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सावधान! बाजार में बिक रहे कार्बाइड से पके आम

Mon, 29 Jun 2015 11:10 PM IST
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
फैजाबाद/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 29 Jun 2015 11:10 PM IST
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हालांकि केंद्र सरकार कार्बाइड ने फलों को पकाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। लेकिन सस्ता और सुलभ होने की वजह से व्यापारी कार्बाइड का प्रयोग कर रहे हैं।
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कार्बाइड से आम को पकाए जाने की हकीकत परखनी को तो सिविल लाइन चौराहे पर आ जाइए। झबिया, टोकरी और कैरट में आम के साथ कार्बाइड रख कर सरेआम पकाया और बेचा जा रहा है।
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वैसे तो आम के लिए 12 से 16 सप्ताह परिपक्क होता है। लेकिन आठ से दस सप्ताह के अंदर ही बाजार में पके हुए आम उतार दिए जाते हैं। इन आमों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड जैसे घातक रसायनों का प्रयोग किया जाता है।
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जो फलों को त्वरित तो पका देते हैं, लेकिन फल पर जहरीले रसायन का प्रभाव भी मिक्स हो जाता है। कार्बाइड से आम को पका कर सेवन करने से कई गंभीर बीमारियां हो जाती है।

विशेषज्ञों की माने ने कर्क रोग होने का एक कारण कार्बाइड से पके हुए फल हैं। और तो और कार्बाइड से आम व अन्य फलों को पकाने से फलों में स्वाद नहीं होता है। आम में खट्टापन होने के साथ साथ सेहत को भी खराब करता है।

जानकार कहते हैं कि कार्बाइड से फल पकाने पर एसिटलीन जैसी गैस निकलने के बाद आर्सैनिक जैसे भारी तत्व आम छिलके पर चिपक जाते हैं। इससे फल के गूदा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

यही आर्सैनिक फल में विषाक्तता पैदा करता है। फास्फीन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड गैस भी उत्पादित हो सकती है। जो सेहत के लिए अत्यधिक हानिकारक होता है। इससे तंत्रिकातंत्र कमजोर हो जाते हैं। आंख में जलन, मिचली, सिरदर्द से जुड़ी बीमारियां भी हो जाती हैं।


अभिहित अधिकारी वीके पांडेय कहते हैं कि कार्बाइड से पकाए गए आम के खिलाफ अभियान चला कर नमूना संकलित कर जांच के लिए प्रदेश प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जो भी दुकानदार दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।


जिला उद्यान अधिकारी पारसनाथ ने बताया कि आम को पकाने के लिए ईथरल रसायन सबसे सुरक्षित माना जाता है। केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान ने कार्बाइड की जगह ईथरल रसायन की संस्तुति की है। ईथरल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता है।
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