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भगवान राम के चरित्र व आदर्शो पर आधारित हो अयोध्या का विकास-मुख्ख्य सचिव
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अयोध्या। प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने बृहस्पतिवार को यहां कहा कि हमें रामायणकालीन व भगवान राम के चरित्र और आदर्शों पर आधारित अयोध्या को विकसित करना है।
इसके लिए जो भी योजनाएं चल रही हैं, उनमें जहां आवश्यक हो एक्सपर्ट/विशेषज्ञों के विचार लिए जाएं। सरसरी तौर पर न करते हुए सभी कार्यों में गुणवत्ता और स्थिरता और उसके दूरगामी प्रभाव को शामिल किया जाय।
आयुक्त सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में पेयजल योजना की समीक्षा में कहा कि धार्मिक स्थल जगन्नाथपुरी की तरह 24 घंटे पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई जाए।
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जिससे कि कहीं भी कोई भी व्यक्ति नल खोलकर पानी पिए और स्टोरेज की आवश्यकता न हों। अयोध्या की गलियों के विकास के लिए नगर आयुक्त विशाल सिंह से कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर व श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पास की गलियों में जैसे विकास किया गया है, उसी प्रकार एवं बेहतर विकास किया जाय।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमें अयोध्या के श्रद्धालुओं को केंद्र में मानकर सुरक्षा व्यवस्था ऐसी करनी है कि किसी श्रद्धालु को दिक्कत न हो। विशेष रूप से पंचकोसी मार्ग, चौदह कोसी मार्ग आदि मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए आराम करने के लिए कुर्सियों आदि का भी निर्माण किया जाय। सभी जगह पेयजल व शौचालय आदि का भी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि हमें अयोध्या को विश्व स्तरीय स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सभी विभागों को समन्वय रूप से कार्य करना होगा। सड़क पर टहलने, बैठने व साइकिलिंग की भी व्यवस्था की जाए।
ऐसी व्यवस्था की जाए कि किसी भी प्रकार से अतिक्रमण न हों। गुप्तारघाट से नयाघाट के आठ किमी. की दूरी को आम लोगों के लिए सुलभ बनाने के लिए सरयू नदी पर घाटों के निर्माण के साथ साथ हल्के वाहनों के आवागमन के लिए आवश्यकतानुसार कंक्रीट की सड़कों का ही निर्माण किया जाय।
कहा कि परियोजनाओं का जो प्रस्तुतीकरण किया गया है। जो पूर्ण हो चुकी हैं। उसको आम जनमानस के लिए नियमानुसार उपयोगी बनाया जाय और गुणवत्ता सहित कार्यों को समय से पूरा किया जाए।
कमिश्नर, डीएम और नगर आयुक्त से कहा कि कोई भी प्रोजेक्ट जो भेजा जाए, उसेे आवश्यकतानुसार मुझे संज्ञान में लाया जाए। जिससे कि उसकी जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान हो सकें। समय से पूरा किया जा सके।
अयोध्या के विकास कार्यों का प्रस्तुतीकरण कमिश्नर एमपी अग्रवाल, डीएम नितीश कुमार, नगर आयुक्त विशाल सिंह सहित अन्य परियोजना के अधिकारियों किया।
कमिश्नर ने बताया कि अयोध्या के विकास के लक्ष्य के लिए श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि व मंदिर निर्माण के मद्देनजर तीन लक्ष्य तय किए गए हैं। जिसमें वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र, पर्यटन केंद्र, स्मार्ट सिटी, सांस्कृतिक, आधुनिक , सुगम्य, सुरम्य, भावनात्मक, स्वच्छ, आयुष्मान, सक्षम अयोध्या आदि को केन्द्र में माना गया है।
