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पक्षकार धर्मदास भी थे रामजन्मभूमि में पड़ी डकैती के आरोपी

Thu, 08 Aug 2019 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Aug 2019 11:09 PM IST
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Dharmadas was also accused of robbery
अयोध्या। अयोध्या जमीनी विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान बेंच ने पक्षकार निर्मोही अखाड़ा से संबंधित 2.77 एकड़ भूमि के दस्तावेज पेश करने को कहा, जिस पर निर्मोही अखाड़ा ने अपना दावा ठोंका है।
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निर्मोही अखाड़े ने कहा है कि 1982 में हुई डकैती में सभी दस्तावेज खो गए हैं। इस डकैती मामले में हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास भी आरोपी थे।
निर्मोही अखाड़ा के सियाराघव शरण द्वारा डकैती का मुकदमा दर्ज कराया गया था। हालांकि बाद में साक्ष्यों के अभाव में 1985 में कोर्ट ने धर्मदास समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
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निर्मोही अखाड़ा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में पांच जजों की बेंच के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए मांग की थी कि विवादित 2.77 एकड़ की भूमि पर उनका नियंत्रण और प्रबंधन हो।
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उन्होंने कहा कि पूरे विवादित भूमि पर 1934 से ही मुसलमानों को प्रवेश करने पर मनाही है। इस पर कोर्ट ने इससे संबंधित दस्तावेज मांगें तो निर्मोही अखाड़े ने बताया कि 1982 में एक डकैती पड़ी थी जिसमें सारे महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हो गए हैं।
डकैती मामले में 1982 में दी गई तहरीर में सियाराघव शरण ने बताया था कि वह मंदिर रामलला श्री रामजन्मभूमि जो निर्विवाद का महंत व सरवराहकार नियुक्त हैं।
पिछले 14 वर्षों से काबिज रहकर मंदिर का इंतजाम देखता चला आ रहा हूं। मैं निर्मोही अखाड़े के महंत रामकेवल दास का चेला हूं। 16 फरवरी 1982 को करीब 5.30 बजे सुबह अपने कमरे में आगे आसन पर बैठा भगवान का भजन कर रहा था।
तभी मेरे कमरे में एकाएक रामलखन शरण चेला धनुषधारी शरण, रामलाल चेला रामबालक शरण निवासी रामचरित्र मानस भवन, रामकोट अयोध्या, धर्मदास चेला अभिरामदास निवासी हनुमानगढ़ी सहित अन्य 10 व्यक्तियों को जिन्हें देखकर पहचान सकते हैं।
इनमें से रामबालक दास, धर्मदास व राम लखन शरण ने मुझे पकड़ लिया और कमरा बंद कर दिया और साथियों से कहा कि समस्त सामान लूट लो। अन्य साथी सामान लूटने लगे।
उसके बाद कमरे का ताला तोड़ डाला और अंदर जाकर मंदिर का समस्त सामान लूट लिया। दो-तीन संदूक जिसमें भगवान के सोने-चांदी के आभूषण थे। रुपये, सिक्के व अन्य सामान लूट लिया।
फिर कहने लगे कि इसको तालाब में डाल दिया जाए जिससे डूबकर मर जाए। इसके बाद मंदिर संबंधी समस्त मुकदमा समाप्त हो जाएगा।
घबराकर आवाज लगाई जो स्थानीय चौकी पर तैनात सिपाही व कुछ अन्य लोग दौड़कर आए तो जान बच सकी। सियाराघव शरण की इसी तहरीर पर 17 फरवरी को रामलखन शरण, रामलाल व धर्मदास सहित अज्ञात लोगों के विरूद्ध मु.अ.स.87/82, धारा 395 आईपीसी में मुकदमा दर्ज किया गया था।
हालांकि करीब तीन साल तक चले मुकदमे में दिसंबर 1985 में कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में धर्मदास सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
डकैती में इन सामानों की चोरी का था आरोप
डकैती में सियाराघव शरण द्वारा दी गई तहरीर में जिन सामानों के चोरी होने का जिक्र किया गया था उनमें भगवान के आभूषण 4 तोला के पांच मुकुट, 4 सोने की माला, सोने की जंजीर, 5 चांदी की छड़े, 6 चांदी का मुकुट, 12 सोने का तिलक, 12 चांदी का तिलक सहित पीतल, स्टील व लोहे के बड़ी संख्या में बर्तन सहित खाद्य सामग्री चोरी हुई थी। एक आलमारी का ताला तोड़कर मुकदमों से संबंधित कागजात, भगवान रामलला बनाम राम स्वरूप दास से संबंधित कागजात व सभी नक्शे तथा कई रजिस्टर लापता हुए।
कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत करने की तैयारी में निर्मोही अखाड़ा
निर्मोही अखाड़ा के पक्षकार महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि विवादित भूमि पर हमारा ही अधिकार बनता है। दिल्ली में अखाड़ा के सरपंच डॉ. राजारामचंद्राचार्य, अधिवक्ता सुशील जैन, अधिवक्ता रणजीत लाल वर्मा, अधिवक्ता तरूणजीत वर्मा व अखाड़ा के मुख्तार प्रभात सिंह व कार्तिक चोपड़ा मौजूद हैं।

हम अपने दावे से संबंधित कागजात कोर्ट में पेश करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चूंकि अखाड़ा से संबंधित तमाम जरूरी कागजात 1982 में हुई डकैती में लूट गए थे, जिसमें से कुछ जला दिए गए व कुछ को कुएं आदि में लूटने वालों ने फेंक दिया था। इसका मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। बावजूद इसके हमारे अधिवक्ता हमारा पक्ष कोर्ट के समक्ष मजबूती से पेश करेंगे। इसकी तैयारी की जा रही है।
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