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रामनवमी पर्व को लेकर मठ-मंदिरों में तैयारी तेज
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दो दिन मनाया जाएगा रामनवमी पर्व
अयोध्या। रामनवमी पर्व को लेकर राम नगरी के मठ-मंदिरों में तैयारी तेज है। रामनगरी में रामनवमी का पर्व इस बार दो दिन मनाया जाएगा। कुछ मंदिरों में 13 अप्रैल तो कुछ में 14 अप्रैल को रामनवमी मनाई जाएगी।
नवरात्र का शुभारंभ 6 अप्रैल से हो रहा है। इसी दिन से रामनवमी मेले का भी श्रीगणेश हो जाएगा। नववर्ष की पूर्व संध्या पर पांच अप्रैल को रामकोट की परिक्रमा भी होगी।
चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है। इस वर्ष नवरात्र आठ दिनों की होगी। अष्टमी व नवमी तिथि एक ही दिन मानी जाएगी। जिसके चलते इस वर्ष भी अयोध्या में दो दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा।
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13 अप्रैल को सुबह 8:16 बजे के बाद नवमी तिथि लग जाएगी जो 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक रहेगी। इस लिहाज से कनकभवन, दशरथमहल बड़ास्थान, हनुमानगढ़ी, लाल साहब दरबार, करुणानिधान भवन सहित अन्य कई मंदिरों में 13 को ही रामजन्मोत्सव मनाया जाएगा।
वहीं मणिरामदास की छावनी, श्रीरामजन्मभूमि, श्रीरामबल्लभाकुंज, डाडिया मंदिर, पत्थर मंदिर आदि में उदया तिथि की मान्यता के चलते 14 अप्रैल को रामजन्मोत्सव की धूम होगी।
अयोध्या में रामोपासना का सबसे महत्वपूर्ण, मनोहारी एवं श्रद्धास्पद मंदिर कनकभवन है। प्राचीन मान्यता के अनुसार यह मंदिर सोने का बना था तथा राम विवाह के उपरांत महारानी कैकेयी ने सीताजी को मुंह दिखाई स्वरूप इसे भेंट में उन्हें दिया था।
तभी से इस मंदिर की सत्ता एवं मान्यता जानकी जी के इर्द-गिर्द घूमती है। राम की उपासना का यह रामनगरी में शीर्ष केंद्र माना जाता है तो जानकी जी की भी उपासना एवं उनकी कृपा का प्रमुख तीर्थ माना जाता है।
रामनवमी पर्व पर टीवी चैनलों द्वारा लाइव प्रसारण के माध्यम से रामजन्मोत्सव पूरी दुनिया देखती है। पूरे भारत से पहुंचे श्रद्धालु कनक भवन में श्रीराम जन्म की पावन बेला में मौजूद होते हैं।
त्रेता में भगवान ने राजा दशरथ के जिस महल में जन्म लिया था, उस विरासत की नुमाइंदगी दशरथमहल बड़ास्थान में आज भी होती है। यूं तो इस पीठ की प्राचीनता अनादि है पर वर्ष 1704 ईं में इसके जीर्णोद्धार का श्रेय दिग्गज संत स्वामी रामप्रसादाचार्य को जाता है।
दूसरे पीठाधिपति स्वामी रघुनाथ प्रसादाचार्य ने दशरथमहल को विरासत के अनुरूप आकार देने का प्रयास किया। मंदिर के वर्तमान बिंदुगाद्याचार्य महंत स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य बताते हैं कि जिस स्थल को रामजन्मभूमि माना जाता है, वह दशरथ के महल का प्रसूति घर था।
यहीं रानी कौशल्या ने प्रभु को जन्म दिया था। वे कहते हैं कि दशरथ महल से विश्वामित्र जिस राम को लेकर गए थे वे धनुर्धारी थे, दशरथमहल में आज भी धनुर्धारी भगवान विराजमान हैं रामजन्मोत्सव पर इस मंदिर की धार्मिक आभा देखते ही बनती है।
रामनवमी पर्व पर जहां पूरी दुनिया में राम जन्मोत्सव मनाया जाता है वहीं राम की नगरी में ही विराजमान रामलला का उत्सव संगीनों के साए में बिना किसी उत्सव के मनाया जाता है।
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि इस बार 14 अप्रैल को भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। सुबह पूजन-अर्चन शृंगार के बाद दोपहर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव होगा।बताते हैं कि किसी प्रकार का उत्सव या आयोजन नहीं हो सकता है।
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अयोध्या। रामनवमी पर्व को लेकर राम नगरी के मठ-मंदिरों में तैयारी तेज है। रामनगरी में रामनवमी का पर्व इस बार दो दिन मनाया जाएगा। कुछ मंदिरों में 13 अप्रैल तो कुछ में 14 अप्रैल को रामनवमी मनाई जाएगी।
नवरात्र का शुभारंभ 6 अप्रैल से हो रहा है। इसी दिन से रामनवमी मेले का भी श्रीगणेश हो जाएगा। नववर्ष की पूर्व संध्या पर पांच अप्रैल को रामकोट की परिक्रमा भी होगी।
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चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है। इस वर्ष नवरात्र आठ दिनों की होगी। अष्टमी व नवमी तिथि एक ही दिन मानी जाएगी। जिसके चलते इस वर्ष भी अयोध्या में दो दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा।
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13 अप्रैल को सुबह 8:16 बजे के बाद नवमी तिथि लग जाएगी जो 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक रहेगी। इस लिहाज से कनकभवन, दशरथमहल बड़ास्थान, हनुमानगढ़ी, लाल साहब दरबार, करुणानिधान भवन सहित अन्य कई मंदिरों में 13 को ही रामजन्मोत्सव मनाया जाएगा।
वहीं मणिरामदास की छावनी, श्रीरामजन्मभूमि, श्रीरामबल्लभाकुंज, डाडिया मंदिर, पत्थर मंदिर आदि में उदया तिथि की मान्यता के चलते 14 अप्रैल को रामजन्मोत्सव की धूम होगी।
अयोध्या में रामोपासना का सबसे महत्वपूर्ण, मनोहारी एवं श्रद्धास्पद मंदिर कनकभवन है। प्राचीन मान्यता के अनुसार यह मंदिर सोने का बना था तथा राम विवाह के उपरांत महारानी कैकेयी ने सीताजी को मुंह दिखाई स्वरूप इसे भेंट में उन्हें दिया था।
तभी से इस मंदिर की सत्ता एवं मान्यता जानकी जी के इर्द-गिर्द घूमती है। राम की उपासना का यह रामनगरी में शीर्ष केंद्र माना जाता है तो जानकी जी की भी उपासना एवं उनकी कृपा का प्रमुख तीर्थ माना जाता है।
रामनवमी पर्व पर टीवी चैनलों द्वारा लाइव प्रसारण के माध्यम से रामजन्मोत्सव पूरी दुनिया देखती है। पूरे भारत से पहुंचे श्रद्धालु कनक भवन में श्रीराम जन्म की पावन बेला में मौजूद होते हैं।
त्रेता में भगवान ने राजा दशरथ के जिस महल में जन्म लिया था, उस विरासत की नुमाइंदगी दशरथमहल बड़ास्थान में आज भी होती है। यूं तो इस पीठ की प्राचीनता अनादि है पर वर्ष 1704 ईं में इसके जीर्णोद्धार का श्रेय दिग्गज संत स्वामी रामप्रसादाचार्य को जाता है।
दूसरे पीठाधिपति स्वामी रघुनाथ प्रसादाचार्य ने दशरथमहल को विरासत के अनुरूप आकार देने का प्रयास किया। मंदिर के वर्तमान बिंदुगाद्याचार्य महंत स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य बताते हैं कि जिस स्थल को रामजन्मभूमि माना जाता है, वह दशरथ के महल का प्रसूति घर था।
यहीं रानी कौशल्या ने प्रभु को जन्म दिया था। वे कहते हैं कि दशरथ महल से विश्वामित्र जिस राम को लेकर गए थे वे धनुर्धारी थे, दशरथमहल में आज भी धनुर्धारी भगवान विराजमान हैं रामजन्मोत्सव पर इस मंदिर की धार्मिक आभा देखते ही बनती है।
रामनवमी पर्व पर जहां पूरी दुनिया में राम जन्मोत्सव मनाया जाता है वहीं राम की नगरी में ही विराजमान रामलला का उत्सव संगीनों के साए में बिना किसी उत्सव के मनाया जाता है।
रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि इस बार 14 अप्रैल को भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। सुबह पूजन-अर्चन शृंगार के बाद दोपहर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव होगा।बताते हैं कि किसी प्रकार का उत्सव या आयोजन नहीं हो सकता है।