बताया कि अयोध्या में 110 परियोजनाएं चल रही हैं, 45 पूर्ण हो चुकी है। इनकी लागत 16 हजार करोड़ है। इसमें मुख्य रूप से आठ कुंडो का कायाकल्प, जल शुद्धीकरण, अयोध्या का सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, अयोध्या के चयनित ऐतिहासिक स्थलों पर सरफेस सुधार, भित्ति चित्र, कलाकृति बनाना, अयोध्या बाईपास के पास मल्टीलेबल कार पार्किंग, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग, राम की पैड़ी व बस डिपो का निर्माण आदि कार्य पूरे हो गए हैं।
अधिकारियों ने प्रमुख योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पांच स्थानों पर भजन संध्या स्थल का निर्माण करना, रामकथा पार्क, मशीनीकृत कार पार्किंग व रेस्टोरेंट, सांस्कृतिक मंच ऑडिटोरियम, मुक्ताकाशी मंच आदि का थ्री पीपी मॉडल पर रख रखाव करना, अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में आर्ट गैलरी, अयोध्या शोध संस्थान का आधुनिकीकरण करना है।
इसके साथ ही शहर को मानक माप दंडों के अनुसार विकसित करना, दीर्घकालिक पेयजल योजना बनाना, मुख्य अयोध्या के 15 वार्डों के गलियों व सड़कों का निर्माण, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण, अयोध्या रेलवे स्टेशन का बेहतर निर्माण कराना और शहर के प्रमुख स्थान, टेढ़ी बाजार चौराहा, कौशलेश कुंड, कलक्ट्रेट कार्यालय, जलकल अमानीगंज, श्रीराम गुलेला मंदिर के सामने वाहन पार्किंग व दुकानों का निर्माण करना, कम्प्रेहेंसीब मोबिलिटी प्लान बनाना है।
समेकित ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान, अयोध्या के जुड़वा शहर के मुख्य मार्ग सहादतगंज से नयाघाट तक तथा सुग्रीव किला से रामजन्म मंदिर मार्ग एवं शृंगार हॉट से राम जन्मभूमि मंदिर मार्ग को विकसित करने के लिए लगभग 1080 करोड़ रुपये की योजनाएं है। मुख्य सचिव ने कहा कि इसको समयबद्ध ढंग से लागू करना है।
अयोध्या के गुप्तारघाट से नयाघाट के सरयू नदी तट को बेहतर बनाना आदि प्रमुख कार्य है। बैठक में सीडीओ अनिता यादव, परियोजना निदेशक अन्य विभागों के मंडलीय अधिकारी, कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने सभी अधिकारियों से औपचारिक परिचय भी प्राप्त किया गया। अफसरों ने यहां पहुंचने पर उनका स्वागत किया।
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इसके लिए जो भी योजनाएं चल रही हैं, उनमें जहां आवश्यक हो एक्सपर्ट/विशेषज्ञों के विचार लिए जाएं। सरसरी तौर पर न करते हुए सभी कार्यों में गुणवत्ता और स्थिरता और उसके दूरगामी प्रभाव को शामिल किया जाय।
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आयुक्त सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में पेयजल योजना की समीक्षा में कहा कि धार्मिक स्थल जगन्नाथपुरी की तरह 24 घंटे पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई जाए।
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जिससे कि कहीं भी कोई भी व्यक्ति नल खोलकर पानी पिए और स्टोरेज की आवश्यकता न हों। अयोध्या की गलियों के विकास के लिए नगर आयुक्त विशाल सिंह से कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर व श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के पास की गलियों में जैसे विकास किया गया है, उसी प्रकार एवं बेहतर विकास किया जाय।
मुख्य सचिव ने कहा कि हमें अयोध्या के श्रद्धालुओं को केंद्र में मानकर सुरक्षा व्यवस्था ऐसी करनी है कि किसी श्रद्धालु को दिक्कत न हो। विशेष रूप से पंचकोसी मार्ग, चौदह कोसी मार्ग आदि मार्गों पर श्रद्धालुओं के लिए आराम करने के लिए कुर्सियों आदि का भी निर्माण किया जाय। सभी जगह पेयजल व शौचालय आदि का भी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने कहा कि हमें अयोध्या को विश्व स्तरीय स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सभी विभागों को समन्वय रूप से कार्य करना होगा। सड़क पर टहलने, बैठने व साइकिलिंग की भी व्यवस्था की जाए।
