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होम आइसोलेशन की लांघ रहे सीमाएं, बांट रहे कोरोना
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केस एक :
मसौधा ब्लॉक के एक गांव निवासी एक व्यक्ति पांच अगस्त को चंदन लैब से जांच में संक्रमित हुआ, जिसे होम आइसोलेट कराया गया। नौ अगस्त को मरीज ने दोबारा एमएमयू में जाकर अपनी जांच करा ली और पूर्व के संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी। पोर्टल पर रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव अपलोड हुई तो वह पूर्व का मरीज ही निकला।
केस दो :
पूरा ब्लॉक के एक गांव का एक मरीज दो अगस्त को एंटीजन किट से हुई जांच में पॉजिटिव आया था, जिसे होम आइसोलेट किया गया। दस अगस्त को बिना आइसोलेशन पीरियड पूरा किए हुए मरीज ने आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया। उसमें भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई और पोर्टल से ट्रेस किया गया तो वही मरीज निकला।
अयोध्या। कोरोना संक्रमित एसिंप्टोमेटिक मरीजों को होम आइसोलेशन की सुविधा दिए जाने का कुछ मरीज दुरुपयोग कर रहे हैं। होम आइसोलेशन की सीमाओं को लांघकर मरीज संक्रमण काल में ही अन्यत्र स्थानों पर जाकर दोबारा जांचें करा रहे हैं। इससे वह खुद की जान तो खतरे में डाल ही रहे हैं, साथ ही समाज में भी संक्रमण का खतरा बढ़ा रहे हैं। इधर, पोर्टल पर 4-5 ऐसे मरीजों के चिह्नित होने के बाद विभाग के कान खड़े हो गए हैं। सीएमओ ने ऐसे मरीजों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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कोविड अस्पतालों में तमाम अवस्थाओं के मामले सामने के बाद समाज में छिपे एसिंप्टोमेटिक मरीज कोरोना जांच नहीं करा रहे थे। इन सभी मरीजों को सहूलियत देने के लिए सरकार ने होम आइसोलेशन की व्यवस्था शुरू की है। इसमें सिर्फ एसिंप्टोमेटिक मरीजों को ही रखा जाना था। इन मरीजों को दस दिन तक होम आइसोलेशन के दौरान घर के किसी एक कमरे में अलग रहना होता है।
एक आदमी देखभाल के लिए घर में रहना चाहिए। मरीज का शौचालय अलग होना चाहिए। हर ब्लॉक के लिए गठित टीमें मरीजों के घर जाकर उनसे पूछताछ करती है। स्वास्थ्य अधिकारी 8-10 मरीजों से प्रतिदिन वीडियो कॉल भी करते हैं।
कंट्रोल रूम से सभी मरीजों से ऑक्सीजन लेवल आदि पूछकर अपडेट किया जाता है। यह व्यवस्था लागू होते ही जिले में काफी संख्या में लोगों ने होम आइसोलेशन की सुविधा ली। मंगलवार तक जिले में सक्रिय 521 मरीजों में से 402 मरीज होम आइसोलेशन में थे।
इस सुविधा से जहां काफी संख्या में मरीजों को सहूलियत मिली है, वहीं कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जो व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए होम आइसोलेशन का उल्लंघन कर रहे हैं। होम आइसोलेशन के दौरान ही घर से बाहर निकलकर अपनी जांचें कराते हुए कुछ मरीज चिह्नित हुए हैं। ये लोग अपने कोरोना मरीज होने की जानकारी भी नहीं दे रहे हैं। इससे समाज में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पोर्टल पर अपलोड होते ही ऐसे मरीजों का खुलासा हो रहा है।
कुछ मरीज होम आइसोलेशन का उल्लंघन करते हुए पोर्टल पर ट्रेस हो रहे हैं। इससे खुद को मुसीबत में डाल ही रहे हैं, समाज के लिए भी समस्या पैदा कर रहे हैं। ऐसे मरीजों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. घनश्याम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अयोध्या
