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बोरे में मिलीं मूर्तियां
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 11 Sep 2015 11:18 PM IST
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इस रहस्यमय ढंग से हुई बरामदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मूर्ति बरामदगी जैसी सूचना से इंकार किए जाने से पुलिस व मंदिर से जुड़े लोगों की भूमिका संदेहास्पद जरूर बन गई है।
मंदिर के गर्भगृह में मूर्तियां स्थापित दिख रही हैं और बोरे की मूर्ति भी मंदिर में ही रखी गई है। पिछले पांच सितंबर को रामधाम मंदिर से जुड़े आरईएस के जेई लक्ष्मी प्रसाद यादव ने बताया था कि मंदिर के महंत रामदास सिद्धार्थनगर गए थे।
मंदिर में रहकर पढ़ाई कर रहे रामू यादव ने उन्हें घर पर आकर मंदिर की मूर्ति चोरी होने की जानकारी दी थी। इस पर उन्होंने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। मंदिर आए तो देखा तो आरी से कटा ताला मंदिर के बगल पड़ा था और मूर्तियां गायब थीं।
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कुछ देर बाद पुलिस से पता लगा कि मूर्ति आधे घंटे में बरामद कर ली गई हैं। शाम को सिद्धार्थनगर से लौटे महंत रामदास भी मूर्तियों की न तो पहचान कर सके और न ही चोरी की बात कही थी।
कोतवाली पुलिस भी मूर्तियों के चोरी न होने और इस बाबत कोई तहरीर न मिलने की बात कही थी। जबकि क्षेत्रीय लोग मूर्ति चोरी होने और मंदिर में स्थापित मूर्ति की वास्तविकता पर संदेह जरूर जताते रहे।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर लगभग डेढ़ बजे लोगों ने मंदिर से चंद कदम दूर एक बोरे को फाड़ते हुए बंदर को देखा तो उसे भगाया और जब बोरे में झांका तो मूर्तियां दिखीं। इसकी सूचना पुलिस व मीडिया कर्मियों को दी तो नयाघाट चौकी के दीवान आए और बोरी को उठाकर मंदिर में रखवाकर चले गए।
देर शाम तक कोई पुलिस अधिकारी नहीं आया। क्षेत्र के लोग बोरे में मिली मूर्ति को ही मंदिर की वास्तविक चोरी गई मूर्ति मान रहे हैं। कोतवाल अयोध्या नरेंद्र सिंह ने बताया कि अभी कोई सूचना नहीं मिली है।
मूर्ति कब चोरी हुई यह भी पता नहीं है। जबकि सीओ अयोध्या दिनेश द्विवेदी का कहना है कि बोरे में मूर्ति मिलने की सूचना मिली है। मंदिर वालों की मूर्ति मिल गई।
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मंदिर के गर्भगृह में मूर्तियां स्थापित दिख रही हैं और बोरे की मूर्ति भी मंदिर में ही रखी गई है। पिछले पांच सितंबर को रामधाम मंदिर से जुड़े आरईएस के जेई लक्ष्मी प्रसाद यादव ने बताया था कि मंदिर के महंत रामदास सिद्धार्थनगर गए थे।
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मंदिर में रहकर पढ़ाई कर रहे रामू यादव ने उन्हें घर पर आकर मंदिर की मूर्ति चोरी होने की जानकारी दी थी। इस पर उन्होंने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। मंदिर आए तो देखा तो आरी से कटा ताला मंदिर के बगल पड़ा था और मूर्तियां गायब थीं।
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कुछ देर बाद पुलिस से पता लगा कि मूर्ति आधे घंटे में बरामद कर ली गई हैं। शाम को सिद्धार्थनगर से लौटे महंत रामदास भी मूर्तियों की न तो पहचान कर सके और न ही चोरी की बात कही थी।
कोतवाली पुलिस भी मूर्तियों के चोरी न होने और इस बाबत कोई तहरीर न मिलने की बात कही थी। जबकि क्षेत्रीय लोग मूर्ति चोरी होने और मंदिर में स्थापित मूर्ति की वास्तविकता पर संदेह जरूर जताते रहे।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार, शुक्रवार को दोपहर लगभग डेढ़ बजे लोगों ने मंदिर से चंद कदम दूर एक बोरे को फाड़ते हुए बंदर को देखा तो उसे भगाया और जब बोरे में झांका तो मूर्तियां दिखीं। इसकी सूचना पुलिस व मीडिया कर्मियों को दी तो नयाघाट चौकी के दीवान आए और बोरी को उठाकर मंदिर में रखवाकर चले गए।
देर शाम तक कोई पुलिस अधिकारी नहीं आया। क्षेत्र के लोग बोरे में मिली मूर्ति को ही मंदिर की वास्तविक चोरी गई मूर्ति मान रहे हैं। कोतवाल अयोध्या नरेंद्र सिंह ने बताया कि अभी कोई सूचना नहीं मिली है।
मूर्ति कब चोरी हुई यह भी पता नहीं है। जबकि सीओ अयोध्या दिनेश द्विवेदी का कहना है कि बोरे में मूर्ति मिलने की सूचना मिली है। मंदिर वालों की मूर्ति मिल गई।