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साहित्यकारों ने सुनाए बेगम अख्तर के जीवन के अफसाने
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पुस्तक मेले में पुस्तक का विमोचन करते अतिथि।
- फोटो : FAIZABAD
अयोध्या। शहर के सिविल लाइन स्थित एक होटल में नारायण दास खत्री मेमोरियल सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित पुस्तक मेले के चौथे दिन साहित्यकारों ने बेगम अख्तर के जीवन के अफसाने सुनाए। शास्त्रीय गायिका श्रुति साडोलिकर काटकर एवं साहित्यकार यतींद्र मिश्र ने उनके जीवन से जुड़े तमाम तथ्यों व जीवनवृत्त पर विस्तृत प्रकाश डाला।
भातखंडे समविश्वविद्यालय लखनऊ की कुलपति एवं शास्त्रीय गायिका श्रुति साडोलिकर काटकर ने बताया कि वे अपने जमाने में उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी, कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनकी बातों को गंभीरता से लेती थीं।
बताया कि तीन साल से पहले किसी को हज की अनुमति नहीं मिलती है लेकिन, छह माह बाद ही बेगम अख्तर ने हज यात्रा की चेष्टा प्रकट की। प्रशासन से अनुमति न मिलने पर वे इंदिरा गांधी के पास गईं और उन्हें दादरा सुनाया।
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इससे प्रभावित होकर जब उन्होंने इसके बदले में कुछ देना चाहा तो बेगम अख्तर ने मुस्कुराते हुए हज यात्रा की इच्छा प्रकट की, जिसे इंदिरा गांधी ने स्वीकृति दे दी। साहित्यकार एवं लेखक यतींद्र मिश्र ने पुस्तक अत्री के बारे में लोगों को अवगत कराया।
साथ ही कहा कि बेगम अख्तर का उनके परिवार से लंबा ताल्लुकात रहा है। बताया कि वे बेहद शौकीन मिजाज की थीं। इस दौरान पूर्व सांसद डॉ निर्मल खत्री, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष राजकुमार खत्री एडवोकेट, नमिता मेहरोत्रा, मेला प्रभारी रीता खत्री, पुनीत मेहरोत्रा, नित्यप्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
मृत्युभोज के टाइटिल कवर का हुआ अनावरण
इसके उपरांत कार्यक्रम में लेखक बालेंद्र द्विवेदी से संवाद किया गया। मेला प्रभारी रीता खत्री एवं नमिता मेहरोत्रा ने उनसे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपनी नाटिका मृत्युभोज, जीवन और समाज का विद्रूप का टाइटिल कवर का अनावरण किया। उन्होंने अपनी पुस्तक मदारीपुर जंक्शन के लिखने का कारण एवं उसकी विशेषता के बारे में भी लोगों को अवगत कराया।
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भातखंडे समविश्वविद्यालय लखनऊ की कुलपति एवं शास्त्रीय गायिका श्रुति साडोलिकर काटकर ने बताया कि वे अपने जमाने में उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी, कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनकी बातों को गंभीरता से लेती थीं।
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बताया कि तीन साल से पहले किसी को हज की अनुमति नहीं मिलती है लेकिन, छह माह बाद ही बेगम अख्तर ने हज यात्रा की चेष्टा प्रकट की। प्रशासन से अनुमति न मिलने पर वे इंदिरा गांधी के पास गईं और उन्हें दादरा सुनाया।
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इससे प्रभावित होकर जब उन्होंने इसके बदले में कुछ देना चाहा तो बेगम अख्तर ने मुस्कुराते हुए हज यात्रा की इच्छा प्रकट की, जिसे इंदिरा गांधी ने स्वीकृति दे दी। साहित्यकार एवं लेखक यतींद्र मिश्र ने पुस्तक अत्री के बारे में लोगों को अवगत कराया।
साथ ही कहा कि बेगम अख्तर का उनके परिवार से लंबा ताल्लुकात रहा है। बताया कि वे बेहद शौकीन मिजाज की थीं। इस दौरान पूर्व सांसद डॉ निर्मल खत्री, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष राजकुमार खत्री एडवोकेट, नमिता मेहरोत्रा, मेला प्रभारी रीता खत्री, पुनीत मेहरोत्रा, नित्यप्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
मृत्युभोज के टाइटिल कवर का हुआ अनावरण
इसके उपरांत कार्यक्रम में लेखक बालेंद्र द्विवेदी से संवाद किया गया। मेला प्रभारी रीता खत्री एवं नमिता मेहरोत्रा ने उनसे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अपनी नाटिका मृत्युभोज, जीवन और समाज का विद्रूप का टाइटिल कवर का अनावरण किया। उन्होंने अपनी पुस्तक मदारीपुर जंक्शन के लिखने का कारण एवं उसकी विशेषता के बारे में भी लोगों को अवगत कराया।