ऐसी व्यवस्था की जाए कि किसी भी प्रकार से अतिक्रमण न हों। गुप्तारघाट से नयाघाट के आठ किमी. की दूरी को आम लोगों के लिए सुलभ बनाने के लिए सरयू नदी पर घाटों के निर्माण के साथ साथ हल्के वाहनों के आवागमन के लिए आवश्यकतानुसार कंक्रीट की सड़कों का ही निर्माण किया जाय।
कहा कि परियोजनाओं का जो प्रस्तुतीकरण किया गया है। जो पूर्ण हो चुकी हैं। उसको आम जनमानस के लिए नियमानुसार उपयोगी बनाया जाय और गुणवत्ता सहित कार्यों को समय से पूरा किया जाए।
कमिश्नर, डीएम और नगर आयुक्त से कहा कि कोई भी प्रोजेक्ट जो भेजा जाए, उसेे आवश्यकतानुसार मुझे संज्ञान में लाया जाए। जिससे कि उसकी जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान हो सकें। समय से पूरा किया जा सके।
अयोध्या के विकास कार्यों का प्रस्तुतीकरण कमिश्नर एमपी अग्रवाल, डीएम नितीश कुमार, नगर आयुक्त विशाल सिंह सहित अन्य परियोजना के अधिकारियों किया।
कमिश्नर ने बताया कि अयोध्या के विकास के लक्ष्य के लिए श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि व मंदिर निर्माण के मद्देनजर तीन लक्ष्य तय किए गए हैं। जिसमें वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र, पर्यटन केंद्र, स्मार्ट सिटी, सांस्कृतिक, आधुनिक , सुगम्य, सुरम्य, भावनात्मक, स्वच्छ, आयुष्मान, सक्षम अयोध्या आदि को केन्द्र में माना गया है।
बताया कि अयोध्या में 110 परियोजनाएं चल रही हैं, 45 पूर्ण हो चुकी है। इनकी लागत 16 हजार करोड़ है। इसमें मुख्य रूप से आठ कुंडो का कायाकल्प, जल शुद्धीकरण, अयोध्या का सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, अयोध्या के चयनित ऐतिहासिक स्थलों पर सरफेस सुधार, भित्ति चित्र, कलाकृति बनाना, अयोध्या बाईपास के पास मल्टीलेबल कार पार्किंग, पंचकोसी परिक्रमा मार्ग, राम की पैड़ी व बस डिपो का निर्माण आदि कार्य पूरे हो गए हैं।
अधिकारियों ने प्रमुख योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पांच स्थानों पर भजन संध्या स्थल का निर्माण करना, रामकथा पार्क, मशीनीकृत कार पार्किंग व रेस्टोरेंट, सांस्कृतिक मंच ऑडिटोरियम, मुक्ताकाशी मंच आदि का थ्री पीपी मॉडल पर रख रखाव करना, अंतर्राष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में आर्ट गैलरी, अयोध्या शोध संस्थान का आधुनिकीकरण करना है।
इसके साथ ही शहर को मानक माप दंडों के अनुसार विकसित करना, दीर्घकालिक पेयजल योजना बनाना, मुख्य अयोध्या के 15 वार्डों के गलियों व सड़कों का निर्माण, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण, अयोध्या रेलवे स्टेशन का बेहतर निर्माण कराना और शहर के प्रमुख स्थान, टेढ़ी बाजार चौराहा, कौशलेश कुंड, कलक्ट्रेट कार्यालय, जलकल अमानीगंज, श्रीराम गुलेला मंदिर के सामने वाहन पार्किंग व दुकानों का निर्माण करना, कम्प्रेहेंसीब मोबिलिटी प्लान बनाना है।
समेकित ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान, अयोध्या के जुड़वा शहर के मुख्य मार्ग सहादतगंज से नयाघाट तक तथा सुग्रीव किला से रामजन्म मंदिर मार्ग एवं शृंगार हॉट से राम जन्मभूमि मंदिर मार्ग को विकसित करने के लिए लगभग 1080 करोड़ रुपये की योजनाएं है। मुख्य सचिव ने कहा कि इसको समयबद्ध ढंग से लागू करना है।
अयोध्या के गुप्तारघाट से नयाघाट के सरयू नदी तट को बेहतर बनाना आदि प्रमुख कार्य है। बैठक में सीडीओ अनिता यादव, परियोजना निदेशक अन्य विभागों के मंडलीय अधिकारी, कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने सभी अधिकारियों से औपचारिक परिचय भी प्राप्त किया गया। अफसरों ने यहां पहुंचने पर उनका स्वागत किया।