध्यापक राजेश दुबे ने बताया कि पुरानी किताबों के सहारे किसी ढंग से काम चला रहे है। कमोबेश ऐसी ही स्याह तस्वीरे प्राथमिक स्कूल सहसीपुर व जूनियर हाईस्कूल सहसीपुर की भी है।
पुस्तक प्रभारी पीएन तिवारी ने कहा कि जिले से 15 लाख किताबों की मांग हुई थी और उसके सापेक्ष सभी किताबें आ गई है।
28 जून से किताबें आनी शुरू हुई और सत्यापन के बाद यहां से भेजी जा रही है। स्कूलों तक किताबें नहीं पहुंचने के बाबत कहा कि यहां से तो भेजा जा रहा है। क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। मामले के बारे में पता लगाया जाएगा।
बीएसए प्रदीप कुमार द्विवेदी ने बताया कि पुस्तक वितरण के लिए टेंडर हुआ है। ब्लॉकों पर जिला मुख्यालय से किताबें भेजी जा रही है।
वहां से खंड शिक्षाधिकारी व्यैक्तिक स्तर पर वाहन का प्रबंध करके स्कूलों तक भेज रहे है। जितना खर्च हो रहा है, टेंडर लेने वाला उसका भुगतान कर दे रहा है। यदि कहीं कोई दिक्कत है तो मामले की जांच कर समुचित कदम उठाया जाएगा।