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केएम शुगर मिल के ईडी की जमानत अर्जी खारिज, भेजे गए जेल
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अयोध्या। केएम शुगर मिल मोतीनगर मसौधा के अधिशासी निदेशक सुभाष चंद्र अग्रवाल की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज करके उन्हें जेल भेज दिया। यह आदेश जिला जज नीरज निगम की अदालत से हुआ। बीती 15 जनवरी को ईडी ने अदालत में सरेंडर किया था और उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया था।
जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रामकृष्ण तिवारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट तत्कालीन जिला गन्ना अधिकारी आरबी राम के पत्र पर व एसएसपी के आदेश पर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में आरोप था कि चीनी मिल मोतीनगर द्वारा अग्रिम प्रजाति के गन्ने का सट्टा सामान्य प्रजाति में फीड कराकर गन्ने की खरीद की जा रही थी।
कृषकों के असंतोष को देखते हुए जिला गन्ना अधिकारी ने 27 दिसंबर 2006 को किसानों की समस्याओं का निस्तारण करने के लिए निर्देशित किया था। लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया गया। परिणाम स्वरूप किसानों ने उप गन्ना आयुक्त के यहां 25 जनवरी, 2007 को धरना दिया था। इसके बाद अगेती गन्ना प्रजाति का गन्ना खरीदने की व्यवस्था करवाने के लिए चीनी मिल ने आश्वासन दिया था। लेकिन आश्वासन पर खरे नहीं उतरे।
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इसके बाद किसानों ने फिर शिकायत किया कि जिले के बाहर का गन्ना चीनी मिल मसौधा अवैध रूप से ट्रक की पर्ची जारी करके खरीद रही है। इस पर जिला गन्ना अधिकारी ने एक फरवरी से 12 फरवरी 2007 तक के इंडेंट एवं गन्ना आपूर्ति के आंकड़ों का परीक्षण किया, जिससे पता चला कि चीनी मिल द्वारा गन्ना गैर जिलों का अवैध रूप से खरीदकर जिले के किसानों के हितों का हनन कर रही है और उनका आर्थिक शोषण कर रही है।
इस मामले की विवेचना के बाद विवेचक ने सुभाषचंद्र अग्रवाल के खिलाफ आरोपपत्र धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में अदालत में प्रस्तुत किया था। जिस पर सुभाष चंद्र अग्रवाल ने 15 जनवरी को अदालत में सरेंडर किया था और कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद नियमित जमानत पर हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया।
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जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रामकृष्ण तिवारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट तत्कालीन जिला गन्ना अधिकारी आरबी राम के पत्र पर व एसएसपी के आदेश पर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में आरोप था कि चीनी मिल मोतीनगर द्वारा अग्रिम प्रजाति के गन्ने का सट्टा सामान्य प्रजाति में फीड कराकर गन्ने की खरीद की जा रही थी।
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कृषकों के असंतोष को देखते हुए जिला गन्ना अधिकारी ने 27 दिसंबर 2006 को किसानों की समस्याओं का निस्तारण करने के लिए निर्देशित किया था। लेकिन उसका निस्तारण नहीं किया गया। परिणाम स्वरूप किसानों ने उप गन्ना आयुक्त के यहां 25 जनवरी, 2007 को धरना दिया था। इसके बाद अगेती गन्ना प्रजाति का गन्ना खरीदने की व्यवस्था करवाने के लिए चीनी मिल ने आश्वासन दिया था। लेकिन आश्वासन पर खरे नहीं उतरे।
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इसके बाद किसानों ने फिर शिकायत किया कि जिले के बाहर का गन्ना चीनी मिल मसौधा अवैध रूप से ट्रक की पर्ची जारी करके खरीद रही है। इस पर जिला गन्ना अधिकारी ने एक फरवरी से 12 फरवरी 2007 तक के इंडेंट एवं गन्ना आपूर्ति के आंकड़ों का परीक्षण किया, जिससे पता चला कि चीनी मिल द्वारा गन्ना गैर जिलों का अवैध रूप से खरीदकर जिले के किसानों के हितों का हनन कर रही है और उनका आर्थिक शोषण कर रही है।
इस मामले की विवेचना के बाद विवेचक ने सुभाषचंद्र अग्रवाल के खिलाफ आरोपपत्र धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में अदालत में प्रस्तुत किया था। जिस पर सुभाष चंद्र अग्रवाल ने 15 जनवरी को अदालत में सरेंडर किया था और कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद नियमित जमानत पर हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया।