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बल्ली हत्याकांड में दो को उम्रकैद
Updated Sat, 18 Nov 2017 11:34 PM IST
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फैजाबाद। शहर के परमजीत सिंह बल्ली हत्याकांड में दो युवकों को कोर्ट ने दोषी पाते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक पर 25 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।
जबकि तीन आरोपियों को कोर्ट ने संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया है। फैसला विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर कोर्ट के जज हरिनाथ पांडेय ने किया।
अधिवक्ता दिनेश तिवारी ने बताया कि, घटना 27 सितंबर 2010 की है। शहर के रिकाबगंज निवासी परमजीत उर्फ बल्ली सुबह सवा छह बजे अपने पुत्र लक्ष्मण ओबराय के साथ जनाना अस्पताल रोड स्थित राममंदिर में पूजा करने जा रहे थे।
जब वह ग्रामीण बैंक के पास पहुंचे तो वहां पहले से घात लगाए बैठे रामनाथ जायसवाल ने लक्ष्मण को पकड़ लिया और रविशंकर वर्मा व एक अज्ञात ने परमजीत को पकड़ लिया। रामनाथ के ललकारने पर विष्णु वर्मा ने परमजीत को गोली मार दी।
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लक्ष्मण अपने पिता को लेकर अस्पताल गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में लक्ष्मण की तहरीर पर रामनाथ जायसवाल, रविशंकर मौर्या, विष्णु वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
विवेचना में धर्मेंद्र गुप्ता व नितिन सोनी का नाम भी प्रकाश में आया था। विवेचना के बाद पुलिस ने रामनाथ को क्लीन चिट दे दी जबकि अन्य चार के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने रविशंकर मौर्य व विष्णु वर्मा को दोषी पाते हुए सजा दी जबकि अन्य को दोषमुक्त कर दिया।
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जबकि तीन आरोपियों को कोर्ट ने संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया है। फैसला विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर कोर्ट के जज हरिनाथ पांडेय ने किया।
अधिवक्ता दिनेश तिवारी ने बताया कि, घटना 27 सितंबर 2010 की है। शहर के रिकाबगंज निवासी परमजीत उर्फ बल्ली सुबह सवा छह बजे अपने पुत्र लक्ष्मण ओबराय के साथ जनाना अस्पताल रोड स्थित राममंदिर में पूजा करने जा रहे थे।
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जब वह ग्रामीण बैंक के पास पहुंचे तो वहां पहले से घात लगाए बैठे रामनाथ जायसवाल ने लक्ष्मण को पकड़ लिया और रविशंकर वर्मा व एक अज्ञात ने परमजीत को पकड़ लिया। रामनाथ के ललकारने पर विष्णु वर्मा ने परमजीत को गोली मार दी।
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लक्ष्मण अपने पिता को लेकर अस्पताल गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले में लक्ष्मण की तहरीर पर रामनाथ जायसवाल, रविशंकर मौर्या, विष्णु वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
विवेचना में धर्मेंद्र गुप्ता व नितिन सोनी का नाम भी प्रकाश में आया था। विवेचना के बाद पुलिस ने रामनाथ को क्लीन चिट दे दी जबकि अन्य चार के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने रविशंकर मौर्य व विष्णु वर्मा को दोषी पाते हुए सजा दी जबकि अन्य को दोषमुक्त कर दिया।