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मसौधा ब्लॉक के एक गांव निवासी एक व्यक्ति पांच अगस्त को चंदन लैब से जांच में संक्रमित हुआ, जिसे होम आइसोलेट कराया गया। नौ अगस्त को मरीज ने दोबारा एमएमयू में जाकर अपनी जांच करा ली और पूर्व के संक्रमित होने की जानकारी नहीं दी। पोर्टल पर रिपोर्ट दोबारा पॉजिटिव अपलोड हुई तो वह पूर्व का मरीज ही निकला।
केस दो :
पूरा ब्लॉक के एक गांव का एक मरीज दो अगस्त को एंटीजन किट से हुई जांच में पॉजिटिव आया था, जिसे होम आइसोलेट किया गया। दस अगस्त को बिना आइसोलेशन पीरियड पूरा किए हुए मरीज ने आरटी-पीसीआर टेस्ट कराया। उसमें भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई और पोर्टल से ट्रेस किया गया तो वही मरीज निकला।
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अयोध्या। कोरोना संक्रमित एसिंप्टोमेटिक मरीजों को होम आइसोलेशन की सुविधा दिए जाने का कुछ मरीज दुरुपयोग कर रहे हैं। होम आइसोलेशन की सीमाओं को लांघकर मरीज संक्रमण काल में ही अन्यत्र स्थानों पर जाकर दोबारा जांचें करा रहे हैं। इससे वह खुद की जान तो खतरे में डाल ही रहे हैं, साथ ही समाज में भी संक्रमण का खतरा बढ़ा रहे हैं। इधर, पोर्टल पर 4-5 ऐसे मरीजों के चिह्नित होने के बाद विभाग के कान खड़े हो गए हैं। सीएमओ ने ऐसे मरीजों पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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कोविड अस्पतालों में तमाम अवस्थाओं के मामले सामने के बाद समाज में छिपे एसिंप्टोमेटिक मरीज कोरोना जांच नहीं करा रहे थे। इन सभी मरीजों को सहूलियत देने के लिए सरकार ने होम आइसोलेशन की व्यवस्था शुरू की है। इसमें सिर्फ एसिंप्टोमेटिक मरीजों को ही रखा जाना था। इन मरीजों को दस दिन तक होम आइसोलेशन के दौरान घर के किसी एक कमरे में अलग रहना होता है।
एक आदमी देखभाल के लिए घर में रहना चाहिए। मरीज का शौचालय अलग होना चाहिए। हर ब्लॉक के लिए गठित टीमें मरीजों के घर जाकर उनसे पूछताछ करती है। स्वास्थ्य अधिकारी 8-10 मरीजों से प्रतिदिन वीडियो कॉल भी करते हैं।
कंट्रोल रूम से सभी मरीजों से ऑक्सीजन लेवल आदि पूछकर अपडेट किया जाता है। यह व्यवस्था लागू होते ही जिले में काफी संख्या में लोगों ने होम आइसोलेशन की सुविधा ली। मंगलवार तक जिले में सक्रिय 521 मरीजों में से 402 मरीज होम आइसोलेशन में थे।
इस सुविधा से जहां काफी संख्या में मरीजों को सहूलियत मिली है, वहीं कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जो व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए होम आइसोलेशन का उल्लंघन कर रहे हैं। होम आइसोलेशन के दौरान ही घर से बाहर निकलकर अपनी जांचें कराते हुए कुछ मरीज चिह्नित हुए हैं। ये लोग अपने कोरोना मरीज होने की जानकारी भी नहीं दे रहे हैं। इससे समाज में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर पोर्टल पर अपलोड होते ही ऐसे मरीजों का खुलासा हो रहा है।
कुछ मरीज होम आइसोलेशन का उल्लंघन करते हुए पोर्टल पर ट्रेस हो रहे हैं। इससे खुद को मुसीबत में डाल ही रहे हैं, समाज के लिए भी समस्या पैदा कर रहे हैं। ऐसे मरीजों को चिह्नित किया जा रहा है, उन पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. घनश्याम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अयोध्या