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प्रशासन ने रोका सौभाग्य योजना में 1

Wed, 28 Nov 2018 11:15 PM IST
Updated Wed, 28 Nov 2018 11:15 PM IST
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प्रशासन ने रोका सौभाग्य योजना में 1
184 करोड़ के घोटाले की साजिश का भंडाफोड़
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अयोध्या। जिले में सौभाग्य योजना में विद्युत कनेक्शन देने के मामले में जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने 184 करोड़ के घोटाले की साजिश का भंडाफोड़ किया है।

योजना के तहत सर्वे और कनेक्शन देने वाली निजी कंपनी ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्युत कनेक्शन वाले 85 फीसदी परिवारों को भी वंचित की श्रेणी में दिखाकर दो लाख 82 हजार उपभोक्ताओं को 287 करोड़ खर्च कर विद्युत कनेक्शन देने की रिपोर्ट दी।

इस पर बजट स्वीकृत हो गया और टेंडर भी हो गया था। मामला पकड़ में आने के बाद डीएम ने पावर कॉर्पोरेशन व लेखपालों की टीम बनाकर जांच कराई तो सारा खेल सामने आ गया।
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डीएम ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को पूरी रिपोर्ट भेजकर लक्ष्य को संशोधित करने का आग्रह किया है। वहीं पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी स्वीकृत बजट को अब संशोधित करने में जुटे हैं।
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सौभाग्य योजना से अयोध्या जिले के ग्रामीण इलाकों में वंचित परिवारों को विद्युत कनेक्शन देेने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए निजी कंपनी ने सर्वे से लेकर कनेक्शन देने तक का टेंडर हासिल किया।

कंपनी ने सर्वे कर बताया कि 2 लाख 82 हजार परिवार बिजली कनेक्शन से वंचित हैं। इस रिपोर्ट के बाद प्रति परिवार 1017.7 रुपये खर्च के हिसाब 287 करोड़ खर्च का प्रस्ताव भेजा गया। इसमें कंपनी की ओर से 82 हजार 930 कनेक्शन भी दे दिए गए।

बताते हैं कि समीक्षा के दौरान जिले में 82 हजार 930 कनेक्शन देने के बाद भी करीब दो लाख परिवारों को और कनेक्शन देने का लक्ष्य देख डीएम चौंक गए। उन्होंने पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी।

इस पर पावर कॉर्पोरेशन के अधिशासी अभियंता व अधीक्षण अभियंता ने जिलाधिकारी को बताया कि निजी कंपनी का सर्वे जमीनी हकीकत से अलग है। करोड़ों रुपये डकारने की तैयारी की गई है।

समीक्षा में पाया कि विकास खंड मसौधा, बीकापुर, पूरा बाजार, मया बाजार, तारून, अमानीगंज, हरिंग्टनगंज, मिल्कीपुर, मवई, रुदौली व सोहावल के चयनित इंफार्मल संयोजन के लिए आवंटित कुल लक्ष्य 85 फीसदी अवास्तविक है।

डीएम ने संबंधित ग्राम पंचायत के लेखपाल और पावर कॉर्पोरेशन के अवर अभियंताओं के टीम बनाकर जांच कराई तो एक लाख 81 हजार 175 कनेक्शन उपलब्ध मिले, जबकि इसे लक्ष्य में शामिल किया गया था।

डीएम ने प्रमुख सचिव ऊर्जा को 17 अक्तूबर को भेजी अपनी रिपोर्ट में गांव-गांव हुए फर्जी सर्वे का जिक्र करते हुए शेष लक्ष्य को घटाकर 16 हजार 983 करने का आग्रह किया है।

इस तरह से प्रस्तावित 287 करोड़ रुपये में से अब 184 करोड़ 38 लाख 73 हजार 220 रुपये सरकार को खर्च नहीं करने होंगे। जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पावर कॉर्पोरेशन की समीक्षा के दौरान विद्युत कनेक्शन से वंचित परिवारों का भारी भरकम लक्ष्य देखकर मुझे झटका लगा था।

उन इलाकों में हाउस होल्ड की संख्या से सर्वे का कोई मैच नहीं हो रहा था। इस पर पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों से तथ्यपरक रिपोर्ट मांगी गई। इसके बाद 9 अक्तूबर को संबंधित गांवों के लेखपाल व पावर कॉर्पोरेशन की टीम बनाकर सर्वे कराया गया।

तब जाकर साफ हुआ कि सर्वे में निजी कंपनी ने गड़बड़ी की है। मामले को शासन के लिए संदर्भित किया गया है। अब कंपनी को शासन से लक्ष्य घटते ही प्रस्तावित धनराशि का भुगतान नहीं होगा। जिले में मात्र 16 हजार 973 कनेक्शन देना ही शेष रह गया है।

मध्यांचल विद्युत वितरण खंड के चीफ इंजीनियर एके सिंह का कहना है कि निजी कंपनी की ओर से की गई सर्वे की रिपोर्ट कहीं भी धरातल पर नहीं दिखाई दे रही थी।

जिन मजरों में 60 व 40 कनेक्शन का प्रस्ताव था, उन मजरों में जब पावर कॉर्पोरेशन की टीम कनेक्शन देने पहुंची तो पाया गया कि मात्र 6 व 10 घरों में ही कनेक्शन दिए जाने हैं।

इस बात को जिलाधिकारी के संज्ञान में लाया गया और जांच के बाद अब पूरी रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है। जिले में 31 दिसंबर तक प्रत्येक घर को बिजली कनेक्शन देने का लक्ष्य निर्धारित है।


अब नई रिपोर्ट के बाद मात्र 16 हजार 973 कनेक्शन दिए जाने शेष रह गए हैं, लेकिन यह पूरा मामला शासन के पाले में है। शासन की स्वीकृति के बाद ही शेष कनेक्शनों की संख्या में घटोत्तरी संभव हो सकेगी।
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